कच्चे हो या पक्के, सभी के अतिक्रमण टूटेंगे

एक दिन का समय उसके बाद सीधी होगी कार्रवाई

By: Mukesh Malavat

Published: 10 Apr 2019, 08:02 AM IST

उन्हेल. कलेक्टर के निर्देश पर उज्जैन-जावरा रोड से अतिक्रमण हटाने के लिए मिले निर्देश के बाद एमपीआरटीसी, राजस्व विभाग, टॉप वर्थ कंपनी एक्शन में आई थी, तब संयुक्त कार्रवाई के तहत राजस्व विभाग के माध्यम से करीब 60 कच्चे-पक्के अतिक्रमणकर्ताओं को नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सोमवार की शाम को ताबड़तोड़ नोटिस दिए थे। सभी अतिक्रमणकर्ताओं को पुलिस थाना परिसर मे बैठक के लिए बुलाया था।
मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक को नागदा एसडीएम आरपी वर्मा, नागदा सीएसपी मनोज रत्नाकर, टॉप वर्थ कंपनी के मैनेजर रोनक पाटनी, टीआइ विपिन बाथम की मौजूदगी में बैठक हुई। बैठक में अतिक्रमणकर्ताओं ने प्रशासन से 2 दिन का समय मांगा पर एसडीएम ने मंगलवार व बुधवार का दिन दिया है। मंगलवार दोपहर सेे कार्रवाई किये जाने के संकेत बैठक में दिए। बैठक के उपस्थित मौजूद लोगों ने एक स्वर में यह कहा कि कच्चे अतिक्रमण तोड़ दिये जाते है और पक्के निर्माण पर कार्रवाई नहीं की जाती है। तब एसडीएम ने कहा कि कच्चे हो या पक्के सभी अतिक्रमण प्रशासन सख्ती से तोड़ेगा, जिसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा। अतिक्रमण तोडऩे की कार्रवाई उज्जैन रोड के नाले से होगी और जिन जगहों पर चिह्नित किया है, वह सब अतिक्रमण टूटेगा। बैठक के बाद शाम को ही कुछ दुकानदारों ने स्वयं अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिए।
आवेदन नहीं तो पुलिस बल नहीं : बैठक समाप्त होने के बाद नागदा सीएसपी मनोज रत्नाकर ने टॉप वर्थ कंपनी के मैनेजर रोनक पाटनी को स्पष्ट शब्दों मे कह दिया कि आप लोग कार्रवाई कर रहे है, पर पुलिस प्रशासन से बल की मांग नहीं कर रहे। एमपीआरटीसी के अधिकारी के साथ बैठक समाप्त होने के बाद देहात पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर बुधवार को पुलिस बल की मांग करें। हम आपको उसके बाद पुलिस बल उपलब्ध कराएंगे। यह कार्रवाई तो अपको नोटिस वितरण के बाद तत्काल कर देना चाहिए थी। तब जाकर शाम को एमपीआरटीसी व टॉप वर्थ कंपनी ने पुलिस बल की मांग की।
दस्तावेज वाले मकान मालिक खोजो
एसडीएम आरपी वर्मा ने राजस्व निरीक्षक आरएन मचाार व कस्बा पटवारी मनोहर पाटीदार को बैठक में निर्देश दिया कि नाले से लाल घाटी तक जितने भी पक्के मकान बने है और अतिक्रमण की श्रेणी में आ रहे हैं उनके दस्तावेज खंगाले जाएं। जिनके पास मात्र रजिस्ट्री है उनकी सूची अलग से बनाई जाएं। संपूर्ण जानकारी दोपहर बाद मेरे समक्ष पेश करें।
एमपीआरटीसी प्रबंधक बैठक में अनुपस्थित
अतिक्रमण की कार्रवाई के मायने तय करना की जवाबदारी एमपीआरटीसी की है। उसके प्रबंधक दीपक शर्मा ही बैठक से नदारत रहे, जिसके कारण बैठक में कई मुददों के जवाब प्रशासन लोगों को नहीं दे पाएं। मौजूदा लोग टॉप वर्थ कंपनी के मैनेजर रोनक पाटनी को ही एमपीआरटीसी का अधिकारी समझ रहे थे और वह बार-बार यह कहते नजर आए कि मैं टोल कंपनी से हूं। बाकी विषयों की जानकारी एमपीआरटीसी के अधिकारी देंगे। बैठक समाप्त होने पर भी एमपीआरटीसी का जवाबदार अधिकारी नहीं पहुंचा। स्वयं एसडीएम को ही फोन लगाकर बात करना पड़ी। गैर हाजिरी पर उन्होंने नाराजगी भी जाहिर की।

Mukesh Malavat
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned