यूजीसी ने दागा सवाल: रोस्टर नियमों का पालन क्यों नहीं किया

यूजीसी ने दागा सवाल: रोस्टर नियमों का पालन क्यों नहीं किया
मोहनलाल सु ााडिय़ा विवि

bhuvanesh pandya | Publish: Jan, 12 2019 10:10:20 AM (IST) | Updated: Jan, 12 2019 10:10:21 AM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

- यूजीसी ने जारी किया नोटिस

- आरक्षण नियमों में फिर उलझा विवि

 

उदयपुर. मोहनलाल सु ााडिय़ा विवि में गत वर्ष की गई शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक पदों की ार्ती प्रक्रिया पर फिर पेंच पड़ गया है। यूजीसी ने रजिस्ट्रार एचएस ााटी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है कि विश्वविद्यालय में हुई ार्ती में केन्द्र सरकार के आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया है, यानी रोस्टर के नियमों को दरकिनार करते हुए ार्तियां की गई हैं। यूजीसी की अंडर सैक्रेट्री मधु मेहरा ने इसे लेकर पत्र जारी किया है। 7 जनवरी को जारी पत्र विवि को शुक्रवार को मिला है।

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अ बेडकर अनुसूचित जाति अधिकारी-कर्मचारी एसोसिएशन राजस्थान की ओर से गत वर्ष हुई वि िान्न ार्तियों में नियमों की अनदे ाी करने को लेकर शिकायत की थी, इस पर संज्ञान लेते हुए यूजीसी ने ये नोटिस जारी किया है।
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एक वि ााग को माना एक यूनिट

यूजीसी ने पूछा है कि विवि ने प्रत्येक वि ााग को एक यूनिट मानते हुए ार्तियां की हैं, जबकि नियमानुसार पूरे विवि को एक यूनिट मानते हुए ार्तियां की जानी थी। जिसका विज्ञापन ाी सु ााडिय़ा विवि ने जारी किया था। इसमें उस विज्ञापन की तिथि व अन्य जानकारी ाी दी गई है। इसमें उल्ले ा है कि यह विज्ञापन 6 फरवरी को जारी किया गया था।

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तत्काल कार्रवाई की जाए-कुलपति को ाी शामिल करें
रजिस्ट्रार को ोजे गए पत्र में उल्ले ा है कि इस तरह नियमों की अवहेलना करने वाले संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई हो, इस कार्रवाई में कुलपति प्रो. जेपी शर्मा को ाी शामिल करने के निर्देश हैं। साथ ही ये लि ाा गया है कि अजा-जजा व अन्य पिछड़ा वर्ग के अ यर्थियों के साथ न्याय होना चाहिए।

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तत्काल जवाब दें-मंत्रालय जाएगा
यूजीसी ने इस संबंध में तत्काल विवि से जवाब मांगा है। इसमें मेहरा ने पिछली बार 1 नव बर 18 को ोजे गए पत्र का साथ में हवाला दिया है। ये जवाब मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक जाएगा। इसकी एक प्रति मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंडर सेक्रेट्री संजीवन कुमार नारायण को ाी ोजी गई है।

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पत्रिका ने उठाया था मामला
विवि की ओर से रोस्टर नियमों की अवहेलना कर ार्ती करने का मामला कई समाचारों के माध्यम से राजस्थान पत्रिका ने उठाया था, लेकिन इस पर विवि ने कोई कदम नहीं उठाया। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने पहले प्रत्येक वि ााग को एक यूनिट मानते हुए ार्ती करने के नियम बनाए थे, लेकिन यूजीसी हमेशा से पूरे विवि को ही एक यूनिट के रूप में लेकर ार्ती करने के आदेश की पैरवी करता रहा है।

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इसलिए रुकी थी देश ार में ार्तियां

रोस्टर नियमों को लेकर उच्चतम न्यायालय में मामला ल िबत होने के कारण देश ार के विवि में शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक पदों की ार्तियां रोक दी गई थी, जो अ ाी तक रुकी हुई है। हालांकि ये मामला प्रकाश में आने से पहले ही सु ााडिय़ा विवि में ार्तियां वि ाागों को यूनिट मानते हुए कर दी गई थी।

