उदयपुर बनेगा देश के लिए जीआई का नीति निर्धारक, यहां प्रयोग, सफलता पर देश में होगा लागू

- कन्ट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट डिजाइंस एंड ट्रेड मार्क आईएएस राजेन्द्र रत्नू से पत्रिका की विशेष बातचीत

- कारीगरों, कलाकारों, हस्तशिल्प, वास्तुकला, खाद्य व कृषि उत्पादों को मिलेगा नया आयाम

By: bhuvanesh pandya

Updated: 06 Mar 2021, 08:53 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. देश के कन्ट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट डिजाइंस एंड ट्रेड मार्क आईएएस राजेन्द्र रत्नू का कहना है कि ये शुरुआत उदयपुर से कर रहे हंै, यहां की सफलता पर नीति निर्धारक तय किए जाएंगे, इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में हमारी साझा बौद्धिक सम्पदा विश्व स्तर पर स्थापित हो सके गी। सम्पदाओं को जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन्स) के पंजीयन के माध्यम से आगे बढ़ाने की शुरुआत की जा रही है। यह उत्पादों को वल्र्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन की राह पर चलकर स्थापित करने की ओर पहला कदम है। पत्रिका की रत्नू से विशेष बातचीत के प्रमुख अंश:
------

पत्रिका: ये आयोजन क्या है, किसलिए किया जा रहा है ?
रत्नू: ऐसे आयोजनों के माध्यम से सामूहिक साझा बौद्धिक सम्पदा को आगे बढ़ाने का लक्ष्य है। हमारी पीढ़ी दर पीढ़ी काम करती है। जैसे हमारे कारीगर, वास्तुकला, पेंटर्स, खाद्य पदार्थ, कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प संजोए हुए है। जीआई कानून के तहत वल्र्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन से एग्रिमेंट किया है। जीआई के जो उत्पाद है उसके लिए कानूनी ढांचा तैयार करेंगे, जिससे ऐसे लोग जीआई उत्पादों में अपना पंजीयन कर सकेंगे और उन पर उनका नाम होगा।

-------
पत्रिका: जीआई, पेटेंट डिजाइंस एंड ट्रेड मार्क के बारे में कुछ बताइए ?

रत्नू: हमारा रजिस्ट्री का मुख्य कार्यालय चेन्नई में है, रिजनल ऑफिस मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता में है। जिनमें शिक्षा का स्तर अच्छा होता है वह ज्योग्राफिकल इंडिकेशन को कैसे फाइल करना है वह समझते हैं। जॉब और रिसर्च से जुड़े लोग, औद्योगिक घरानों से जुड़े शोधकर्ता या विद्यार्थी जीआई फाइल कर लेते हैं, लेकिन ऐसे कलाकार, कारीगर ये समझ नहींं पाते।
------

पत्रिका: जीआई को लेकर राजस्थान की क्या स्थिति है?
रत्नू: राजस्थान से नई एप्लीकेशन नहीं आ रही है, राजस्थान से अब तक 11 उत्पादों और लोगो, जीआई में पंजीकृत किए गए है। राजस्थान में अपाार संभावनाएं है।

-----

पत्रिका: क्या यह शुरुआत है?

रत्नू: यहां से पायलट स्तर पर शुरुआत कर रहे हंै। उदयपुर से हो रही शुरुआत देश भर में कारगर साबित होगी। सफलता पर नीति बनाई जाएगी। यह नीति देश भर में लागू होगी।

-----
पत्रिका: केन्द्र सरकार कितना सहयोग कर रहे है ?

रत्नू: ऐसे आयोजन के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय पूरी गंभीरता से समय-समय पर निर्देश दे रहा है। एमएसएमइ मंत्रालय पंजीयन के लिए दो लाख रुपए अनुदान दे रहा है। लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी, जहां आइएएस ऑफिसर्स को प्रशिक्षण दिया जाता है, उनमें भी इसकी गंभीरता बताई जा रही है। हर प्रोबेशनर्स को यह असाइनमेंट दिया गया है कि वह अपने-अपने जिले में एक-एक जीआई उत्पाद का पंजीयन करवाए।

------
पत्रिका: जीआई व पेटेंट में क्या अन्तर है ?

रत्नू: जीआई साझा बोद्धिक सम्पदा है, पेटेंट व्यक्तिगत होता है। जीआई बढ़ेगा तो अपने यहां की विशेष विधाएं पूरी दुनिया समझेगी।

bhuvanesh pandya
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned