75 लाख के एलईडी टेंडर में गड़बड़ी, बुरे फंसे अधिकारी

75 लाख के एलईडी टेंडर में गड़बड़ी, बुरे फंसे अधिकारी

Gopal Swaroop Bajpai | Publish: Sep, 08 2018 07:07:19 PM (IST) Ujjain, Madhya Pradesh, India

निगम के प्रकाश विभाग में घालमेल: अपात्र कंपनी की निविदा खोलने में फंसे अधिकारी

उज्जैन. 75 लाख रुपए के एलइडी खरीदी टेंडर में आखिरकार निगमायुक्त ने कार्रवाई कर ही दी। 15 दिन से लंबित प्रकरण में इइ रामबाबू शर्मा की वेतनवृद्धि रोकने के साथ कम्प्यूटर ऑपरेटर संदीप शर्मा (विनियमित कर्मचारी) को निलंबित कर जोन १ में अटैच कर दिया। टेंडर में एक अपात्र कंपनी की भी फाइनेंशियल बीड खोलने में फंसे इन अधिकारियों को नोटिस जारी हुए थे। जवाब से संतुष्ट ना होकर निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने ये कार्रवाई की।

पार्षदों के प्रस्ताव पर शहर के स्ट्रीट पोल के लिए खरीदी जाने वाली एलइडी फिक्चर्स के टेंडर में जिम्मेदारों ने लापरवाही की। इंदौर की एक कंपनी के दस्तावेज कम होने पर इसे अपात्र माना गया, लेकिन फाइनेंशियल बीड खोलने के दौरान इसके भी रेट खोल दिए। रेट न्यूनतम होने से जब टेंडर स्वीकृति की बारी आई तो अधिकारियों को गलती का एहसास हुआ। मामले में हुई शिकायत के बाद निगमायुक्त ने संबंधितों को कारण बताओ नोटिस दिए थे। साथ ही टेंडर निरस्त कर पुन: निविदा आमंत्रित करने के निर्देश दिए थे। निगम के प्रकाश विभाग में चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह की अनियमितता की जाती है। पहले भी एेसे कई मामले सामने आए हैं, जिससे निगम की छवि खराब होती है।

ठेकेदारों में रिंग, प्रतिस्पर्धा का अभाव

  • निगम प्रकाश विभाग के करोड़ों रुपए के टेंडर चुनिंदा फर्मों से ही कराए जाते हैं। इसके लिए निविदा शर्तों में जटिल शर्तें जोड़ दी जाती है।
  • अधिकारियों की साठगांठ होने से ये ही लोग टेंडर में पात्र हो पाते हैं। बस इसी खेल में ऊंचे रेट डलवाकर शासन को चूना लगाया जाता है।
  • एलइडी प्रकरण में इंदौर की एक कंपनी ने रेट में प्रतिस्पर्धा करना चाहा तो कागजों में उलझाकर उसे अपात्र कर दिया।
  • जबकि दो स्थानीय फर्म के रेट आपसी रिंग होने से अधिक रहे। गलती से तीसरे के रेट खुल गए, वरना अधिकारी अपने मंसूबों में कामयाब होकर चहेते को ही टेंडर देते।
  • प्रकाश विभाग के टेंडरों की जांच की जाए तो प्रचलित या वाजिब दर से अधिक पर काम कराने के दर्जनों मामलें हैं। इसी की आड़ में बंदरबांट होती है।

एेसी अनियमिता के कई किस्से.......
25 हजार का ट्यूबलर पोल व एलइडी, टेंडर 19 हजार का
निगम के प्रकाश विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। इसकी बानगी फ्रीगंज ब्रिज के नीचे पीडब्ल्यूडी कार्यालय के पास बाबू जगजीवनराम उद्यान में देखने को मिली। यहां के लिए ऑफलाइन निविदा निकाली, जिसमें 19 हजार रुपए की लागत में ट्यूबलर पोल व 90 वॉट की 4 एलइडी लगाने का काम है। इसमें कोई प्रतिस्पर्धा ना हो इसके लिए निविदा कम प्रसारित की जाती है। इस काम की निविदा 96 हजार रुपए में स्वीकृत हुई। एलइडी काम 12 प्रतिशत एबोव में स्वीकृत। काम प्रकाश शर्मा ठेकेदार ने लिया, जो विभाग के कम्प्यूटर ऑपरेटर संदीप शर्मा के भाई हैं। ट्यूबलर पोल की बाजार कीमत महज २५ हजार रुपए है। चंद लोगों के बीच निविदा प्रक्रिया होने से प्रतिस्पर्धा नहीं होती। चहेतों से काम कराकर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई जाती है। एेसे पोल को मिनी हाइ मास्क का नाम देकर कई वार्डों में लगाए हैं।

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