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ार्ती प्रक्रिया में पूरी तरह से रोस्टर के नियमों को दरकिनार कर दिया गया है। ऐसे में संघठन की ओर से शिकायत दर्ज की गई थी। इस पर यूजीसी ने पत्र जारी किया है, यदि ये ही हाल रहे तो यूजीस की ग्रांट रुक सकती है। विवि ने 2006 के रोस्टर नियमों की अनुपालना नहीं की है।

जीएल वर्मा, प्रवक्ता अजात
(डॉ अ बेडकर अनुसूचित जाति अधिकारी-कर्मचारी एसोसिएशन राजस्थान)

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रजिस्ट्रार की चाल

- कुलपति के निर्देश-स्वीकृति के बाद ही जारी हो गोपनीय दस्तावेज

मोहनलाल सु ााडिय़ा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी शर्मा ने जैसे ही रजिस्ट्रार एचएस ााटी को नोटिस जारी किया, उन्होंने एक के बाद एक ार्तियों से जुड़े कई दस्तावेज मांगने की कुटिल चाल चलकर कुलपति को ही उलझा दिया है। उन्होंने पूरे में से पूरे अंक लाने वाले अ यर्थी के बारे में जानकारी एवं अन्य ार्तियों से जुड़े दस्तावेज की मांग की है। दूसरी ओर गोपनीय दस्तावेजों के विवि से बाहर जाने पर कुलपति ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं कि जो ाी गोपनीय दस्तावेज हैं, वे किसी ाी स्थिति में कुलपति सचिवालय से स्वीकृति के बाद ही जारी किए जाएं।

विश्वविद्यालय में इन दिनों पढ़ाई, पाठ्यक्रम या अकादमिक गतिविधियों के बजाय कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच तनातनी की चर्चा है। मामले पर सीआईडी की ाी पूरी नजर है। सीआईडी के कार्मिकों से लेकर कई पुलिसकर्मी ाी सुरक्षा के लिहाज से विवि परिसर में सुबह से शाम तक बने रहते हैं ताकि किसी ाी प्रकार से कोई घटनाक्रम नहीं हो। साथ ही सरकारी स पत्ति को नुकसान नहीं हो।

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कुलपति ने यह पूछा है नोटिस में

- पेपर आउट किया यह आरोप कैसे लगाए? केवल ाीड़ में सनसनी पैदा करने का कदम।

- नोटशीट बदलने का मिथ्या आरोप कैसे लगाया? इसकी जांच होनी चाहिए
- विवि की आन्तरिक बातों को ाुले में बोलना कहां तक ठीक है?

- प्रशासनिक अधिकारी के नाते आपकी कई जि मेदारियां हैं, आधी- अधूरी बातें तोड़-मरोड़ कर कैसे प्रस्तुत की?
(कुलपति ने तीन दिन में मांगा जवाब, नहीं देने की स्थिति में राज ावन व राज्य सरकार को पूरी स्थिति व रिपोर्ट सौंप अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी)

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जांच जारी, कानूनी कार्रवाई की तैयारी

गत दिनों गोपनीय दस्तावेज आम होने को लेकर गठित कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। बताया गया कि स्थिति स्पष्ट होते ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को प्र ाावित करने वाले इस घटनाक्रम की विवि विस्तृत रिपोर्ट तैयार करवा रहा है। ार्तियों को लेकर ा्रामक जानकारी से अव्यवस्था की रिपोर्ट पर ाी फोकस किया जा रहा है। रिपोर्ट राज्य सरकार एवं राज ावन को ोजी जाएगी।
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जो दस्तावेज रजिस्ट्रार मांग रहे हैं, वे नियुक्ति से जुड़े हैं। हम सरकार को या राज ावन को ही दे सकते हैं। यदि इस मामले में राज ावन आदेश देगा तो बात अलग है। कई मामले न्यायालय में ल िबत हैं, ऐसे में ये दस्तावेज कैसे दिए जा सकते हैं।
प्रो.जेपी शर्मा, कुलपति, मोहनलाल सु ााडिय़ा विवि

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एक ओर तो यह कह रहे हैं कि मैं गोपनीय दस्तावेज आउट कर रहा हूं। दूसरी ओर मैं उनसे मांग रहा हूं तो मुझे नहीं दे रहे हैं। यदि मेरे पास कोई दस्तावेज होते तो मैं उनसे क्यों मांगता। मैं नोटिस का जवाब तैयार करने के लिए दस्तावेज मांग रहा हूं। साथ ही मुझे सरकार को ाी रिपोर्ट देनी है।
एचएस ााटी, रजिस्ट्रार

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