दिन में बने सभी प्रमाण-पत्र, आधी रात को दिया आयुष्मान कार्ड, बच गई गरीब बुजुर्ग की जान

कोमा में पहुंचे गरीब की जिंदगी बचाने कलेक्टर ने आधी रात को जारी किया आयुष्मान कार्ड

By: Manish Gite

Published: 14 Jul 2020, 01:10 PM IST

 

उज्जैन। यदि सभी मिलकर काम करें तो कैसे काम आसान हो जाते हैं, यह उदाहरण उज्जैन जिले में देखने को मिला। कोमा में पहुंच चुके एक बुजुर्ग गरीब की मदद के लिए कुछ ही घंटों में जाति और आय प्रमाण पत्र भी बन गए और आधी रात को आयुष्मान कार्ड भी जारी हो गया।

समाजसेवी से लेकर केंद्रीय मंत्री तक समन्वय का एक उदाहरण उज्जैन जिले में एक गरीब बुजुर्ग की जान बचाने के दौरान देखने को मिला है। इसके लिए नेता, अफसर और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर जो काम किया, उसे यह परिवार शायद ही कभी भुला पाएगा। स्थानीय समाजसेवी से शुरू हुआ यह प्रयास केंद्रीय मंत्री तक पहुंचा, उसके बाद रात डेढ़ बजे कलेक्टर ने आयुष्मान कार्ड जारी किया।

 

मामला उज्जैन जिले के नागदा का है, जहां बुजुर्ग रमेश सिन्हा जूते-चप्पल सुधारने का काम करते हैं। यह बुजुर्ग 25 जून को अचानक गश खाकर गिर गए थे। लोगों ने उन्हें उठाकर अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के लिए 30 हजार रुपए की जरूरत थी। परिवार के पास इतना सामर्थ्य नहीं था, इसलिए वे बगैर इलाज कराए ही घर लेकर आ गए। एक जुलाई को एक समाजसेवी ने भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष साधना जैन को बुजुर्ग के कोमा में होने की बात बताई। इस पर जैन ने केंद्रीय दिव्यांग जन सलाहकार बोर्ड के सदस्य को इस बारे में अवगत कराया। मारू ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत को बुजुर्ग की स्थिति बताई। केंद्रीय मंत्री के सक्रिय होने पर बुजुर्ग को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया।

 

एक दिन में तैयार हो गए डाक्यूमेंट्स
इस परिवार को आर्थिक सहायता के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत थी, लेकिन एक ही दिन में जाति और आय प्रमाण पत्र बनना संभव नहीं था। इसके बावजूद एसडीएम पुरुषोत्तम कुमार और तहसीलदार विनोद शर्मा को इस बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद दोनों ने कुछ ही घंटों में जाति और आय प्रमाण पत्र तैयार कर दिया। दस्तावेज बनते ही यह दिल्ली भेज दिए। यहां केंद्रीय मंत्री गहलोत ने 1.50 लाख रुपए स्वीकृत कर सीएचएल हास्पिटल को हस्तांरित भी करवा दिए गए। 6 जुलाई को डाक्टरों को पता चला कि बुजुर्ग रमेश को हृद में भी तकलीफ है। ऐसी स्थिति में सर्जरी का खर्च ही साढ़े चार लाख रुपए है। ऐसी स्थिति में मुश्किलें और बढ़ गई थीं। इसके बाद आयुष्मान भारत योजना का ख्याल आया, लेकिन बुजुर्ग के पास कार्ड नहीं था। इस पर कलेक्टर आशीष सिंह से संपर्क साधा गया। रात डेढ़ बजे वाट्सअप पर ही कलेक्टर ने आयुष्मान कार्ड बनाकर भिजवा दिया। नतीजा रविवार सुबह 11 बजे बुजुर्ग रमेश सिन्हा का आपरेशन सफलता रहा। अब बुजुर्ग का जीवन खतरे से बाहर है।

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