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चैत्र नवरात्रि: अष्टमी पर सम्राट विक्रमादित्य ने शुरू की थी परंपरा

चैत्र नवरात्रि में महाअष्टमी के दिन सम्राट विक्रमादित्य ने नगरवासियों की रक्षा के लिए नगर पूजा का क्रम आरंभ किया था। तभी से यह परंपरा आज भी निभाई जा रही है।

उज्जैन

Published: April 09, 2022 02:55:33 pm

उज्जैन. चैत्र नवरात्रि में महाअष्टमी के दिन सम्राट विक्रमादित्य ने नगरवासियों की रक्षा के लिए नगर पूजा का क्रम आरंभ किया था। तभी से यह परंपरा आज भी निभाई जा रही है। शारदीय नवरात्रि में कलेक्टर और चैत्र नवरात्रि में अखाड़ा के द्वारा यह परंपरा निभाई जाती है।

chaitra navratri durga puja
चैत्र नवरात्रि में महाअष्टमी के दिन सम्राट विक्रमादित्य ने नगरवासियों की रक्षा के लिए नगर पूजा का क्रम आरंभ किया था। तभी से यह परंपरा आज भी निभाई जा रही है।

नवरात्रि में अष्टमी के पावन अवसर पर नगर के सभी देवी-देवताओं का पूजन करने की परंपरा रही है। इस परंपरा का निर्वाह इस वर्ष बड़े ही धूमधाम के साथ हुआ। निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी महाराज ने सबसे पहले चौबीस खंभा माता मंदिर में माताओं को मदिरा की धार चढ़ाई और महाआरती हुई। इसके बाद नगर पूजा के लिए भक्तों का जत्था 26 किमी की पैदल यात्रा के लिए रवाना हुआ।

साधु-संतों और नगरवासियों ने की पूजा
चैत्र नवरात्रि के अवसर पर शनिवार सुबह नगर पूजा का आयोजन हुआ। अभा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज के सान्निध्य में साधु-संतों और नगरवासियों ने नगर पूजा के लिए यात्रा शुरू की। इस यात्रा के दौरान प्राचीन देवी, भैरव व हनुमानजी के मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना की गई। देवी देवताओं को उनके अनुसार पूजा सामग्री चुनरी आदि भेंट की गई। ढोल-ढमाकों के साथ नगर पूजा में अलग-अलग मंदिरों में महाआरती के आयोजन हुए।

नवरात्रि पर्व पर प्रभु प्रेमी संघ ने किया कन्यापूजन
प्रभु प्रेमी संघ द्वारा नवरात्रि के पावन पर्व पर कन्या पूजन का आयोजन किया गया। संस्था अध्यक्ष अजय पांडे ने बताया कि स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज की संस्था प्रभु प्रेमी संघ द्वारा सांवेर रोड स्थित सेवा भारती पहुंचकर कन्या-भोज एवं पूजन कर आवश्यक सामग्री का वितरण किया गया। इस अवसर पर वुमंस ग्रुप की पूरी टीम उपस्थित थी।

निरंजनी अखाड़े की ओर से पूजा
चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी शनिवार को मनाई गई। लोगों ने अपने-अपने घरों में भी कुलदेवी का पूजन किया। प्राप्त जानकारी अनुसार चैत्र की अष्टमी पर जो पूजा होती है, वह शासकीय नहीं, बल्कि निरंजनी अखाड़े की ओर से होती है। शासकीय पूजा शारदीय नवरात्रि में की जाती है, जिसमें कलेक्टर आकर देवियों को मदिरा का भोग अर्पण करते हैं। यह पूजा निरंजनी अखाड़ा द्वारा अतिरिक्त रूप से शुरू की गई थी। इसे कोरोना काल से मुक्ति के लिए शुरू किया था, तब संकट काल से निपटने के लिए जनता के आह्वान पर कलेक्टर द्वारा भी इस पूजा में शामिल होकर नगर पूजा की गई थी।

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