उदयपुर के इस मंच से शुरू हुई समर्थन मूल्य योजना की कार्यशाला

जनजातिय कार्य मंत्रालय के ट्राइफेड व राजससंघ के सहयोग से हुआ आयोजन

By: Sushil Kumar Singh

Published: 29 Mar 2019, 12:07 AM IST

उदयपुर. केंद्र के जनजातिय कार्य मंत्रालय के ट्राइफेड व राजससंघ के सहयोग से लघु वन उपजों की समर्थन मूल्य योजना की प्रदेश स्तरीय कार्यशाला का आयोजन गुरुवार को आयुक्त कार्यालय के वार्ताकक्ष में हुआ। कार्यशाला का शुभारंभ राजससंघ की प्रबन्धक निदेशक विनिता बोहरा सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न जिलों के उच्च अधिकारियों व ट्राइफेड मुख्यालय नई दिल्ली एवं जयपुर से आए अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ।
कार्यशाला में ट्राइफेड की ओर से वनोउपज के समर्थन मूल्य योजना की एवं वनधन विकास केन्द्र की स्थापना की योजना पर चर्चा की गई। इस योजना के माध्यम से वर्तमान में 50 वनोउपजों का समर्थन मूल्य भारत सरकार की ओर से तय हुआ है। इसमें मुख्यत राजस्थान में होने वाली वन उपज जैसे महुवा फूल एवं बीज, करंज बीज, पुवाड़ शीड, शहद इत्यादि शामिल हंै। इन सभी वन उपजों का प्रापण.संग्रहण राज्य सरकार की संस्था राजससंघ की ओर से निर्धारित समर्थन मूल्यों पर टीएसपी योजना क्षेत्र में राजससंघ के माध्यम से किया जाएगा। हाट बाजार.पंचायत स्तर या वनधन विकास केन्द के स्तर पर राजीविका समूहों, लेम्पस, वनउपज समिति के माध्यम से राजससंघ की ओर से होगा।
इसके साथ ही आदिवासियों के समूहों, लेम्पस एवं समितियों की ओर से प्राथमिक स्तर का गुणमूल्यवर्धन हाट बाजार लेवल पर किया जाएगा। इसका संचालन जिला अधिकारीयों के माध्यम होगा। वन उपजों का राजससंघ को हस्तान्तरित होगा। राज्य स्तर की अधिकृृत एजेन्सी स्टांक को गोदामों मेे भण्डारित कर भविष्य में द्वितीय स्तर की गुणमूल्यवर्धन कर विक्रय कर सकेंगे।
इस योजना के तहत राजस्थान राज्य में लगभग 140 वनधन विकास केन्द्रो की स्थापना किया जाना प्रस्तावित है। जिसमें लगभग 30000 आदिवासी लाभार्थीयों को अगले 2.3 वर्ष मेें प्रशिक्षण देकर जोड़ा जायेगा ओर इन सभी वनधन विकास केन्द्रो को अपने केन्द्र पर वनउपजों के प्राथमिक गुणमूल्यवर्धन एवं संग्रहण तथा व्यवसाय करने हेतु कार्यशीलपूंजी के रूप में 10 लाख प्रति वनधन विकास केन्द्र को एनएसटीएफडीसी तथा अन्य वित्तिय संस्थाओं द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा तथा प्रशिक्षण एवं टूलकिट का खर्च जो कि लगभग 15 लाख प्रति वनधन विकास केन्द्र होगा। इसे ट्राईफेड द्वारा वहन किया जाएगा। इस योजना का निरीक्षण एवं मूल्यांकन जिला स्तर पर जिला स्तरीय कमेटी द्वारा जिला कलक्टर की अध्यक्षता में होगा। वही राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय कमेटी की ओर से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगा।

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