मच्छर भगाने के लिए पर्याप्त नहीं निगम के पास फॉग

Gopal Bajpai

Publish: Apr, 17 2018 11:54:23 AM (IST) | Updated: Apr, 17 2018 12:29:26 PM (IST)

Ujjain, Madhya Pradesh, India
मच्छर भगाने के लिए पर्याप्त नहीं निगम के पास फॉग

शहर में पर्याप्त फॉगिंग नहीं होने से मच्छरों के डंक झेल रहे लोग

उज्जैन. गर्मी का मौसम और इस पर मच्छरों के डंक ने शहरवासियों की चेन की नींद छीन ली है। मच्छरों से निपटने के लिए नगर निगम के पास ६ जोन पर पांच फॉगिंग मशीन हैं और इनमें भी दो बंद पड़ी हैं। नतीजतन जिस वार्ड में एक बार फॉगिंग हो गई, दोबारा उसका नंबर महीनों बाद आ रहा है। कई वार्ड तो ऐसे भी हैं, जिनमें तीन-चार महीने से फॉगिंग नहीं हुई है।

शहर मच्छरों की समस्या से परेशान

इन दिनों शहर मच्छरों की समस्या से परेशान हैं। शाम होते ही घरों में मच्छरों का आतंक फैल जाता है। इनसे बचने के लिए शहरवासियों को निजी खर्च पर जतन करना पड़ रहे हैं लेकिन निगम की ओर से उन्हें कोई खास सहारा नहीं मिल रहा। पूरे शहर के लिए निगम के पास चालू स्थिति में महज तीन फॉगिंग मशीन हैं, जिनसे एक दिन में तीन-चार वार्डों में ही फॉगिंग हो पाती है। शेष दो मशीन लंबे समय से खराब पड़ी हैं। उन क्षेत्रों में स्थिति और भी अधिक खराब हैं, जहां नालियों की सफाई नहीं हो रही है। इससे बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है। मच्छरों की समस्या बढऩे के बाद अब निगम जल्द खराब मशीनों को दुरस्त कराने का दावा कर रहा है।

गलियों तक पहुंच ही नहीं पाती मशीन

वर्तमान में ६ जोन के बीच तीन फॉगिंग मशीनें दौड़ रही हैं। एक मशीन एक वार्ड में एक-डेढ़ घंटे फॉगिंग करती है। एक वार्ड की औसत जनसंख्या १० हजार है। इतने समय में मशीन वार्ड अंतर्गत कॉलोनियों के प्रमुख मार्गों पर ही चल पाती है। गलियों तक तो धुआं पहुंच ही नहीं पाता।

पार्षदों को नहीं पता, कब होगी फॉगिंग
व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों का दावा है कि फॉगिंग के लिए पहले से शेड्यूल तैयार कर रखा है। किस दिन किस वार्ड में मशीन चलेगी, इसका चार्ट तैयार है। इसी चार्ट के आधार पर अगले दिन मलेरिया विभाग भी उक्त क्षेत्र में छिड़काव करता है। इन दावों से अलग कई पार्षदों का कहना है कि उन्हें फॉगिंग का शेड्यूल नहीं दिया गया है। उनके वार्ड में मशीन कब आएगी और कब नहीं आएगी इसकी उन्हें जानकारी नही है।

घरों में खर्च, बाजार में बढ़ी मांग
मच्छर बढऩे से लोगों का खर्च बढ़ गया है। तीन-चार कमरों के घर वाले औसत परिवार को हर कमरे मॉस्कीटो क्वाइल या अन्य पर २००-४०० रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहे हैं। फ्रीगंज निवासी जयश्री भटनागर ने बताया पिछले महीने टीफा मशीन आई थी। शाम होते ही मच्छर बढ़ जाते हैं। मॉस्कीटो नेट, क्वाइल आदि के लिए औसत हर महीने ३०० रुपए अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। मेडिकल संचालक जिनेंद्रकुमार जैन ने बताया, कुछ दिनों में मच्छरों को मारने संबंधित क्रीम-दवा आदि की मांग में लगभग ४० फीसदी बढ़ोतरी हो गई है।

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