सांस टूटने के दसवें दिन नसीब हुई माटी ...बाल चिकित्सालय का रवैया जिम्मेदार

सांस टूटने के दसवें दिन नसीब हुई माटी ...बाल चिकित्सालय का रवैया जिम्मेदार

Krishna Kumar Tanwar | Publish: Sep, 04 2018 08:31:55 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

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मो.इलियास/उदयपुर . लावारिस, विशेष देखरेख एवं संरक्षण वाले बच्चों के लिए सरकार ने कई सख्त नियम-कायदे बना रखे हैं। इसके बावजूद एक छह माह की बच्ची को मौत के दसवें दिन सोमवार को मिट्टी नसीब हो सकी। नौ दिन तक उसका शव एमबी अस्पताल के मोर्चरी में पड़ा रहा। दसवें दिन जिला प्रशासन की दखल पर पोस्टमार्टम की औपचारिकता के बाद उसका अंतिम संस्कार संभव हो सका।इस पूरे मामले में सीधे तौर पर बाल चिकित्सालय का रवैया बच्ची की मिट्टी खराब करने में सर्वाधिक जिम्मेदार रहा।यह बच्ची गत 29 जुलाई को हिरणमगरी में नारायण सेवा संस्थान के बाहर लावारिस हालत में मिली थी। बाल कल्याण समिति ने उसे तुरंत बाल चिकित्सालय में भर्ती करवाते हुए बाल चिकित्सालय के अधीक्षक को जांच कर सात दिन में रिपोर्ट देने के लिए कहा था। बाल चिकित्सालय ने रिपोर्ट तो दूर बच्ची की सुध तक नहीं ली जबकि नियमानुसार सीएनसीपी (विशेष देखरेख एवं संरक्षण) के बच्चों के बारे में 24 घंटे के भीतर किसी भी स्थिति के बारे में तत्काल बाल कल्याण समिति सूचना देनी होती है।

 

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बच्ची की 25 अगस्त को ही हो गई थी मौत

बच्ची की बाल चिकित्सालय में 25 अगस्त को मौत हो गई थी। अस्पताल प्रशासन ने बाल कल्याण समिति व संबंधित हिरणमगरी थाना पुलिस को भी सूचना नहीं दी और शव को मुर्दाघर में रख चुप्पी साध ली। एक सितम्बर को अस्पताल प्रशासन ने सुखेर थाना पुलिस को बताया तो वहां से बाल कल्याण समिति को जानकारी मिली। बाल कल्याण न्यायापीठ ने उसी दिन तत्काल बैठक की। अध्यक्ष डॉ.प्रीति जैन, सदस्य बी.के.गुप्ता, राजकुमारी भार्गव, हरीश पालीवाल व सुशील दशोरा ने हाथोंहाथ समिति ने नारायण सेवा संस्थान, चाइल्ड लाइन व हिरणमगरी थानापुलिस को सूचित कर वहां भेजा लेकिन बच्ची का पोस्टमार्टम नहीं हुआ। सोमवार को समिति ने इसकी जानकारी जिला कलक्टर को दी। कलक्टर ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.डी.पी.सिंह से पोस्टमार्टम नहीं करने संबंधी रिपोर्ट तलब की। वहीं एडीएम को आदेश देकर तुरंत बालिका को पोस्टमार्टम करवा अंतिम संस्कार करवाया।

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