अजी सुनो सरकार, बंद मंडियां कर रही चौपट व्यापार

अजी सुनो सरकार, बंद मंडियां कर रही चौपट व्यापार

By: Mohammed illiyas

Updated: 10 May 2020, 08:02 PM IST

मोहम्मद इलियास/उदयपुर
राज्य की कृषि मंडियों पर कृषक कल्याण कोष के तहत लगायी गई दो प्रतिशत फीस के विरोध में जारी राज्यव्यापी हड़ताल के तहत शनिवार को तीसरे दिन भी मंडी बंद रही। मंडी बंद होने से अब तक करोड़ों को कारोबार प्रभावित हुआ। व्यापारियों का कहना है कि लॉकडाउन के समय में सरकार द्वारा लगाई गई कृषक कल्याण फीस अन्य राज्यों की तुलना में बहुत अधिक है, ऐसी स्थिति में मजबूरन कृषि उपज पड़ोसी राज्य में बिकेगी तो मंडी फीस व स्टेट जीएसटी का भी नुकसान होगा।
कृषि जिंस के सेस के विरोध में राज्य में आटा मिल, तेल मिल, दाल मिल व मसाला उद्योग के 247 मंडियां पिछले तीन दिन से बंद है। इसी क्रम में उदयपुर में भी राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ संभागीय प्रभारी रमेश चौधरी के नेतृत्व में यहां भी कारोबार प्रभावित हुआ है। खाद्य पदार्थ व्यापार संघ अध्यक्ष ओमप्रकाश तोषनीवाल, दाल-चावल खुदरा व्यापार संघ अध्यक्ष गणेश अग्रवाल, खुदरा के अध्यक्ष राजकुमार चित्तौड़ा, कृषि उपज मंडी व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय भंडारी ने भी विरोध करते हुए सरकार से किसान कल्याण कोष के नाम से लगाए शुल्क को वापस लेने की मांग की है।
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अन्य राज्यों से काफी अधिक दर
व्यापारियों ने बताया कि कृषि मंडी सेस के अलावा कृषक कल्याण फीस 2 प्रतिशत बढऩे पर गेहूं, जौ,धान, दलहन, चीन पर कुल 3.60, तिलहन पर तीन, मोटा अनाज इसबगोल, जीरा, धनिया पर 2.50 प्रतिशत फीस देय होगी हो काफी अधिक है जबकि अन्य राज्यों में कम है। गुजरात में सभी जिंसों पर मंडी फीस 0.50 प्रतिशत,मध्यप्रदेश में 1.70 प्रतिशत मंडी फीस है। कृषि जिंस एक्जेम्पटेड की श्रेणी में है। ऐसी स्थिति में सरकार ने यह फीस किसान विरोध होगी। यदि राज्य में यह फीस वापस नहीं ली गई तो राजस्थान की कृषि उपज को किसान पड़ोसी राज्य में ले जाकर बिक्री करेगा। इसका प्रभाव दाल व तिलहन पर पड़ेगा।
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मंडी के व्यापारी व आड़तिया पर प्रभाव
मंडी के बाहर कृषि विपणन विभाग ने सीधी खरीद के लाइसेंस दिए है। मंडी यार्ड में एक व्यवस्था में कृषि उपज की बिक्री की जाती है। किसान का माल गेट पर इन्द्राज होता है और बोली लगकर प्रतिस्पर्धा में बिकता है फिर मंडी समिति द्वारा विक्रय पर्ची बनती है। पर सीधी खरीद करने वालों को किसी तरह की बंदिश नहीं रहेगी। मंडी के पास कर्मचारी भी नहीं है। मंडी के बाहर मंडी फीस का इवेजन होगा। मंडी के बाहर असामाजिक तत्व माल खरीद लेंगे। मण्डी फीस का इवेजन कर कम दामों में पड़ोसी प्रांतों को माल बेच देंगे। मंडी में किसान कृषि जिंस नहीं लाएगा। इससे मंडी का आड़तिया, मंडी का व्यापारी, मुनीम, मैनेजर,मजदूर सब बेरोजगार हो जाएंगें। मंडी टैक्स की रेट ज्यादा होने के कारण मंडियों में पड़त से कृषि जिंस बिकेगी। किसान को कृषि जिंस का भाव कम मिलेंगे।

Mohammed illiyas Reporting
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