पजेशन दे दिया, लोग रहने लगे, अब यूआइटी बोली ब्याज जमा करा, चक्कराएं लोग

बेड़वास में गरीबों को मकान मिलने से पहले तब यूआइटी ने सारी औपचारिकताएं पूरी कर दी थी। कोई बाकियात नहीं थी तब उनको पजेशन दे दिया था। लोग हसी-खुशी रहने लगे लेकिन एकाएक यूआइटी का एक नोटिस आया तो उनको चक्कर आ गए। एक-एक पाई जमा करने वाले ये लोग बोले कि सब कुछ पूरा होने के बाद ही पजेशन दिया और उसके बाद यह बाकियात निकाल देना समझ से परे है।

By: Mukesh Kumar Hinger

Published: 11 Jan 2021, 11:13 AM IST

उदयपुर. बेड़वास में यूआइटी के मेगा आवास योजना में एमआइजी फ्लैट के आवंटी यूआइटी के चक्कर लगा रहे है। वहां हुडको के कमरा नंबर 37 में जिस लाइन में वे लगे वहां आगे-पीछे वाले को पूछा तो वे भी यही बोले कि रहने लग गए और अब हमे ब्याज की वसूली निकाल कर भेजी है। अंदर से आने वाला बोला जमा ही कराना पड़ेगा यहां तो एक ही जवाब है, बाकी सवालों के जवाब नहीं मिल रहा है। पीडि़त परिवारों ने बताया कि नोटिस ने नींद उड़ा दी है।

कलक्टर ने चाबियां सौंपी थी
प्रभावित लोगों ने बताया कि उनको जिला कलक्टर व यूआइटी चेयरमैन ने घरों की चाबियां सौंपी थी। यूआइटी ने कोई बाकियात नहीं थी तभी तो कार्यक्रम में चाबियां दिलाई, अब ये बकाया राशि निकाल दी। बैंक से लोन का पैसा समय पर नहीं मिला तब भी यूआइटी ने कोई नोटिस देकर नहीं चेताया, पजेशन देने के बाद राशि देरी से मिलने की बात कहां से आ गई, यह समझ से परे है। वहां जवाब भी ढ़ंग से नहीं दिया जा रहा है। एक व्यक्ति ने बताया कि उसके सात लाख के मकान की किमत में करीब दो लाख का ब्याज जोड़ दिया तो मकान क्या भाव पड़ा।

केस 1
सुरेश कुमार भावसार बताते है कि उनको नोटिस में 1,72,810 रुपए की बाकियात निकाली। उनको पजेशन मिल गया, बाकियात का पहले कभी कोई नोटिस नहीं दिया। वे कहते है कि मकान पर गए तो अंदर से पानी गिर रहा था, मकान के अंदर जगह काम खराब था।

केस 2
हुक्मीचंद सुथार कहते है कि 4,922 रुपए की बाकियात निकाल दी जबकि मुझे पजेशन इसी आधार पर दिया कि आपकी कोई बाकियात नहीं है। बैंक गया तो बोले कि हमने तो समय पर राशि भेज दी, यूआइटी ने रिकार्ड पर देरी से लिया होगा। हमारी कोई गलती नहीं है।

केस 3
कमलेश कुमार कहते है कि उनके नाम 57,357 का नोटिस निकाला जबकि मकान आवंटन से पहले सारा रिकार्ड, बैंक के कागज आदि लिए और कोई बाकियात नहीं थी। अब नोटिस देकर ब्याज की बाकियात निकाली है।

केस 4
शंकर लाल मेघवाल कहते है कि उनके नाम पर 2463 रुपए की बकाया राशि निकाल दी। मकान की चाबी हाथ में मिली और हम वहां रहने लगे। मै बाहर था, एक बार ऑनलाइन जमा कराए लेकिन अब आकर बात करुंगा।

इनका कहना है...
मेरे पास तो इस तरह की परेशानी लेकर कोई नहीं आया है। ये मकान गरीबों के लिए ही बनाए है और किसी के साथ इस तरह कोई बाकियात नहीं निकाली जाती है। नोटिस जिनको मिले तो उसमें किस तरह की बाकियात है पूरा समझेंगे लेकिन ऐसे प्रभावित लोग नोटिस की प्रति के साथ प्रार्थना पत्र दें, पूरी मदद करेंगे।
- अरुण कुमार हासिजा, सचिव यूआइटी

इनका कहना है...
मेरे पास तो इस तरह की परेशानी लेकर कोई नहीं आया है। ये मकान गरीबों के लिए ही बनाए है और उनसे कोई वसूली थोड़े करेंगे। हमने तो एलआइजी की लॉटरी के 74 लाख रुपए रिफंड किए थे। हम किसी गरीब का नुकसान नहीं होने देंगे, अगर यूआइटी के स्तर पर कोई भी कमी रही होगी तो ठीक कराएंगे पर मै पूरे मामले को देखुगा।
- अरुण कुमार हासिजा, सचिव यूआइटी

Mukesh Kumar Hinger Desk
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