कुछ सीखना होगा हमें, क्यों कोरोना खेल रहा इटली में मौत का तांडव,

- 5476 समाए काल के मुंह में -

- कई कमियां, लापरवाही और कम जानकारी ने बिगाड़ा स्वास्थ्य सुरक्षा का गणित

- हमें इससे सबक लेना चाहिए

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. कोरोना ने जहां दुनिया भर में मौत का खुला खेल खेला है तो इटली को उस खेल का सबसे बड़ा मैदान बना डाला है। अब तक इटली में कोविड-19 से 59138 लोग संक्रमित हैं, तो 5476 मौते हुई हैं। हमें इटली में हुए नरसंहार से सबक लेना चाहिए। भारत की ही तरह वहां की चिकित्सा का ढांचा कमजोर है, जितनी जरूरत है उतना मजबूत नहीं। दूसरी सबसे बड़ी बात ये कि इटली में बुजुर्ग आबादी ज्यादा है तो हमारी ही तरह वहां के ज्यादातर लोग लापरवाह और गैर जिम्मेदार हैं। यहीं नहीं जो डॉक्टर उपचार कर रहे हैं उनके पास जरूरी सुरक्षा साधन नहीं हैं।

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दुनिया में सर्वाधिक मौते इटली में हुई है, जबकि चीन इस पर लगातार नियंत्रण करने लगा है। कोरोना वायरस का कहर इटली पर सर्वाधिक टूटा है, यह खतरनाक वायरस मौत बनकर घूम रहा है और दिन-ब-दिन इटली में होने वाली मौतों का आंकड़ा तेजी पकड़ रहा है। ऐसे में सभी के मन में सवाल उठ रहा है कि चीन के वुहान शहर से शुरू हुई यह बीमारी आखिर इटली में इतनी भारी तबाही क्यों मचा रही है।

- बुजुर्ग आबादी : इटली की आबादी करीब 6 करोड़ है। बुजुर्गों की आबादी में इटली नंबर दो पर हैं। कोरोना वायरस का असर बुजुर्ग लोगों पर ज्यादा हो रहा है इटली में 65 या ज्यादा साल के लोगों की संख्या करीब एक चौथाई है। देश में अब तक कोरोना की वजह से गईं ज्यादातर जानें 80-100 के बीच की उम्र के लोगों की रहीं। बड़ी उम्र के लोगों में अमूमन पहले से कोई न कोई बीमारी होती है। ऐसे में उनका वायरस की चपेट में आना आसान होता लेकिन उससे लडऩे की शक्ति कम हो जाती है।

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कोरोना टेस्ट नहीं कराना : इटली में मौत का दूसरा कारण है कि बीमारी की चपेट में आए लोग या कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर भी यहां लोग टेस्ट नहीं करा रहे, जिससे कोरोना तेजी से फैल रहा है। इनमें से कई लोग ऐसे हैं जिन्हें कोरोना का संक्रमण होता है लेकिन बिना टेस्ट उन्हें पॉजिटिव नहीं माना जा सकता। इसकी वजह से दूसरी जगहों की तुलना में पॉजिटिव पाए गए केस कम रहते हैं, जबकि मौतों की संख्या बढ़ती रहती है और आखिर में मृत्यु दर बढ़ी हुई नजर आती है।

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कम्यूनिटी ट्रांसमिशन : इटली की असल मृत्यु दर 3.4 प्रतिशत होनी चाहिए। लोगों के टेस्ट नहीं कराने के कारण यह बढ़ी हुई दिखती है। इससे एक और बड़ा नुकसान यह भी है कि अभी तक यह सटीक तरह से पता नहीं है कि असल में कितने लोग वायरस से संक्रमित हैं। इस तरह कम्यूनिटी ट्रांसमिशन का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर लोग बिना टेस्ट के यह नहीं जान पाते कि वो कोरोना वायरस की चपेट में हैं।

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मेडिकल सर्विस बदहाल: स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें, तो इटली की मेडिकल सेवाओं को खस्ताहाल है। एक साथ इतने केस आ जाने से सभी अस्पतालों की हालत खस्ता हो गई है और बेड कम पड़ते जा रहे हैं। कोरोना के मरीजों का फील्ड अस्पतालों में इलाज चल रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के पास अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी सामान नहीं है, जिससे वे खुद भी वायरस की चपेट में आ रहे हैं।

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देर से हुआ लॉकडाउन : सरकार और प्रशासन ने शहरों को पूरी तरह से शटडाउन कर रखा है और सिर्फ जरूरी काम के लिए लोगों को बाहर आने की इजाजत है। पुलिस किसी को भी सडक़ पर टहलने की इजाजत नहीं दे रही है। हालांकि, खराब आधारभूत सुविधाओं और कुछ आर्थिक हालात के चलते लोग इन नियमों का उल्लंघन करने को मजबूर हैं। वहीं, माना जा रहा है कि यह लॉकडाउन करने में काफी देरी हो गई।

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सेल्फ आइसोलेशन की कम जानकारी :इटली को हमेशा से फन लविंग कंट्री के रूप में जाना जाता है। स्ट्रीट फूड,आर्ट, कल्चर, फैशन के लिए इटली को दुनिया भर में पसंद किया जाता है। ऐसे में जब यहां सेल्फ आइसोलेशन के लिए लोगों को छुट्टी दी गई, तो उन्होंने बाहर घूमकर अपना वक्त बिताया, जिससे एक दूसरे के संपर्क में आने की वजह से लोगों में यह बीमारी फैलती चली गई। लोगों को व्यापक स्तर पर सेल्फ आइसोलेशन की जानकारी नहीं दी गई।

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विदेशी आवागमन: इटली में सबसे ज्यादा समस्या देश के उत्तरी हिस्से में आ रही है. इसके पीछे कारण ये है कि देश के ज्यादातर व्यापारिक सेंटर उत्तरी हिस्से में ही पड़ते हैं. यहां से विदेशी यात्रियों का आवागमन भी बहुत ज्यादा है. उत्तरी इटली को पूरे यूरोप में कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है. इस हिस्से में चीन के साथ भी बड़े स्तर पर व्यापार होता है।

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कोरोना मीटर इन इटली - संक्रमित- 59138- मौत- 5476- ठीक हुए मरीज-7024- एक्टिव केस- 46638

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bhuvanesh pandya Reporting
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