जानिए क्यों है उदयपुर जनजाति की वनोपज पर संकट, किसलिए पतझड़ में उड़ा हमारा तेंदूपत्ता

जानिए क्यों है उदयपुर जनजाति की वनोपज पर संकट, किसलिए पतझड़ में उड़ा हमारा तेंदूपत्ता

Mukesh Hingar | Publish: Jan, 05 2019 04:20:25 PM (IST) | Updated: Jan, 05 2019 04:20:26 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

- वर्ष 2017 में से 54.88 करोड़ मिले

- इस बार मात्र 7.13 करोड़ रुपए

मुकेश हिंगड़/उदयपुर. दक्षिण राजस्थान में जनजाति वर्ग की आय का मुख्य जरिया माने जाने वाले तेंदूपत्तों को सरकारी ‘नजर’ लग गई है। सरकारी सख्ती के बीच बीड़ी उत्पादन फैक्ट्रियों में लगातार कमी होने से तेंदूपत्ते की मांग घटती जा रही है। व्यापारियों के गोदामों में भी पुराना तेंदूपत्ता धूल फांक रहा है। मांग घटने से इस बार तेंदू पत्तों से होने वाली राजस्व आय भी प्रभावित हुई। इस बार बोली में मात्र 7.13 करोड़ रुपए की पेशकश ही मिली जबकि वर्ष 2017 में 54.88 करोड़ रुपए की पेशकश मिली। संभाग के छह वन मंडलों की 73 तेंदुपत्ता इकाइयों की निविदाएं शुक्रवार को यहां चेतक सर्कल स्थित वन भवन कैम्पस में खोली गई जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश व राजस्थान के व्यापारी आए। व्यापारियों में इस बार जोश नहीं था। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रुति शर्मा व मुख्य वन संरक्षक इन्द्रपाल सिंह मथारू की देखरेख में तेंदूपत्ता की मंडल वार निविदा खोली गई।

उत्तर मंडल की एक भी इकाई नहीं बिकी
उदयपुर उत्तर वन मंडल की 11 में से एक भी इकाई का विक्रय नहीं हुआ। विक्रय से शेष रही इकाइयों की निविदा 11 जनवरी को फिर होगी। इस दौरान समिति सदस्य, उप वन संरक्षक आर. के. जैन, अमर सिंह गोठवाल, शारदा प्रताप सिंह, सुगनाराम जाट, सारथ बाबू, लेखाधिकारी विशाल अग्रवाल आदि उपस्थित थे।

 

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तेंदूपत्ता की कमाई इसलिए घटी
- व्यापारियों के पास पुराना स्टॉक भी खत्म नहीं हुआ
- जो व्यापारी आए, उन्होंने ऊंचा दाम नहीं लगाया
- इस क्षेत्र में बारिश कम होने से पत्ते की गुणवत्ता भी ठीक नहीं हुई।

पिछले सालों में इसलिए आया था उछाल
- राजस्थान पर मानसून की मेहरबानी
- पुराना तेंदूपत्ता स्टॉक में किसी के पास नहीं बचा
- गुजरात व मध्यप्रदेश में तेंदूपत्ता को लेकर जटिल प्र्रकिया थी
- गुजरात व एमपी के व्यापारियों का राजस्थान के प्रति ज्यादा झुकाव था

किस मंडल में कितनी इकाइयां बिकी

- वन मण्डल चितौडगढ़़ की 14 में से 7
- वन मण्डल, प्रतापगढ़ की 20 में से 18
- डूंगरपुर वन मंडल की 9 में से 8
- बासंवाड़ा वन मंडल की 11 में से 11
- उदयपुर दक्षिण मंडल की 9 में से 6

इस बार बारिश कम होना और व्यापारियों के पास पुराना स्टॉक होना भी बड़ा कारण रहा। वैसे हमने अन्य राज्यों में इस नीलामी के आंकड़ों की समीक्षा की तो वहां पर भी इस बार राजस्व कम ही मिला। कम बारिश से पत्ते की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है, वैसे शेष नीलामी में कई यूनिटों से भी अभी राजस्व मिलेगा। - आईपीएस मथारू, मुख्य वन संरक्षक, उदयपुर

ऐसे बढ़ा तेंदूपत्ता राजस्व का ग्राफ
- वन मंडल कुल इकाई 2016 2017 2018 2019
- बांसवाड़ा 11 1.70 5.43 14 1.26
- डूंगरपुर 09 1.23 4.73 1.25 0.44
- उदयपुर उ. 11 0.66 3.08 1.25 00
- उदयपुर द. 09 1.19 4.82 1.50 0.34
- चित्तौडगढ़़ 14 2.37 8.05 2 0.65
- प्रतापगढ 20 8.67 28.74 4 4.42
- कुल 74 13.70 54.88 24 7.13
(अनुमानित राशि करोड़ों में)

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