नाकाबंदी तोड़ भागे आरोपियों ने पुलिस वाहन को मारी टक्कर, - पीछा कर पुलिस ने पांच आरोपियों को पकड़ा..

नाकाबंदी तोड़ भागे आरोपियों ने पुलिस वाहन को मारी टक्कर, - पीछा कर पुलिस ने पांच आरोपियों को पकड़ा..

Madhulika Singh | Publish: Sep, 06 2018 02:06:54 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

 

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उदयपुर. प्रतापनगर-बलीचा बाइपास पर गीताजंलि हॉस्पिटल के बाहर मंगलवार रात को हिरणमगरी थानापलिस की नाकाबंदी तोड़ भागे कार सवार युवकों ने पीछा करने पर सरकारी जीप को टक्कर मार दी। पुलिस ने करीब 7 से 8 किलोमीटर लगातार पीछा कर गोवद्र्धनविलास पुलिस के सहयोग से पांच आरोपियों को धरदबोचा। आरोपियों मेंं तीन शातिर बदमाश है। पुलिस ने सभी के विरुद्ध नाकाबंदी तोडऩे व राजकार्य में बाधा का मामला दर्ज किया।

हिरणमगरी थानाधिकारी राजेश यादव ने बताया कि एसपी के निर्देश पर टीम गीताजंलि के बाहर नाकाबंदी कर रही थी। तभी एक वेन के आने पर पुलिस ने रुकवाने का प्रयास किया तो चालक ने नाकाबंदी तोडक़र वापस गाड़ी को गोवद्र्धनविलास की तरफ घूमा दी। पीछा किया तो आरोपियों ने सरकारी जीप को खलासी साइड की तरफ से टक्कर मार दी। टीम ने कंट्रोल रूम पर सूचना देकर समस्त थानाक्षेत्र में नाकाबंदी करवाई। इस बीच आरोपियों ने गोवद्र्धनविलास थानापुलिस की भी नाकाबंदी तोड़ दी। पुलिस ने पीछा कर आरोपी किशनपोल चौक के पास खांजीपीर निवासी मोहम्मद शाहरूख पुत्र अजीज खां, नागानगरी चांदपोल निवासी शोएब शेख पुत्र मोहम्मद एजाज शेख, मोहम्मद आदिल पुत्र नूर मोहम्मद, महावतवाड़ी घंटाघर निवासी मोहम्मद राहिल उर्फ बोहरा पुत्र खलील अहमद व कृष्णपुरा भूपालपुरा निवासी रौनक पुत्र शांतिलाल यादव को होटल चरण कमल के निकट धरदबोचा। आरोपियों में मोहम्मद राहिल शेख घंटाघर थाने का हिस्ट्रीशीटर होकर हार्डकोर अपराधी है। उसके विरुद्ध मारपीट, आम्र्स एक्ट, हत्या के प्रयास सहित 12 प्रकरण शहर के विभिन्न थानों में दर्ज है। शोएब के खिलाफ हत्या का प्रयास, लड़ाई झगड़े के करीब तीन प्रकरण दर्ज हे वह रौनक यादव के विरुद्ध मारपीट व लड़ाई झगड़े के प्रकरण दर्ज है।

 

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नौकरी का नाम पर झांसा, मामला दर्ज

उदयपुर. नौकरी का झांसा देकर बेरोजगारों से पैसा हड़पने का भूपालपुरा थाने में मामला दर्ज किया गया।
मल्लातलाई निवासी आरिफ मोहम्मद पुत्र हमीर पठान ने रिपोर्ट में बताया कि वह साई मैन पावर फर्म में जनरल मैनेजर पद पर 25 हजार रुपए माहवार में नियुक्त हुआ था। फर्म के मैनेजिंग डायरेक्टर सीताराम ने उसे शास्त्री सर्कल पर अप्वाइंटमेंट लेटर दिया। फर्म के निर्देश पर उसने गोवद्र्धनविलास में ऑफिस लेकर कंपनी का कार्य प्रारंभ किया। जॉब के कई आशार्थियों से कंपनी के नियमानुसार पांच हजार मेम्बरशीप लेकर रसीद देते हुए राशि एकत्रित की। प्रत्येक सप्ताह कंपनी डायरेक्टर सीताराम उससे पैसों कलेक्शन कर ले गया। उदयपुर नहीं आने पर उसने कुछ पैसे जयपुर जाकर दिए तो कुछ बैंक से स्थानांतरित किए। 3-4 माह बाद परिवादी को फर्म के व्यवहार पर शक हुआ तो खोजबीन की। पता चला कि कंपनी किसी तरह की जॉब व प्लेसमेंट नहीं करवाती है। बल्कि जॉब आशार्थियों से राशि प्राप्त कर अपने पास रखती है। शक होने पर निदेशक सीताराम से बात की तो उसने कहा कि हमारा तो यहीं काम है रुपया लो और मस्त रहो। तुझे काम करना है तो कर नहीं तो जॉब छोड़ दो। परिवादी का कहना है कि सीतराम में कई बेरोजगारों को नौकरी दिलवाने के नाम से उससे एडवांस पैसे एकत्रित करवाए और बाद में हड़प लिए।

 

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