सेवा में दोष मानते हुए अदालत इस कंपनी को ये दिया आदेश...

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By: Krishna

Published: 18 Dec 2018, 07:02 PM IST

उदयपुर . कार दुर्घटना को हृदयघात से मौत होना बताकर क्लेम खारिज करने पर स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी की सेवा में दोष मानते हुए उसे परिवादिया को दो क्लेम के 37 लाख रुपए मय ब्याज के देने के आदेश दिए।गोकुलपुरा बोहरागणेश कॉलोनी निवासी सुनंदा देवपुरा ने अश्विनी बाजार स्थित द ओरियंटल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड जरिये ब्रांच मैनेजर के खिलाफ दो वाद पेश किए। इसमें बताया कि उसके पति रमेशचन्द्र देवपुरा ने विपक्षी कम्पनी से दो पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस पॉलिसी करवा रखी थी। बीमित अवधि के दौरान 4 सितम्बर 2016 को एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई। बीमा कम्पनी को सूचित करने के साथ ही पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई, लेकिन बीमा कम्पनी ने देवपुरा की मौत हृदयघात से प्राकृतिक बताते हुए क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि वह हाइपरटेंशन व कार्डिक बीमारी से ग्रसित था। गाड़ी चलाते समय कंट्रोल नहीं रख सकने के कारण कार टकराई लेकिन वह मामूली ही क्षतिग्रस्त हुई थी। साथ ही कार में सवार पत्नी को कोई चोट नहीं आई। घटना की रिपोर्ट उसी दिन थाने में दर्ज नहीं करवाकर बीमा कम्पनी को पहले सूचना दी गई। इस मामले में विशेषज्ञ व चिकित्सा अधिकारी का परीक्षण अभी शेष है। यह प्रकरण सिविल न्यायालय का है जिसे सुनने का अधिकार इस न्यायालय को नहीं है।

 

सुनवाई के दौरान कोई भी नहीं मिला प्रमाण

स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष केबी कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व बृजेन्द्र सेठ ने सुनवाई के बाद माना कि जांच अधिकारी ने कोई साक्ष्य बीमित के परिजन व संबंधित चिकित्सालय से नहीं लिए जिससे तय हो कि वह हृदय रोग से ग्रसित था। इस संबंध में पूर्व में किसी भी चिकित्साधिकारी से जांच करवाई हो या बात की हो, ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। न्यायालय ने विपक्षी बीमा कम्पनी को आदेश दिया कि वह परिवादिया को दोनों बीमा क्लेम के करीब 37 लाख रुपए दो माह में अदा करें। नियत अवधि में भुगतान नहीं देने पर 10 प्रतिशत ब्याज देय होगा। इसके अलावा न्यायालय ने परिवादिया को दोनों प्रकरण में मानसिक, शारीरिक व वाद व्यय के 10-10 हजार रुपए अलग से दिलाए।

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