बीमित की मौत के बाद भी काटी किस्तें...मय ब्याज लौटाने के आदेश

बीमित की मौत के बाद भी काटी किस्तें...मय ब्याज लौटाने के आदेश

Krishna Kumar Tanwar | Publish: Nov, 10 2018 07:40:57 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 07:40:58 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

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उदयपुर . गृह ऋण के बीमित अवधि दौरान परिवादी की मौत होने के बावजूद बैंक व बीमा कंपनी ने उसके खाते अनुचित रूप से किस्त की कटौती कर डाली। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व ब्रजेन्द्र सेठ ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी बैंक से राशि का भुगतान कर एनओसी प्राप्त करें। एनओसी की प्रति व गृह ऋण संबंधी लिए दस्तावेज दो माह में प्रार्थिया को लौटाएं। प्राथियों को हुई मानसिक, शारीरिक संताप के बैंक 10 हजार व बीमा कंपनी 25 हजार अदा करें। इसके अलावा शिवकुमार की मृत्यु के बाद जो राशि कटौती की गई वह ब्याज सहित परिवादिया को लौटावें।न्यायालय ने यह निर्णय रघुनाथपुरा निवासी अनिता चेतियार की ओर से देना बैंक बापूबाजार के बैंक मैनेजर व यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शाखा सर्कल के मैनेजर के खिलाफ दायर परिवाद में दिया। परिवादिया के पति शिवकुमार ने बैंक से 12 एवं 8 लाख रुपए के ऋण लिए थे। बैंक ने यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी से होम केयर पॉलिसी करवाई। बीमा अवधि के दौरान ही शिवकुमार की मृत्यु हो गई लेकिन इसके बावजूद इंश्योरेंस कंपनी ने बैंक की बकाया राशि का भुगतान नहीं कर परिवादिया पर दबाव बनाया। पति की मृत्यु की सूचना देने के बावजूद अनुचित तरीके से दो किस्तों के कुल 39654 रुपए ले लिए। आपत्ति करने के बावजूद विपक्षी ने न तो राशि लौटाई न ही प्रोपर्टी के दस्तावेज दिए।

 

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न्यायालय में प्रकट की गई वे काफी खेदजनक हैं

न्यायालय ने सुनवाई के बाद माना कि मृतक का ऋण खाता पूर्णत: बैंक व बीमा कंपनी से सुरक्षित होने के बावजूद जिस तरह से विपक्षियों ने जो परिस्थितियां न्यायालय में प्रकट की गई वे काफी खेदजनक हैं। महिला पति के असामयिक निधन से अचानक पारिवारिक दायित्यों के निर्वहन के साथ-साथ वैधव्य जीवन जीने के लिए मजबूर हो गई है। ऐसी परिस्थिति में मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए विपक्षी का परस्पर यह संयुक्त दायित्व था कि वे उक्त ऋण बंद करवाते तथा मकान से संबंधित मूल दस्तावेज प्राथियां को लौटाने की कार्रवाई अमल में लाते।

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