अनुदान का समायोजन नहीं करने पर बैंक पर हर्जाना...स्थायी लोक अदालत का निर्णय

अनुदान का समायोजन नहीं करने पर बैंक पर हर्जाना...स्थायी लोक अदालत का निर्णय

Krishna Kumar Tanwar | Publish: Sep, 16 2018 06:21:28 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

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उदयपुर. ऋण खातों में सरकार की ओर से दी गई अनुदान राशि को समायोजित नहीं करने पर स्थायी लोक अदालत ने बैंक की घोर लापरवाही मानते हुए 50 हजार रुपए का हर्जाना लगाया। अदालत अध्यक्ष केबी. कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व ब्रजेन्द्र सेठ ने जय अम्बे स्वयं सहायता समूह हिमावतों की भागल, सेमारी जरिए सचिव लीला पत्नी मोडज़ी पटेल ने जिला परिषद जरिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एसबीआई शाखा सराड़ा व शास्त्री सर्कल जरिए मैनेजर के खिलाफ वाद में यह निर्णय दिया। न्यायालय ने निर्णय में कहा कि राष्ट्रीयकृत विपक्षी बैंक का यह कृत्य न सिर्फ सेवाओं में कमी है वरन अनावश्यक मुकदमेबाजी को बढ़ावा देने वाला भी है, जिसकी पुनरावृत्ति भविष्य में अपेक्षित नहीं हो। इसके लिए बैंक पर हर्जाना लगाने के साथ ही उसे एक माह की अवधि में परिवादी के ऋण खाते में अनुदान राशि को क्रेडिट करते हुए संशोधित स्टेटमेंट जारी करने व संशोधित गणना में बैंक की ओर से कोई पेनल्टी, ब्याज लिया हो तो उसे निरस्त करने के आदेश दिए। साथ ही परिवादी को क्षतिपूर्ति व परिवाद व्यय के 13 हजार रुपए अलग से दिलाए। -- यह था मामला परिवादी ने बताया कि संस्था का गठन राज्य सरकार की स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत किया गया जिसके अधीन ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रुप से स्वावलंबी बनाने के लिए राज्य सरकार से विशेष अनुदान ऋण देय था। योजना के तहत परिवादी संस्था ने 10 सदस्यों से मासिक राशि जमा की गई एवं उसका खाता एसबीआई सराड़ा शाखा में खुलवाया। योजना के तहत सभी दस सदस्यों ने भैंसें क्रय करने के लिए ऋण आवेदन पेश किए। बैंक ने 3 जनवरी 2012 व 25 जनवरी 2013 को दो किस्तों में 3.38 लाख रुपए ऋण दिया गया। ऋण की अदायगी परिवादी संस्था के सभी सदस्यों ने नियमित रूप से कर 3.30 लाख से अधिक की राशि चुका दी। उक्त योजना के तहत एक लाख रुपए अनुदान देय था, लेकिन इसका समायोजन नहीं होने के कारण बैंक में यह राशि बकाया रही जो ब्याज सहित 1.80 लाख रुपए हो चुकी है। बैंक ने सभी सदस्यों को 2 मार्च 2017 को विधिक नोटिस प्राप्त होने पर पता चला कि उक्त ऋण पेटे 1.54 लाख रुपए एवं उसके बाद का ब्याज बकाया है, जिसकी बैंक वसूली करना चाहता है।

 

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नोटिस पर सभी सदस्यों ने जिला परिषद में आपत्ति दर्ज करवाई। जिला परिषद ने एसबीआई शास्त्री सर्कल शाखा में पत्र लिखकर बताया कि सभी शाखाओं में खातों की अनुदान राशि वर्ष 2011 में ही भेज दी गई थी, जिसके प्रमाण भेजे जाने पर बैंक ने जिला परिषद को सूचित किया कि उनके द्वारा उक्त ऋण के अनुदान के स्वरूप एक लाख एवं बीमा के 3400 रुपए सहित कुल एक लाख 3 हजार 400 रुपए 6 जून 2011 को ही सराड़ा बैंक शाखा में भिजवा दी गई। किन्तु उक्त शाखा की लापरवाही के कारण न तो उक्त राशि का वितरण किया गया और न हीं राशि को खातों में समायोजित किया गया। बैंक ने राशि प्राप्त नहीं होना बताकर वाद खारिज करने की मांग की।

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