उदयपुर के इन दो होनहारों की पीठ भी थपथपाइए, इन्‍होंने कड़ी मेहनत से हास‍िल की यूपीएससी में सफलता

कुछ भी हो लेकिन कभी हार मत मानो : अभिजीत भाणावत - 282वीं रैंक

By: madhulika singh

Published: 05 Aug 2020, 04:12 PM IST

उदयपुर. तीसरे प्रयास में आईएएस परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले अभिजीत भाणावत का कहना है कि चाहे कुछ भी हो लेकिन कभी हार मत मानो। परिस्थितियां कभी आपके पक्ष में नहीं होती, उन्हें आपको अपने अनुकूल बनाना होता है। बस, इसी से आपको अपनी मंजिल मिल जाएगी। अभिजीत भाणावत ने यूपीएससी मुख्य परीक्षा में 282वीं रैंक हासिल की है। अभिजीत मूलत: कानोड़ से हैं। उनके दादा प्रो. धनेश भाणावत और पिता शेखर भाणावत हैं जिनका चित्तौड़ में बिजनेस है और मां रेखा गृहिणी हैं। उनके भाई ने भी आईआईटी कानपुर से बीटेक,एमटेक किया है।

6 से 8 घंटे केंद्रित रहकर करते थे तैयारी

अभिजीत ने बताया कि उन्होंने आईआईटी रूडक़ी से बीटेक कर रखा है और वे 2016 से आईएएस की तैयारी कर रहे थे। दिल्ली में 2 साल रहकर कोचिंग की और मॉक इंटरव्यू करते थे। इंटरव्यू के लिए खूब तैयारी की। उनका कहना है कि इसमें आपके ज्ञान की अभिव्यक्ति जरूरी है और यही आपको सफलता दिला सकती है। पहले थ्योरी में कम स्कोर कर पा रहा था तो इस बार थ्योरी पर अधिक फोकस किया और पहले की कमी को दूर कर लिया। कोई बैकग्राउंड नहीं था तो अपने स्तर पर ही सब कुछ तैयारी की। करीब 6 से 8 घंटे पूरा ध्यान केंद्रित कर के तैयारी किया करते थे। वे अपना रोल मॉडल आईएएस डॉ. समित शर्मा को मानते हैं जो पहले चित्तौड़ के कलेक्टर रह चुके हैं और उन्होंने अपने कार्यकाल में अच्छा काम किया था जिनसे काफी प्रभावित हुआ।

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मां और मैंने देखा आईएएस का सपना, बिना कोचिंग मिली सफलता

उदयपुर. किराये के घर में रहने वाले और दसवीं के बाद कभी टीवी ना देखने वाले अंकुश कोठारी और उनकी मां प्रकाशलता का बस आईएएस का सपना था। आज जब ये सपना पूरा हो गया तो मां और बेटे को जैसे सारी खुशियां मिल गई। यूपीएससी मेन्स परीक्षा परिणाम में उदयपुर के अंकुश कोठारी ने 429वीं रैंक हासिल की। अंकुश ने सफलता का श्रेय मां को दिया है।

आईएएस के लिए छोड़ा 15 लाख का पैकेज
अंकुश ने बताया कि उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक किया है। कैट 2019 में 99.84 पर्सेंटाइल हासिल की और आईआईएम बेंगलूरु में चयनित हुए। वहीं, बीटेक के बाद उन्हें एक एमएनसी में प्लेसमेंट भी मिला, जिसका पैकेज 15 लाख रुपए का था लेकिन उन्होंने ये नौकरी और पैकेज आईएएस के सपनों के लिए छोड़ दिया। वे 2016 से तैयारी कर रहे थे और ये उनका तीसरा प्रयास था। अंकुश ने बताया कि उनकी मां प्राइवेट कॉलेज में प्राचार्य है, जिनका इस सफलता में काफी योगदान रहा। उन्होंने ही हमेशा प्रोत्साहित किया। यहां तक कि दसवीं के बाद से घर में टीवी भी नहीं रखा ताकि वह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सके। अंकुश के पिता अनिल कोठारी हैं।


10 घंटे नियमित अध्ययन

अंकुश ने बताया कि आईएएस की तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं की। सिर्फ ऑनलाइन तैयारी ही की। वे 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे। पूर्व में दो बार जो क मियां रह गई ंथीं, उन्होंने तीसरे प्रयास में पूरी कर ली। अंकुश ने बताया कि पूरी तैयारी उन्होंने उदयपुर में रहकर ही की। उनका कहना है कि कड़ी मेहनत और समर्पण ही सफलता का सूत्र है।

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