बिना इम्तिहान स्कूल की कक्षा से सीधे कॉलेज में पहुंचेंगे, कमजोरी दूर करने में लगेगी कड़ी 'परीक्षा,

कोरोना महामारी ने बच्चों की पढ़ाई को बुरी तरह से प्रभावित किया है। खास तौर पर एेसे बच्चे जो स्कूल शिक्षा से कॉलेज शिक्षा में कदम रखने जा रहे हैं। भयावह कोरोना संक्रमण के कारण केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) व राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) को शिक्षा की नींव मानी जाने वाली दसवीं व बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के ही पिछली कक्षाओं में प्राप्तांकों के आधार पर प्रमोट करने का निर्णय लेना पड़ा।

By: bhuvanesh pandya

Updated: 22 Jul 2021, 06:40 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. बारहवीं की परीक्षा दिए बिना उत्तीर्ण होकर अब ये विद्यार्थी कॉलेज में पहुंचने वाले है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) व उच्च शिक्षा विभाग को चाहिए कि वे एेसे बच्चों के लिए प्रथम वर्ष में ही एेसा विशेष पाठ्यक्रम बनाकर एेसी कक्षाएं शुरू करने का निर्णय ले जो इन विद्यार्थियों की पिछली कक्षाओं में रही कमी को दूर कर सके। साथ ही विद्यार्थियों का तकनीकी ज्ञान व आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाए, ताकि भविष्य में एेसी स्थिति फिर से आने या बने रहने पर ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बच्चों के स्तर का आकलन हो सके।

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एेसा मैकेनिज्म तैयार हो जो बच्चों की कमी दूर करेंकॉलेज शिक्षा में एेसा मैकेनिज्म तैयार होना चाहिए जो प्रमोट बच्चों की कमी को प्रवेश लेते ही कुछ समय में दूर करें, ताकि आगे की कक्षाओं में वह बेहतर परफोरमेंस दे सकेंगे। किसी के पास कोई जादू का डंडा यानी मैजिक सोल्यूशन नहीं है कि इसे तपाक से अन्य विद्यार्थियों के साथ मुख्य धारा में ले आए। एेसे विद्यार्थियों के लिए ना सिर्फ अलग से कक्षाएं चलाई जानी चाहिए बल्कि उनकी गुणवत्ता पर भी पूरा फोकस रखना होगा। यह हमारे सामने बड़ी चुनौती इसलिए है क्योंकि ये बच्चे ही भविष्य है। डिजिटल टेक्नोलॉजी के सहयोग से इनकी कमी को दूर किया जा सकता है। इसके लिए हमें टर्न लेना होगा, जिसमें इंस्टीट्यूशन, शिक्षक व अभिभावक तीनों के समन्वय से अतिरिक्त समय देकर इन बच्चों को मजबूत बनाया जा सके।

जनत शाह, निदेशक आईआईएम उदयपुर

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प्रत्येक विवि में प्रमोट होकर प्रथम वर्ष में आने वाले विद्यार्थियों के लिए एज्यूकेशन टेक्नोलॉजी का सहारा लेना होगा। ये कॉलेज शिक्षा में बडे़ बदलाव की ओर इशारा है, प्रमोट होकर आने वाले बच्चों के लिए तय समय का एक पाठ्यक्रम तैयार करना होगा ताकि वह अपनी नियमित पढ़ाई के साथ-साथ अपनी पुरानी कक्षा में रही कमी को दूर कर सके। प्रत्येक विद्यार्थी का स्तर जानने के लिए करिकुलम में बदलाव लाना होगा, एक नियमित कक्षा इन बच्चों की अन्य कक्षाओं के साथ संचालित करनी होगी। बच्चों की समझ की परख के लिए बाहरवीं कक्षा के पाठ्यक्रम का डमी एक्जाम भी प्रथम वर्ष की पढ़ाई के साथ ही होना चाहिए।

प्रो. अमेरिकासिंह, कुलपति मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय उदयपुर

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प्रथम वर्ष में आने के साथ ही पहले बारहवीं की पढ़ाई एक विशेष पाठ्यक्रम से करवाकर एकेडमिक ऑडिट करनी होगी, इससे बच्चे के स्तर का पता चल जाएगा। फिर उस ऑडिट के परिणाम के आधार पर उन्हें पढ़ाने की दिशा तय की जानी चाहिए। यदि पुरानी कमी के साथ कोई भी विद्यार्थी आगे की कक्षा में बढ़ जाता है तो बाद में वह बेहतर परफोर्म नहीं कर पाता। प्रथम वर्ष से पहले की कक्षाओं के पाठ्यक्रमों को जोड़ते हुए तैयार पाठ्यक्रम के आधार पर बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर ही उनकी कमी को दूर किया जा सकता है। एेसे विद्याथ्रियों के नियमित टेस्ट होने चाहिए।

प्रो. एसएस सारंगदेवोत, कुलपति जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय

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नई एज्यूकेशन पोलिसी बनी है, लेकिन इसमें योगा व मेडिटेशन का हिस्सा जरूरी है। अब हमें थ्येारी की कक्षाओं से ज्यादा बच्चे उद्यमिता या एंटरप्रेन्योरशिप के लिए कैसे तैयार हो इस पर काम करना होगा, कोरोना से मिले सबक को अवसर में बदलते हुए हमें इन प्रमोट किए विद्यार्थियों को भी आगे के लिए तैयार करना होगा। मेंटल वैल्विंग व डिजिटल टेक्नोलॉजी का सहारा लेते हुए सॉफ़्ट व प्रोफेशनल स्कील बढ़ाने के लिए कोर्स रखे जाने चाहिए। यदि कमी रह गई तो कमजोर बच्चे बाद मेंं जब डिग्री लेकर निकलेंगे, उनमें नवाचार की कमी रहेगी। विवि भी अपने स्तर पर ३० प्रतिशत कोर्स बदल सकते हैं। नई शुरुआत के लिए उच्च शिक्षा की रेगुलेटरी संस्थाओं को विचार शुरू कर इसे अमल में लाना चाहिए। फिजिक्स सेंस को प्रथम वर्ष में शुरू करते हुए एक विशेष सेमेस्टर बनाना होगा ताकि इससे गुजरकर ये बच्चे मजबूत भविष्य लेकर आगे बढे़।

