उदयपुर. शहर में संकरे रास्तों का करोड़ों रुपए खर्च कर विस्तार तो कर दिया लेकिन जिम्मेदारों के पास इन सडक़ों को देखने की फुर्सत नहीं है। यातायात जाम एवं सुगम आवाजाही की सुविधा दिलाने के लिए बना रोड नेटवर्क अवैध पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियों की भेंट चढ़ गया। शहर में कई सार्वजनिक स्थान एवं रोड ऐसी नहीं है, जहां वाहनों की पार्किंग एवं कार बाजार नहीं हो। नगर निगम, विकास प्रन्यास हो या यातायात पुलिस की नजर उन पर होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शहर में यातायात की व्यवस्था बिगाड़ रहे प्रमुख स्थलों पर एक पड़ताल रिपोर्ट -

इनका कहना है....
अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को रोकने के लिए नगर पालिका एक्ट के तहत समय-समय पर कार्रवाई करते है। ऐसे स्थानों को हम फिर से दिखवाते है और नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।

- अंकित कुमार सिंह, आयुक्त नगर निगम
...

पत्रिका व्यू.....
आंखों के सामने सब कुछ, आंखे खोलिए

जनता की सुविधा के लिए पैसा लगाते हैं लेकिन उसका रिटर्न नहीं मिले तो क्या मतलब है। नगर निगम व यूआईटी ने संकरी सडक़ों के विस्तार या नई सडक़ें बनाने में करोड़ों खर्चे लेकिन इनका उपयोग अन्य गतिविधियों के लिए हो रहा है, जिससे यह औचित्यहीन हो गया है। जन हित के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई विकास खर्च की जा रही है, लेकिन उसके परिणाम न के बराबर है। नगर निगम, यूआईटी हो यातायात पुलिस को यह सब कुछ दिखता है लेकिन वे करते कुछ नहीं है, सख्ती नहीं दिखाते हैं। अफसर हो या जनप्रतिनिधि शहर के विकास के लिए ऐसी चीजों पर उनको समझौता नहीं करना चाहिए और पूरे साहस के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned