ऐसे कैसे कर सकते है मां-बाप, जिंदगी के 8 साल ने मासूम को बना दिया ‘मुसाफिर’

ऐसे कैसे कर सकते है मां-बाप, जिंदगी के 8 साल ने मासूम को बना दिया ‘मुसाफिर’
ऐसे कैसे कर सकते है मां-बाप, जिंदगी के 8 साल ने मासूम को बना दिया ‘मुसाफिर’

Mohammed Iliyas | Updated: 19 Sep 2019, 12:22:42 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

ऐसे कैसे कर सकते है मां-बाप, जिंदगी के 8 साल ने मासूम को बना दिया ‘मुसाफिर’

मोहम्मद इलियास/उदयपुर

दुनिया भी गजब है। जिसके संतान नहीं है। वह मंदिर-मस्जिद और देवरों में आस्था के दीए जलाकर उम्मीदों के लिए ठोंकरें खा रहा है। दूसरी ओर इसी धरती पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो संतान की कद्र नहीं समझते। मां-बाप की गैर जिम्मेदारी ने ही उदयपुर के एक मासूम की जिंदगी को ‘मुसाफिर’ बना दिया है। महज पांच साल की उम्र से ये मासूम घर छोडकऱ खुद का पेट भरने के लिए रेल में धक्के खा रहा है। कोई इस मासूम चेहरे को देखकर भीख दे देता है तो कोई उसे पेट भरने के लिए रोटी। बचपन की बिगड़ी आदतों के बीच मासूम को बंद दीवारों में लोगों के साथ टिककर रहना भी अच्छा नहीं लगता। जी हां! हम बात कर रहे हैं 12 साल के उस मासूम की जिसने सात साल पहले मां के नाते चले जाने और पिता की गैर जिम्मेदारी से घर छोड़ दिया था। तीन दिन पहले नारायण सेवा संस्थान परिसर से भाग निकला यह किशोर गुरुवार को लावारिस हाल में अहमदाबाद हाइ-वे पर पुलिस को मिला, जिसे चाइल्ड लाइन की मदद से पुलिस ने को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। खास तो यह रहा कि समिति के प्रयासों से बच्चे को उसका पिता मिल गया, लेकिन दुर्भाग्य था कि जिस पिता से चिपककर बच्चा फूट-फूटकर रोया। उसी पिता ने दो पल बाद उस मासूम को उसके साथ रखने से इनकार कर दिया। समिति के कहने पर उसने मौका मिलने पर मासूम से मिलने आने की हामी जरूर भरी। प्यार की डोर कमजोरबचपन में मां-पिता से जुदा ये मासूम जिंदगी से भटक गया है। उसे बचपन में प्यार नहीं मिला और इस पीड़ा ने उसे निष्ठुर और गैर जिम्मेदार बना दिया। उसे अब किसी का डर नहीं है और किसी से मोह भी नहीं। वह सुनता तो सबकी है, लेकिन करता मन की है। कमजोर हुई प्यार की डोर के कारण ही वह पहले भी समिति के समक्ष पेश होकर आसरा संस्थान में शेल्टर में रह चुका है। एक वर्ष तक वहां रहने के बाद निराश्रित गृह कानपुर में रहा। वहां से नारायण सेवा संस्थान में गया। कुछ दिनों पूर्व बच्चा यहां से भी बाहर निकल गया। लावारिस हालत में यह मासूम गोवद्र्धनविलास पुलिस को मिला। समिति अध्यक्ष डॉ. प्रीती जैन, सदस्य बी.के.गुप्ता, राजकुमारी भार्गव व सुशील दशोरा ने पुलिस की मदद से पिता को तलब किया तो उसने आते ही बच्चे रखने में असर्थता जता दी। -- पिता ने जताई असमर्थतापिता का कहना है कि उसके रोहन (बदला हुआ नाम) के अलावा एक बड़ी बच्ची व बच्चा भी है। बच्ची को उसने बहन के यहां छोड़ रखा है। बड़ा बच्चा दादी के पास रहता है। पत्नी तीनों बच्चों को छोडकऱ नाते चली गई। उसने रोहन को भी संभालने का प्रयास किया, लेकिन वह घर छोडकऱ चला गया। बार-बार जाने से उसने भी उसे उसके हाल पर छोड़ दिया। पिता ने समिति को बताया कि पेशे से ऑटो ड्राइवर होने से वह बच्चे को रखने में सक्षम नहीं है। पिता की असमर्थता पर समिति ने बच्चे को पुन: नारायण सेवा संस्थान में शेल्टर करवाते हुए उसके पिता को पाबंद किया कि वह हर माह बच्चे से मिलने वहां जाएगा।--बचपन में बालकों को माता-पिता और संरक्षकों के प्यार व देखरेख की सख्त जरुरत होती है। इसके अभाव में वो जीवन गवां बैठते हैं। ऐसे में अभिभावकों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।बी.के.गुप्ता, बाल कल्याण समिति सदस्य

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