video : गुप्त नवरात्रि में आप भी करें उज्जैन की दो देवियों की महाआरती के दर्शन

मां हरसिद्धि का दरबार अपने आपमें ही अनूठा है। ये देवी यहां के सम्राट राजा विक्रमादित्य की आराध्या देवी रही हैं।

उज्जैन. महाकाल की नगरी में शक्तिपीठ के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध मां हरसिद्धि का दरबार अपने आपमें ही अनूठा है। बताया जाता है कि ये देवी यहां के सम्राट राजा विक्रमादित्य की आराध्या देवी रही हैं। अवंतिका क्षेत्र के महाकाल वन में स्थापित इस मंदिर में दो दीपमालिकाएं भी हैं, जो न सिर्फ नवरात्रि बल्कि 365 दिन जगमगाती रहती हैं। इसके लिए भक्तों को एडवांस बुकिंग कराना पड़ती है।

कहां है यह मंदिर
उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर मंदिर, रूद्रसागर और विक्रमादित्य सिंहासन बत्तीसी के समीप स्थित मां हरसिद्धि का यह दरबार भक्तों की भीड़ से सदैव भरा रहता है। प्रतिदिन यहां सुबह-शाम भव्य आरती होती है। माता के भक्तों का उल्लास नवरात्रि में देखते ही बनता है।

जगमगाती हैं वर्षभर दीपमालिकाएं
हरसिद्धि मंदिर प्रबंध समिति के प्रबंधक अवधेश जोशी ने बताया कि माता के दरबार में लगे दीप स्तंभ किसी के विवाह की वर्षगांठ, जन्म दिन, माता-पिता की पुण्य तिथि, भगवान से मांगी गई मुराद पूरी होने पर या बच्चों के जन्म दिन पर भक्तों द्वारा प्रज्जवलित करवाई जाती हैं। इसके लिए पहले से बुकिंग कराई जाती है।

कितना खर्च होता है दीप मालिका प्रज्जवलित कराने में
माता के दरबार में लगी दोनों दीपमालिकाओं को प्रज्जवलित करवाए जाने मेंं लगभग 8,500 रुपए का खर्च आता है, जबकि नवरात्रि के दिनों में यह खर्च 2100 रुपए ही आता है। प्रबंधक अवधेश जोशी ने बताया कि दोनों दीप स्तंभों में 1000 दीप हैं। इनमें 4 डिब्बा तेल लगता है। 2100 रुपए दीप लगाने के लिए चढऩे वालों को बतौर पारिश्रमिक दिया जाता है। 500 रुपए की रसीद मंदिर कार्यालय द्वारा काटी जाती है तथा 1200 रुपए माता के शृंगार आदि पर खर्च होते हैं। नवरात्रि के दौरान यह राशि इसलिए कम हो जाती है, क्योंकि इन दिनों में दीप प्रज्जवलित कराने वालों की संख्या अधिक हो जाती है, इसलिए राशि कम ली जाती है।

सती माता की कोहनी गिरी थी यहां
पुराणों के अनुसार जहां-जहां सती माता के अंग गिरे थे, वहां-वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई है। इसी क्रम में हरसिद्धि मंदिर में सती माता की कोहनी गिरी थी, इसीलिए यह 52 शक्तिपीठों गिना जाता है।

तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए आते हैं साधक
पुजारी के अनुसार यहां तंत्र-मंत्र साधनाएं भी होती हैं। आए दिन साधक यहां आराधना करते नजर आते हैं। नवरात्रि के दिनों में यहां विशेष सिद्धि प्राप्त होती है।

patrika

नगर के बीचोबीच मां चामुंडा का दरबार
शहर की पहचान बना एक चौराहा चामुंडा के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर अतिप्राचीन है। शहर आने वाले हर व्यक्ति यहां बिना हाथ जोड़े नहीं रहता। वाहन के अंदर बैठे-बैठे ही माता के दर्शन हो जाते हैं। ढोल-नगाड़ों के साथ यहां भव्य आरती होती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान यहां भी साधक अपनी साधनाएं करते हैं।

Lalit Saxena Photographer
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