हाईप्रोफाइल अपराधियों का उदयपुर कनेक्‍शन, यहां बाबा राम रहीम-हनीप्रीत मौज उड़ाने आए तो आसाराम से भी जुड़े तार

हाईप्रोफाइल अपराधियों का उदयपुर कनेक्‍शन, यहां बाबा राम रहीम-हनीप्रीत मौज उड़ाने आए तो आसाराम से भी जुड़े तार

madhulika singh | Publish: Jun, 14 2018 01:50:44 PM (IST) | Updated: Jun, 14 2018 02:29:12 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

गुुजरात, मध्यप्रदेश व राजस्थान बॉर्डर पर कोई सुरक्षा नहीं, पड़ोसी राज्यों की पुलिस से सामंजस्य नहीं, सरहद पार करते ही अपराधी बन जाते हैं ‘शेर’

मोहम्मद इलियास/उदयपुर. गुजरात व मध्यप्रदेश राज्यों के बीच ‘त्रिकोण’ में फंसे उदयपुर रसूख वाले बड़े अपराधियों और भगोड़ों के लिए मुफीद स्थल बना हुआ है। थोड़े-थोड़े अंतराल में ये उदयपुर या सीमावर्ती जिलों से पकड़ में आ रहे हैं। पिछले लम्बे समय से यह सिलसिला चलने के बावजूद बॉर्डर की सुरक्षा को लेकर तीनों ही राज्यों की सरकार कतई गंभीर नहीं है। तीनों राज्यों के सीमावर्ती थानों या चौकियों पर तैनात पुलिसकर्मियों में कोई सामंजस्य नहीं है। नतीजतन तीनों राज्यों के शातिर अपराधी बेखौफ अपने मकसद में कामयाब हो रहे हैं। यही नहीं, सीमावर्ती गांव-कस्बों में ठिकाना बनाकर अपराधी फल-फूल रहे हैं।

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अब तक ये आए पकड़ में

- जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को अपशब्द कहने का आरोपी राजेन्द्रङ्क्षसह अपने चालक प्रदीपसिंह के साथ इधर-उधर घूमता हुआ उदयपुर आकर छिपा। सुखेर थाना पुलिस ने उसे चीरवा क्षेत्र में एक होटल से पकड़ा। राजेन्द्रसिंह कठुआ के विधायक व भाजपा के पूर्व मंत्री लालसिंह चौधरी का भाई है।
- दुष्कर्म मामले के आरोपी राम रहीम के भी उदयपुर में तार जुड़े रहे। उसने गिरफ्तारी से 15 दिन पहले उदयपुर में ही अपना बर्थ-डे मनाया। गिरफ्तारी के बाद तथाकथित प्रेमिका हनीप्रीत भी यहीं रही। उसके पकडऩे के लिए भी हरियाणा पुलिस के दल ने यहां डेरा डाला।

- दुष्कर्म के आरोपी आसाराम की गिरफ्तारी के दौरान उसके कई सहयोगियों ने उदयपुर में ही डेरा डाला था। गुजरात पुलिस के दल ने उन्हें सुखेर क्षेत्र से पकड़ा था।
- गुजरात में एक डबल मर्डर में लिप्त आरोपी को भी झाड़ोल में एक बाबा ने शरण दी थी। उसके बाद कुछ समय अपराधी उदयपुर में भी एक व्यापारी के यहां रहे थे।

- वर्ष 2000 में तो यहां अमरीकी दूतावास को उड़ाने की साजिश रचने के आरोपियों को दिल्ली पुलिस ने उदयपुर के आसपास क्षेत्र से पकड़ा था।
- गुजरात पुलिस के एक हैड कांस्टेबल ने अपनी साथी कांस्टेबल की पत्नी माहिम को भगाने के बाद उदयपुर में लाकर उसे पहाड़ी से फेंक दिया। मृत्यु पूर्व दिए बयानों में उसने सारी पोल खोली थी।

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कितने ही अपराध व अपराधी पनपे
- गुजरातियों के उदयपुर काफी मुफीीद है, मौज-शौक के लिए यहां आते हैं। बॉर्डर पर उनके शराब व जुआ के अड्डे हैं।

- गुजरात बॉर्डर पार कर उदयपुर क्षेत्र में कई हत्याओं को अंजाम दिया गया।
- मध्यप्रदेश से मालवा तक मादक पदार्थ तस्करी के सैकड़ों मामले पकड़ में आए।

- हरियाणा से गुजरात शराब तस्करी के तस्करों से सबसे सुगम मार्ग उदयपुर को बना रखा है।
- मध्यप्रदेश के ईरानी गिरोह ने राजस्थान में फर्जी इंस्पेक्टर बनकर कई जिलों में वारदातें की। मध्यप्रदेश के इस गिरोह के बारे में बहुत देर से पता चला।

- मध्यप्रदेश पुलिस को जिस लुटेरे विशाल शर्मा गैंग की लंबे समय से तलाश थी वह छह माह उदयपुर में रहा।
- गुजरात एनकाउंटर में मारे गए मध्यप्रदेश के मोस्ट वांटेड अपराधी सोहराबुद्दीन व तुलसी करीब छह माह तक राजस्थान के अलग-अलग जिलों में रहे।

 

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पुलिस के पास एक-दूसरे का लेखाजोखा नहीं

- तीनों राज्यों की पुलिस मददगार नहीं।
- तीनों राज्यों के वांटेड अपराधियों का लेखा-जोखा एक-दूसरे के पास नहीं।

- सीमा पर सुरक्षा को लेकर तीनों राज्यों की पुलिस गंभीर नहींं।
- तीनों राज्यों के अपराधियों के तौर-तरीकों से पुलिस वाकिफ नहीं।

- किसी भी अपराध से जुड़े हर पहलू की जांच के लिए पूरी टीम की जाना मजबूरी।
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ये हो सकते हैैं उपाय
- राजस्थान-मध्यप्रदेश-गुजरात की पुलिस अपराधियों का लेखा-जोखा ऑनलाइन करें, जिससे अपराध होते ही दोनों राज्यों की पुलिस को पता चल सके। वारदात के तरीके के आधार पर पूर्व चालानशुदा अपराधी की हरकत का पता चल सके।

- तीनों राज्यों की पुलिस की हर छह माह में बैठक हो
-सीमावर्ती राज्यों के थानों के अधिकारी एक दूसरे से मिले

- सरहद पर सुरक्षा के लिए दोनों राज्यों की भूमिका तय हो

 

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