प्रो एनएन राठौड़, कुलपति महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एण्ड टेक्नोलॉजी

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पहले ऑरिएंटेशन और बाद में नियमित ऑनलाइन कक्षा

ये बेहद महत्वपूर्ण विषय है। एेसे बच्चे जो बारहवीं में सीधे बिना परीक्षा के प्रमोट होकर प्रथम वर्ष में पहुंचेंगे, उनकी नींव अपेक्षाकृत कमजोर रहेगी। इसका कारण है कि दसवीं पास होने के बाद सामान्य विद्यार्थी ११ वीं में बेहद गंभीर नहीं रहता। एेसे में ये जरूरी है कि उसे उस स्तर पर लाने के लिए वे आगे बेहतर कर सके, पहले ऑरिएंटेशन करवाया जाना चाहिए, तो बाद में नियमित ऑनलाइन एेसा पाठ्यक्रम तैयार किया जाए जिसे वह देखकर अतिरिक्त समय में अपना स्तर सुधार सके। यूजीसी व विवि इस पर निर्णय ले सकते हैं, जिससे यदि वह मजबूत होगा तो आगे अच्छा परफोरमेंस दे पाएगा।

शशि सांचिहर, प्राचार्य, राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय उदयपुर

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ये है सीबीएसई का फ ॉर्मूला

सीबीएसई के बनाए पैनल ने 12वीं के स्टूडेंट्स के मूल्यांकन के लिए 30:30:40 का फ ॉर्मूला तय किया है। इसके तहत 10वीं. 11वीं के फ ाइनल रिजल्ट को 30 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा और 12वीं के प्री.बोर्ड एग्जाम को 40 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। सीबीएसई ने 4 जून को 12वीं के स्टूडेंट्स की मार्किंग स्कीम तय करने के लिए एक 13 सदस्य की कमेटी बनाई थी। इस कमेटी को 10 दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। वहीं, दसवीं कक्षा के पांच विषयों में से तीन बेस्ट में प्राप्त अंकों का 30 फ ीसदी वेटेज मिलेगा।

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ये है आरबीएसई का फ ॉर्मूला

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने भी कक्षा 10वीं और 12वीं के लिए माक्र्स फ ॉर्मूला जारी कर दिया है। राजस्थान बोर्ड 10वीं के स्टूडेंट्स को उनकी 8वीं बोर्ड परीक्षाए 9वीं की वार्षिक परीक्षा और 10वीं प्री.बोर्ड के आधार पर आंका जाएगा। क्लास 8 बोर्ड एग्जाम को 45 फ ीसदी, 9वीं को 25 फ ीसदी और 10वीं की परफ ॉर्मेंस को सिर्फ 10 फ ीसदी वेटेज दिया गया है। राजस्थान बोर्ड 12वीं का रिजल्ट स्टूडेंट्स की क्लास 10, 11 और 12 में परफ ॉर्मेंस के आधार पर बनेगा। 10वीं बोर्ड एग्जाम में प्राप्त अंकों को 40 फ ीसदी, 11वीं को 20 फ ीसदी और 12वीं को 20 फ ीसदी वेटेज दिया गया है।

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सीबीएसई ने कोरोना महामारी को देखते हुए 2021.22 सत्र के लिए भी पहले ही दिशा निर्देश की खास बातें.1. 50 फ ीसदी पाठ्यक्रम वाली दो टर्म एंड परीक्षाएं होंगी।

2. पिछले साल की तरह इस सत्र 2021.22 के लिए भी पाठ्यक्रम घटाया जाएगा।

3. आंतरिक मूल्यांकन, प्रैक्टिकल परीक्षाएं और प्रोजेक्ट वर्क और ज्यादा भरोसेमंद व मान्य बनाने की कोशिश की जाएगी।

4. कक्षा 9, 10 का आंतरिक मूल्यांकन तीन पीरिऑडिक टेस्टों, छात्र के ज्ञान और प्रोजेक्ट वर्क आदि के आधार पर किया जाएगा।

5. कक्षा 11, 12 क आंतरिक मूल्यांकन टॉपिक, यूनिट टेस्ट, प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट रिपोर्ट आदि के आधार पर किया जाएगा।

6. स्कूलों को सभी छात्रों की प्रोफ ाइल तैयार करनी होगी जिसमें आंतरिक मूल्यांकन का सबूत डिजिटल फ ॉर्मेट में होगा।

7. आंतरिक मूल्यांकन के माक्र्स सीबीएसई पोर्टल पर अपलोड करने के लिए स्कूलों का पोर्टल की सुविधा दी जाएगी।

8. टर्म 1 की परीक्षा 90 मिनट की होगी। इस पेपर में बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे।

9. टर्म 2 की परीक्षा को वार्षिक परीक्षा माना जाएगा जो दो घंटे की होगी। इस परीक्षा का आयोजन मार्च अप्रैल में किया जाएगा। परीक्षा न हो पाने की दशा में एमसीक्यू पेपर पर 90 मिनट की परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा।

bhuvanesh pandya
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