विश्‍व हास्य दिवस : हंसी की ‘वैक्सीन ’ और खुशियों का ‘डोज ’ जरूरी

कोरोना काल में आज सभी के मन में डर और तनाव घर कर रहा है, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों में हंसना किसी वैक्सीन से कम नहीं

By: madhulika singh

Published: 02 May 2021, 09:39 PM IST

उदयपुर. दो साल पहले की बात करें तो जिंदगी खुशहाल थी। लोग अपनी मनपसंद जगहों पर घूमने जा पा रहे थे, खा-पी रहे थे, एक-दूसरे की खुशियों और गम में भी शरीक हो रहे थे लेकिन अचानक कोरोना आया और सब अपने घरों में कैद होकर रह गए। यहां तक कि अपनों को खोना पड़ रहा, ना तो किसी की खुशियों में शामिल हो पा रहे और ना ही किसी के गम में। ऐसी भयावह तस्वीर की किसी ने भी कल्पना नहीं की थी। आज कोरोना का खौफ पहले से भी अधिक है और रोज होती मौतें दिल दहला रही हैं। लेकिन, इन कठिन परिस्थितियों का मुकाबला करना ही होगा। कहते हैं कि घने अंधेरे के बाद ही रोशनी होती है। कोरोना की वैक्सीन तो सभी को लगनी ही है लेकिन जिंदगी के इस मुश्किल दौर में हमें हंसी की वैक्सीन और खुशियों की डोज की भी जरूरत है।


हंसी के संक्रमण को बढ़ाइए

मनोचिकित्सक व इंडियन साइकेट्रिक सोसायटी की कोविड-19 ऑनलाइन मेंटल हैल्थ सर्विसेस के सदस्य डॉ. आरके शर्मा के अनुसार महामारी के इस दौर में चिंता होना स्वाभाविक है पर कुछ लोगों में यह चिंता एक मानसिक विकार का रूप ले रही है, जबकि जरूरत खुश रहने व हंसने की है। हंसी एक ऐसी क्रिया है जो कि एक से दूसरे तक आराम से पहुंच जाती है यानी की हास्य चिकित्सा हंसी के संक्रमण को बढ़ा कर शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि का एक सरल और प्रभावी उपाय है।

हास्य पद्धति की जरूरत इनके लिए -
ऑक्सीजन - हंसने से हृदय गति, खून का बहाव व श्वसन क्रिया संतुलित होती है। मांसपेशियां रिलेक्स होती है, जिससे ऑक्सीजन मात्रा में इजाफा होता है जो कि आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण है।

ब्लड प्रेशर - हंसने से सिकु ड़ी हुई धमनियां वापस चौड़ी होती है, जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है।
इम्युनिटी - हास्य शैली से हमारे रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं की क्षमता में भी इजाफ ा होता है, जिससे हमारी इम्युनिटी में वृद्धि होती है।


मानसिक तौर पर हास्य चिकित्सा के अनेक फायदे हैं

- हास्य शैली के माध्यम से डर और चिंता के भाव को उस क्षण में रोका जा सकता है और अपने आप को नियंत्रित रूप से आशावादी बनाया जा सकता है।
- यह बीटा एंडोर्फि न के स्तर को बढ़ाकर फ ील गुड का एहसास दिलाता है।

- हास्य चिकित्सा के लगातार प्रयोग से कोर्टिसोल जो की स्ट्रेस हॉर्मोन कहलाता है, उसे कम किया जा सकता है और यह एंग्जायटी व डिप्रेशन में सहायक इलाज के रूप में कारगर है।
- हंसने और हंसाने से डोपामिनर्जिक रिवॉर्ड सिस्टम सक्रिय होता है, जो कि मन में एक खुशनुमा स्थिति पैदा करता है।

madhulika singh Reporting
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