हाइवे सुधार तो दूर रिफलेक्टर भी नहीं लगा सका एनएचएआई

चीरवा मार्ग पर एक्सीडेंट जोन को लेकर पीड़ा, हादसा होने पर जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराती पुलिस?

By: Pankaj

Updated: 03 Apr 2021, 10:35 AM IST

उदयपुर. शहर से नाथद्वारा मार्ग पर चीरवा टनल से पहले का हिस्सा एक्सीडेंट जोन बना हुआ है। यहां आए दिन हादसे होते हैं। पुलिस ने हादसों की स्थिति से निपटने के लिए छह जगहों पर ब्रेकर बनवाए, जिनसे हादसों में कमी आई है, लेकिन पूरा समाधान नहीं हुआ है। तकनीकी रूप से खामी वाली इस जगह पर रिफलेक्टर लगने की स्थिति में काफी हद तक राहत मिल सकती है, लेकिन यह भी नहीं हो पा रहा है। हाइवे अथॉरिटी रिफलेक्टर लगाने को भी तैयार नहीं। पुलिस भी हादसे के वक्त एनएचएआई को जिम्मेदार नहीं ठहरा रही है। लिहाजा खमियाजा यहां से गुजरने वाले लोग उठा रहे हैं।

शहर से जुडऩे वाले मार्ग पर चीरवा टनल से अमरख महादेव मंदिर तक आए दिन हादसे होते हैं। यहां हर एक-दो माह में बड़े हादसे में लोगों की जान जाती है, जबकि छोटे हादसे तो हर रोज होते हैं। सुखेर थाना पुलिस के लिए यह जगह सिरदर्द बन चुकी है। यहां क्षतिग्रस्त हुए वाहनों का ढेर सुखेर थाना परिसर में लग चुका है। इस संबंध में जानकारी में आया कि हाइवे पर तकनीकी खामियों को लेकर पुलिस की ओर से हाइवे अथॉरिटी को कई बार सूचित किया गया, लेकिन समाधान नहीं हो पाया। रोड की खामी सुधरना तो दूर हाइवे अथॉरिटी की ओर से उस जगह रिफलेक्टर भी नहीं लगाए जा सके, जहां आए दिन हादसे होते हैं।

यह है वस्तुस्थिति
हादसों का कारण: हाइवे पर चीरवा टनल पार करने के बाद विकट मोड़ है, वहीं यह क्षेत्र जमीन से काफी ऊंचा होने से वाहन चालक को मोड़ का आभास नहीं हो पाता है। ढलान में अचानक वाहन की गति बढ़ जाती है। लिहाजा हादसे होते हैं।
यह किया समाधान: हाइवे पर चीरवा टनल से अमरख महादेव मंदिर तक के हिस्से में जहां अभी तक अधिक हादसे हुए, वहां ब्रेकर लगाए गए, जिससे वाहनों की गति धीमी होने लगी। हादसों में कमी आई, लेकिन यह स्थाई समाधान नहीं है।
यह करने की जरुरत : हाइवे पर सुधार कार्य करते हुए विकट मोड़ और ढलान की स्थिति को खत्म करना होगा। यह कार्य होने तक रिफलेक्टर लगाए जा सकते हैं, जिससे रात में चालकों को सड़क की दिशा का सही आभास हो सके।
ठहराएंगे जिम्मेदार

जहां आए दिन हादसे होते हैं, वहां तकनीकी परेशानी है। ब्रेकर बनने के बाद हादसों में कमी आई है, लेकिन रिफलेक्टर आदि लगे तो रात के समय हादसों में और कमी आ सकती है। इसके लिए हमने हाइवे अथॉरिटी से संपर्क किया था, लेकिन समाधान नहीं निकला। हमारे उच्चाधिकारियां ने भी इस संबंध में प्रयास किया है। आगामी समय में बड़ा हादसा होने पर हाइवे अथॉरिटी को जिम्मेदार मानते हुए मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
मुकेश सोनी, थानाधिकारी, सुखेर थाना

स्थाई समाधान के लिए हुआ सर्वे
हाइवे अथॉरिटी के सेफ्टी ऑडिटर्स ने प्रभावित क्षेत्र का सर्वे किया है। जल्द ही इसका स्थाई समाधान निकाला जाएगा। वर्तमान में हाइवे पर ब्रेकर बनाकर वाहनों की गति नियंत्रित की है। हालांकि ये भी नियम विरुद्ध है, लेकिन स्थाई समाधान होने तक यह कार्य किया है। हाइवे निर्माण की गाइडलाइन के विपरीत काम नहीं कर सकते। अब जो भी होगा गाइडलाइन के अनुसार ही होगा।

लोकेश सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

Pankaj Reporting
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