भक्ति-गौरवी जैसी बेटियां देने वाली लेकसिटी में वाटर स्पोट्र्स की अपार संभावनाएं, झीलें भी मेहरबान लेकिन सरकार नहीं

भक्ति-गौरवी जैसी बेटियां देने वाली लेकसिटी में वाटर स्पोट्र्स की अपार संभावनाएं, झीलें भी मेहरबान लेकिन सरकार नहीं
भक्ति-गोरवी जैसी बेटियां देने वाली लेकसिटी में वाटर स्पोट्र्स की अपार संभावनाएं, झीलें भी मेहरबान लेकिन सरकार नहीं

chandan deora | Updated: 18 Sep 2019, 01:29:15 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

भक्ति-गोरवी जैसी बेटियां देने वाली लेकसिटी में वाटर स्पोट्र्स की अपार संभावनाएं, झीलें भी मेहरबान लेकिन सरकार नहीं

चन्दन सिंह देवड़ा/उदयपुर.केन्द्र की सरकार खेलों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। प्रकृति की गोद में बसे उदयपुर पर झीले मेहरबान है लेकिन फिर भी लेकसिटी में वाटर स्पोट्र्स बेहाल है इसकी वजह प्रदेश सरकार है। जिस शहर से इंग्लिश चैनल पार करने वाली भक्ति और गौरवी जैसी प्रतिभाएं दी वहां वाटर स्पोट्र्स की अपार संभावनाओं के बावजूद राजस्थान क्रीडा परिषद की ओर से कोई अग्रणी पहल नहीं की जा रही है। ओलंपिक में सबसे ज्यादा जिस कायाकिंग और कैनोइंग खेल में मैडल दाव पर लगते हैंं उसे क्रीडा परिषद ने अभी तक मान्यता तक नहीं दी है। इन विकट परिस्थितियों के बावजूद फतहसागर झील में इस खेल अभ्यास में कई खिलाड़ी जुटे हैंं।

अस्थाई कोच तक हटा दिया..

2011-12 में उदयपुर की फतहसागर झील में कायाकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन के प्रयास से इस खेल को बढ़ावा दिया गया। लोगों ने इसे खूब पंसद किया और 2015 में नेशनल प्रतियोगिता की मेजबानी उदयपुर ने की। कई नए खिलाड़ी इस खेल से जुड़े। सुखाडि़या विश्वविद्यालय ने 56 कयाक ओर कैनोइंग बोट उपलब्ध करवाई जिस पर क्रीड़ा परिषद ने अस्थाई कोच भी लगाया लेकिन उसके बाद इसे हटा दिया गया। आज 26 खिलाड़ी अपने स्तर पर प्रशिक्षक के निर्देशन में तैयारियां कर रहे हैंं।

खेल पर्यावरण और पर्यटन के लिए बेहतर

झीलों की नगरी में वाटर स्पोट्र्स बढ़ेगा तो पर्यटक बढ़ेंगे क्योंकि विदेशी दर्शक सबसे ज्यादा इस खेल से जुड़े हैंं। फतहसागर-पीछोला समेत दूसरी झीलों में वाटर स्पोट्र्स की भरपूर संभावनाएं हैंं। वहीं कयाक, कैनोइंग और ड्रेगन बोट चक्कूनुमा होती है। इसे चप्पू से चलाया जाता है जिससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है जो जलीय जीवों के लिए उपयोगी है।

एकेडमी खोलने की मांग...

कायाकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन का मुख्यालय भोपाल में जबकि इस शहर की तुलना में हमारी झीलें में कम नहीं है। अभी केरल, जम्मू कश्मरी, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के खिलाड़ी इसमें आगे है। जबकि उदयपुर में एकेडमी खोली जाए तो कई नेशनल इंटरनेनल प्लेयर मिल सकते हैंं।

यह है वाटर स्पोट्र्स इवेंट

-ड्रेगन बोट-कैनोइंग-कायाकिंग-स्विमिंग-मास्टर स्विमिंग-क्रोस कंट्री स्विमिंग

इनका कहना...

उदयपुर में वाटर स्पोट्र्स एकेडमी की दरकार है क्योंकि यहां पूरी संभावनाएं है। क्रीड़ा परिषद इस खेल को मान्यता देवें। अभी खिलाड़ी विवि की टीमों से ही जा पा रहे है। ओपन भागीदारी नहीं कर पाते है। लेकसिटी में यह खेल पर्यटन को बढ़ाएगा।

चंद्रगुप्त सिंह चौहान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजस्थान कायाकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन

जो भी संसाधन मिले है उसके दम पर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मैडल हासिल कर रहे है। उदयपुर में प्रतिभाएं भरी पड़ी है जो वाटर स्पोट्र्स में अपनी धाक कायम कर सकती है। जरुरत इसे बढ़ावा देने की है।

प्रतीति व्यास,नेशनल खिलाड़ी

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