कोरोना से बचाव में जागे हो तो सडक़ दुर्घटना को रोकने में भी रहो आगे

कोरोना से बचाव में जागे हो तो सडक़ दुर्घटना को रोकने में भी रहो आगे

By: Mohammed illiyas

Published: 22 Jun 2020, 11:13 PM IST

मोहम्मद इलियास/उदयपुर
केन्द्र व राज्य सरकार सडक़ दुर्घटनाओं के आंकड़ों को कम करने के लिए प्रतिवर्ष कार्ययोजना के साथ ही लाखों का खर्च करती है फिर भी लोग सडक़ सुरक्षा को नजरअंदाज कर प्रतिवर्ष काल का ग्रास बनते है लेकिन कोरोना के संक्रमण काल ने लोगों में सुरक्षा का भाव जगा दिया। कोरोना वायरस से बचाव के लिए लोग जिस तरह से खुद ही मास्क पहनने के साथ ही सोशल डिस्टेसिंग की पालना कर रहै उसी तरह सडक़ दुर्घटना में जागरूकता दिखाए तो निश्चित रूप से दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है।
देश में सडक़ दुर्घटनाओं में प्रतिदिन 413 लोगों की मौत होती है। इनमें राजस्थान में प्रतिदिन यह आंकड़ा 28 व उदयपुर जिले में दो है। कोरोना में लॉकडाउन के चलते वाहनों की चक्के थमे कई लोगोंं की दुर्घटना में लोगों की जान बची, वे कोरोना से बचाव में घरों में कैद रहे, सुरक्षा के उपकरण काम में लिए। उसी तरह से वे सडक़ सुरक्षा की पालना करे ।
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कोरोना व सडक़ दुर्घटना में बचाव में कई समानताएं
- कोरोना बचाव के लिए एक व्यक्ति की लम्बाई जितनी सामाजिक दूरी आवश्यक है, उसी तरह सडक़ सुरक्षा के लिए प्रत्येक वाहन के बीच इतनी दूरी चाहिए।
- कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जहां मास्क पहनना अनिवार्य है उसी प्रकार वायु प्रदूषण से बचने के टूव्हीलर पर हेलमेट जरुरी है, जो आंख,नाक,कान एवं मुंह को कवर करने के साथ ही सिर की सुरक्षा करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में रोजाना लगभग 200 लोगों की मृत्यु वाहनों से निकले धुंए के कारण होने वाली बीमारियों से होती है।
- यात्री वाहनों में बैठक क्षमता 50-75 तक तय है यानि किसी भी स्थिति में क्षमता से अधिक यात्री नहीं बैठ सकते है जो सडक़ सुरक्षा की दृष्टि से ओवर क्राउडिंग है। सोशल डिस्टेसिंग बचाव का अच्छा उदाहरण है।
- कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए विशेष कारण से घर से निकलना मना है, सडक़ सुरक्षा की दृष्टि से अपनाया जाए तो निश्चित रूप से यातायात का दबाव कम होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। आंकड़ों के अनुसार रोज़ाना देश में 413, राजसथान में औसत 28 मौत प्रतिदिन होती है। लॉकडाउन में यह आंकडा कुल 140 रहा। चारों लॉकडाउन में दुर्घटना में करीब 25 हजार जान व बीमा कंपनियों के करीब 1250 करोड़ बचे।
- कोरोना संक्रमण जहां अधिक उम्र के व्यक्ति तथा किडनी, हार्ट, डायबिटीज रोगियों को जल्दी होता है उसी प्रकार पुराने वाहन जिसमें मैकेनिकल डिफेक्ट होने पर उनमें सडक़ दुर्घटना होने का अंदेशा अधिक होता है। ऐसे वाहन सही फिट होने पर सावधानी बरतते हुए ही सडक़ पर उपयोग करना चाहिए।
- कोरोना के लक्षण पाए जाने पर तत्काल अस्पताल जांच करवया जाना अनिवार्य है। उसी प्रकार वाहन में कोई यांत्रिक दोष का पता लगने पर तुरन्त जांच करवानी चाहिए।
- कोरोना जांच में सहयोग करना चाहिए ताकि बीमारी के कारण का पता लग सके उसी प्रकार सडक़ दुर्घटनाओं में भी 30 मिनिट में साक्ष्य एकत्र कर वैज्ञानिक पद्धति से अन्वेषण कर वास्तविक कारण ज्ञात कर उपाय करने चाहिए
- कोरोना में लापरवाही करने पर यह तेज़ी से फैलता है उसी प्रकार सडक़ पर लापरवाही अन्य सडक़ दुर्घटनाओं को न्योता देती है। - कोरोना से बचने के लिए लोगों में स्वच्छ,स्वस्थ एवं सुरक्षित का भाव विकसित किया जाना ज़रूरी है उसी प्रकार सडक़ सुरक्षा के लिए स्वयं सडक़ उपयोगकर्ता के साथ वाहन एवं सडक़ को स्वच्छ, के साथ सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
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सडक़ सुरक्षा एवं कोविड सुरक्षा के लिए देश में केन्द्र एवं राज्य सरकार मिलकर स्वच्छ व स्वस्थ्य भारत मिशन की तजऱ् पर राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा एवं कोविड सुरक्षा मिशन चलाए तो निश्चित रूप से दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
डॉ.वीरेन्द्र सिंह राठौड़, संस्थापक राजस्थान सडक़ सुरक्षा सोसायटी

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