बंद का साया : अधिकांश स्कूल-कॉलेजों के साथ पेट्रोल पंप और प्रतिष्ठानों पर

बंद का साया : अधिकांश स्कूल-कॉलेजों के साथ पेट्रोल पंप और प्रतिष्ठानों पर

Lalit Saxena | Publish: Sep, 05 2018 07:19:29 PM (IST) | Updated: Sep, 05 2018 07:27:58 PM (IST) Ujjain, Madhya Pradesh, India

एट्रोसिटी एक्ट और आरक्षण के विरोध में सवर्ण समाज की ओर से गुरुवार को शहर बंद का आह्वान किया गया है।

उज्जैन. एट्रोसिटी एक्ट और आरक्षण के विरोध में सवर्ण समाज की ओर से गुरुवार को शहर बंद का आह्वान किया गया है। सपाक्स, करणी सेना सहित अन्य संगठनों ने इस बंद को समर्थन दिया है। इसके चलते शहर के निजी स्कूल, कॉलेजों ने अवकाश की सूचना अभिभावकों को भेज दी है। वहीं मंडी में नीलामी अवकाश घोषित हो गया है। साथ ही व्यापारिक संगठनों ने भी बंद को समर्थन दिया है।

जानिए किन-किन स्कूलों में रहेगा बंद का असर
सेंट थॉमस, सेंट मेरी, सेंटपॉल, क्रिस्ट ज्योति, निर्मला कॉन्वेंट सहित शहर के अन्य निजी स्कूल व कॉलेजों में अवकाश रहेगा। इस तरह के मैसेज अभिभावकों के मोबाइलों पर स्कूल संस्थाओं द्वारा भेजे गए हैं।

सुबह 10 बजे निकालेंगे वाहन रैली
शहर बंद कराने के लिए सपाक्स समाज की ओर से सुबह 10 बजे टॉवर चौक से वाहन रैली निकाली जाएगी। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा जाएगा। बंद के दौरान अप्रिय स्थित से निपटने के लिए पुलिस ने भी तैयारी कर ली है। उज्जैन जिले के साथ ही आगर और शाजापुर जिले के सवर्ण समाज और संगठनों ने भी बंद का आह्वान किया है।

इसलिए कर रहे विरोध
अनुसूचित जाति और जनजाति के कठोर प्रावधानों (मसलन मात्र एक शिकायत पर किसी भी व्यक्ति को दोषी मान कर गिरफ्तार करना, उसकी जमानत ना होना आदि) के विरोध में और 70 वर्षों से चली आ रही जातिगत आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग को लेकर 6 सितंबर को सुबह 10 से शाम 4.30 बजे तक भारत बंद का आह्वान किया गया है।

सोशल मीडिया पर इस तरह के मैसेज
सोशल मीडिया पर इस तरह की अपील पोस्ट डाली जा रही है। जिसमें लिखा गया है कि बंद के दौरान न सड़क पर हुड़दंग करना है न ही जबरदस्ती व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद कराने हैं, ना सड़कें जाम करनी हैं। मात्र इतना करना है कि 10 से 4 बजे तक अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकानें, डिस्पेंसरी, स्कूल बंद रखने हैं। न तो ऑफिस जाना है, न बच्चों को स्कूल भेजना है। न कोई सामान खरीदना है, न पेट्रोल पंप से पेट्रोल लेना है। इस स्वैच्छिक बंद से सरकार में बैठे कुटिल नीतिकर्ताओं, नेताओं, उनके उपनेताओं को पता चलना चाहिए कि सामान्य वर्ग इस तरह के भेदभाव पूर्ण नीतियों को स्वीकार नहीं कर रहा और प्रतिकार करना जानता है। बिना किसी प्रकार का दंगा फसाद, बिना तोडफ़ोड़ किए, बिना किसी प्रकार से सड़क जाम किए, बिना किसी प्रकार से जबरदस्ती प्रतिष्ठान बंद कराए हुए अपना प्रतिकार बौद्धिक ढंग से दिखाना जानता है, क्योंकि उसे इस देश और समाज से प्रेम है। सामान्य वर्ग, समाज में अराजकता नहीं चाहता, सड़कों पर जाम नहीं चाहता, दुकानों में तोडफ़ोड़ नहीं चाहता। इस बंद को शांतिपूर्ण रखना है।

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