बनाना, जरा सोच-समझकर खाना, कहीं बिगड़ न जाए सेहत

हम सभी केले पसंद करते हैं। बाजार में इन दिनों 30 से 40 रुपए किलो या दर्जन के हिसाब से केले बिक रहे हैं। लेकिन इन्हें खाने से पहले चौकन्ने रहें, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से नहीं, बल्कि कार्बाइड से पकाए जा रहे हैं,

By: Lalit Saxena

Published: 07 Sep 2016, 01:18 PM IST

उज्जैन. ऐसा कौन है, जिसे केले खाना पसंद न हों। हम सभी केले पसंद करते हैं। बाजार में इन दिनों 30 से 40 रुपए किलो या दर्जन के हिसाब से केले बिक रहे हैं। लेकिन इन्हें खाने से पहले चौकन्ने रहें, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से नहीं, बल्कि कार्बाइड से पकाए जा रहे हैं, जिससे हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत असर हो रहा है। 

बाजार में बिक रहे केले हमें अस्पताल तक पहुंचा सकते हैं। ये केले कार्बाइड पानी में भिगाकर पकाए जा रहे हैं, इस प्रकार के केले खाने से 100त्न कैंसर या पेट का विकार हो सकता है, इसलिए ऐसे केले ना खाएं। 

कैसे पहचानेंगे कार्बाइड वाले केले
एक्सपर्ट बता रहे हैं कि यदि केले को प्राकृतिक तरीके से पकाया है तो उसका डंठल काला पड़ जाता है और रंग गर्द पीला हो जाता है साथ ही थोड़े बहुत काले दाग रहते हैं, परंतु यदि केले को कार्बाइड से पकाया गया है तो उसका डंठल हरा होगा और केले का रंग लेमन यलो अर्थात नींबुई पीला होगा। इतना ही नहीं ऐसे केले का रंग एकदम साफ  पीला होता है, उसमें कोई दाग धब्बे नहीं होते।

क्या है कार्बाइड
कार्बाइड को यदि पानी में मिलाएं तो उसमें से ऊष्मा (हीट) निकलती है और अस्यतेल एन गैस का निर्माण होता है, जिससे गांव देहातों में गैस कटिंग इत्यादि का काम लिया जाता है। अर्थात इसमें इतनी कॅलॉरिफिकवेल्यू होती है कि उससे एल पी जी गैस को भी प्रतिस्थापित किया जा सकता है। जब केले के गुच्छे को ऐसे केमिकल पानी में डुबोया जाता है तो उष्णता  केलों में उतरती है और वे पक जाते हैं। 

ये हो सकती हैं बीमारियां
पाचन तंत्र में खराबी आना, आखों में जलन, छाती में तकलीफ, जी मिचलाना, पेट दुखना, गले में जलन, अल्सर, ट्यूमर भी हो सकता है। इस प्रकार के केलों का उपयोग नहीं किया जाए, इसी तरीके से आमों को भी पकाया जा रहा है।
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