निरंतर घट रहे रोडवेज के रूट

- कंडम होती बसों से बंद हो रहे आय देने वाले मार्ग

dhirendra joshi

December, 0712:45 PM

धीरेंद्र्र् कुमार जाेशी/उदयपुर. लगातार घाटे में चल रही रोडवेज के कई रूट बंद हो चुके हैं। इन रूटों में कुछ आय देने वाले रूट भी बंद करने पड़े। अब भी नई बसें नहीं आती हैं तो प्रमुख रूटों से रोडवेज गायब हो सकती है।

कुछ वर्ष पूर्व तक उदयपुर आगार की बसें 123 रूटों पर संचालित होती थी। उस समय आगार के पास 130 से 140 बसें हुआ करती थी, लेकिन लगातार कंडम होती बसों के कारण वर्तमान में उदयपुर आगार के पास मात्र 84 बसें बची हैं। इसके साथ 8 बसे अनुबंधित है। इधर रोडवेज प्रबंधन 98 रूट पर बसों का संचालन कर रहा है। बसों की संख्या घटने से कई ऐसे रूट भी बंद करने पड़े, जो कम आय देते थे। ऐसा ही हाल रहा तो आने वाले समय में आय देने वाले रूट भी बंद करने पड़ सकते हैंं।

ये रूट बंद किए

रूट ... पहले बसों की संख्या ... वर्तमान बसों की संख्या
नीमच रूट ... 07 ... 01

खेड़ब्रह्मा ... 01 ... 00

धरियावद ... 07 ... 05

छोटी सादड़ी, डूंगला ... 03 ... 00
पानरवा ... 01 ... 00

कोटड़ा, झाड़ोल ... 01 ... 00

सामोली ... 01 ... 00

डइया अम्बासा ... 01 ... 00
मोहम्मद फलासिया ... 01 ... 00

धरियावद वाया कुराबड, लसाडिय़ा ... 01 ... 00

पानरवा वाया वाघपुरा मादड़ी ... 01 ... 00

जावर माइंस, पलोदड़ा ... 01 ... 00
आबूरोड, खेरवाड़ा, देवल ... 01 ... 00

किलोमीटर घटे

उदयपुर आगर की बसें कुछ वर्ष पूर्व तक 44 हजार किलोमीटर प्रतिदिन संचालित होती थी, जो वर्तमान में 39 हजार किलोमीटर रह गई है। वर्तमान में सावों की धूम है। ऐसे में बसों में 80 प्रतिशत से ऊपर यात्री भार आ रहा है।

ऐसे घटी बसों की संख्या
वर्ष 2017 में सरकार ने बसों की खरीद की और उदयपुर डिपो को 21 बसें मिली। ऐसे में जनवरी, 2018 में उदयपुर डिपो के पास 144 गाडिय़ां थी। इनमें से 10 बसें अन्य डिपो में भेजी गई। 2018 में डिपो की 20 गाडिय़ां कंडम हुई। इसके बाद दो बसें राजसमंद डिपो से मिली। ऐसे में जनवरी, 2019 में डिपो के पास 116 बसें बची। इनमें से 16 बसें अब तक कंडम हो चुकी है। 16 बसें ऑफ रूट खड़ी है।

वर्सन...

गाडिय़ों की कमी के कारण वे ही रूट कम किए हैं, जो निगम को आय नहीं दे रहे थे। सबसे अधिक जनजाति क्षेत्रों के यात्री प्रभावित हो रहे हैं। बसें आने पर इन क्षेत्रों में पुन: यात्री सुविधा शुरू की जाएगी।
- महेश उपाध्याय, मुख्य प्रबंधक, उदयपुर आगार

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