सोशल मीडिया पर उड़ी अफवाह पर सहमे ग्रामीण

झाड़ोल उपखण्ड क्षेत्र के 2.25 लाख ग्रामीणों की भावनाओं को सोशल मीडिया पर फैली झूठी सूचना ने भारी आघात पहुंचाने का काम किया। क्षेत्र के ग्रामीण लम्बे समय से उदयपुर-सोम हाईवे के निर्माण का इंतजार कर रहे हैं।

Madhulika Singh

17 Jul 2016, 05:18 PM IST

 झाड़ोल उपखण्ड क्षेत्र के 2.25 लाख ग्रामीणों की भावनाओं को सोशल मीडिया पर फैली झूठी सूचना ने भारी आघात पहुंचाने का काम किया। क्षेत्र के ग्रामीण लम्बे समय से उदयपुर-सोम हाईवे के निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन भूमि अवाप्ति का गजट नोटिफिकेशन जारी होने की अफवाह ने बीते 24 घंटों में उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। राजस्थान पत्रिका ने पूरे मामले की गहनता से पड़ताल के लिए नेशनल हाईवे अॅथोरिटी के अधिकारियों से बात की तो सामने आया कि गजट नोटिफिकेशन जारी होने में छह महीने और लगेंगे। यह भी सामने आया कि मार्च-2016 में वन क्षेत्र में आने वाली जमीनों की स्वीकृति के लिए प्राधिकरण ने पर्यावरण विभाग को जो सूची भेजी वह कुछ भूमाफियाओं के हाथ लग गई। उन्होंने अपना फायदा देख मामले को गजट नोटिफिकेशन से जोड़कर वायरल कर दिया।  मामला उदयपुर से ईडर (गुजरात) राष्ट्रीय राजमार्ग 58-ई का है। क्षेत्र की 59 पंचायतों की सबसे बड़ी समस्या उदयपुर जिला मुख्यालय तक आने वाली  खस्ताहाल सड़क है। वर्ष 2010 में नेशनल हाईवे घोषित होने के बाद से लाखों लोग इसके निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। एेसे में ग्रामीणों में शुक्रवार सायं तब खुशी की लहर दौड़ गई, जब सोशल मीडिया पर सूचना आई कि हाईवे निर्माण से पहले भूमि अवाप्ति के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी हो गया। मार्ग में आने वाली उलझनें सुलझा ली गईं। कुछ ही देर में यह भ्रामक सूचना हजारों तक पहुंच गई। सबने एक-दूसरे को सोशल मीडिया सहित फोन कर बधाइयां दे डालीं। कुछ राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों ने तो श्रेय तक लेने का प्रयास किया। 

बदली राह

अधिकारियों ने बताया कि पूर्व में उदयपुर से झाड़ोल-फलासिया-सोम-डैया होते हुए ईडर से राजमार्ग को जोडऩा था। लेकिन मार्ग में डैया तक फुलवारी की नाल वन्यजीव अभयारण्य होने से सुप्रीम कोर्ट से स्वीकृति मिलना कठिन था। इस पर नया प्रस्तावित मार्ग सोम-गरणवास-खोखरा होते हुए गुजरात के विजयनगर से गुजर रहे एनएच-58 से जोडऩे का प्रस्ताव जल्द भेजा जाएगा। इससे प्रक्रिया पूर्ण होते ही जल्द समाधान मिलेगा।  

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