उदयपुर नगर निगम, रेलवे व विवि के सोलर प्लांट्स बिजली बचाने में आगे

सौर ऊर्जा: सोलर सिस्टम लगाकर खुद की बिजली को उत्पन्न कर सकते हैं, प्रदूषण को भी रोक सकते हैं, बिजली के बिल भी कम

By: madhulika singh

Published: 27 Jul 2020, 04:17 PM IST

उदयपुर. जलवायु परिवर्तन को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है और इसके लिए देश अपने-अपने स्तर पर प्रयास भी कर रहे हैं। इन्हीं में से एक प्रयास सौर ऊर्जा को लेकर किए जा रहे हैं जिससे बिजली उत्पादन किया जा सकता है। केन्द्र सरकार ने 2022 तक 40 गीगावॉट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सरकारी दफ्तरों के भवनों से लेकर निजी संस्थानों के भवनों और घरों की छतों पर भी सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा चुका है। वहीं, स्मार्ट सिटी के तहत भी रूफ टॉप सोलर प्लांट्स लगवाए जा रहे हैं। अब तक उदयपुर के किन सरकारी दफ्तरों पर सोलर पैनल्स और प्लांट्स लगाए जा चुके हैं और इससे क्या फायदा मिल रहा है, इस बारे में पत्रिका ने की पड़ताल: पेश है एक रिपोर्ट-


कुछ ने पेश की नजीर तो कुछ अब भी इससे दूर

सरकारी दफ्तरों की बात की जाए तो यहां के सरकारी दफ्तर अब सौर ऊर्जा को लेकर जागरूक होते नजर आ रहे हैं। उदयपुर नगर निगम, रेलवे, सुखाडिय़ा विवि, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि आदि ने सौर ऊर्जा प्लांट लगवाकर दूसरों के लिए भी उदाहरण पेश किया है वहीं, कुछ ऐसे सरकारी दफ्तर भी हैं जो इसे लेकर अब तक जागरूक नहीं हैं, जबकि जहां ये प्लांट्स लगे हैं उनके बिजली बिलों में कई हद तक कमी आई है। ऐसे में उनसे सीखकर ही ऐसे दफ्तरों को भी आगे आकर ये सोलर प्लांट्स लगवाने का कदम उठाना चाहिए।

नगर निगम -
सोलर सिस्टम नगर निगम में फरवरी, 2016 में लगा था। निगम ने 80 किलो वाट का प्लांट लगाया था। निगम कैम्पस का पहले बिल आता था 90 हजार से 1.30 लाख रुपए तक, सोलर प्लांट लगने के बाद यह बिल 40 से 60 हजार रुपए के बीच आने लगा।


यूआईटी -

यूआईटी में दस किलो वाट का सोलर सिस्टम अभी लगाया गया है। हालांकि यह सिस्टम अभी शुरू नहीं हुआ है। अब इसे शुरू किया जाएगा।

सुखाडिय़ा विवि -
सुखाडिय़ा के मुख्य भवन पर, पर्यावरण विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी, साइंस कॉलेज का दीनदयाल उपाध्याय ब्लॉक भवन पर सोलर पैनल्स लगे हुए हैं। इनका किसी निजी कंपनी से करार किया हुआ है जिसके तहत पैसा भी निजी कंपनी ने ही लगाया हुआ है। सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के भवनों में इस बिजली का उपयोग नहीं हो कर संग्रहित बिजली विद्युत निगम को दी जाती है वहां से सुखाडिय़ा के बिजली बिलों में घटाकर उत्पादित बिजली का लाभ दिया जाता है


महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर सीटीएई, आरसीए,फिशरीज कॉलेज और अन्य कैंपस में सोलर एनर्जी पैनल लगे हुए हैं।


रेलवे- शहर के सिटी रेलवे स्टेशन और पुराने रेलवे स्टेशन व राणा प्रतापनगर दोनों ही पर सोलर प्लांट लगे हैं। एक करोड़ से अधिक लागत के सिस्टम से एक लाख से अधिक यूनिट बिजली प्रतिवर्ष उत्पन्न हो रही है। इसी तरह से सुखाडिय़ा सर्कज स्थित रेलवे प्रशिक्षण संस्थान के हॉस्टल, प्रशासनिक भवन, ऑडिटोरियम, कैंंपस व कॉलोनी में भी सोलर प्लांट्स लगे हुए हैं।


देवस्थान विभाग - सोलर प्लांट नहीं लगा है ।


आरएनटी मेडिकल कॉलेज- कॉलेज के अंतर्गत चलने वाले होस्टल दिलशाद भवन में ही सोलर प्लांट लगा है। बाकी कहीं ओर ये सिस्टम नहीं लगा है।


पुलिस व आबकारी विभाग - सोलर प्लांट केवल सूरजपोल थाने में लग रहा है, वहीं, आबकारी में किशनपोल स्थित आबकारी लाइन में सोलर प्लांट लग रहा है। इस प्लांट के कारण दोनों जगहों पर बिजली का बिल जीरो आ रहा है।


महाराणा प्रताप खेलगांव - चित्रकूट नगर स्थित महाराणा प्रताप खेलगांव में 50 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया गया है। इस प्लांट से प्रतिदिन 250 यूनिट बिजली उत्पादन होती है।

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