शोधार्थियों से मांगे रुपए,मच गई विक्रम विश्वविद्यालय में हलचल

विक्रम विश्वविद्यालय शोधार्थियों से फेलोशिप भुगतान के रुपए मांगने का मसला सामने आया हैं। लिखित शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय हलचल मच गई। अधिकारी बोले,कुलपति के आने पर कार्रवाई होगी।

By: Shailesh Vyas

Published: 16 Nov 2019, 07:06 AM IST

उज्जैन.विक्रम विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं के शोधार्थियों से अनाधिकृत तौर पर विवि में कार्य करने वाले व्यक्ति द्वारा फेलोशिप भुगतान के एवज में रुपए मांगे गए हैं। शोधार्थियों की इस लिखित शिकायत के बाद विश्वविद्यालय में हलचल मच गई। कुलपति अवकाश पर हैं और प्रभारी कुलपति, कुलसचिव इस संबंध में कुछ भी साफ कहने से बच रहे हैं।विक्रम विश्वविद्यालय की विभिन्न अध्ययनशालाओं के राजीव गांधी राष्ट्रीय फेलोशिप (आरजीएनएफ) और जूनियर रिसर्चफेलोशिप (जेआरएफ) के करीब १५० शोधार्थी हैं। इनमें से कुछ ने विवि प्रशासन को लिखित में शिकायत कर बताया कि उनकी मासिक फेलोशिप के भुगतान के लिए विवि में अनाधिकृत तौर पर काम कर रहे एक व्यक्ति द्वारा 5000-5000 रु. की मांग की जा रही है। राशि से इनकार पर कहा जा रहा है कि फेलोशिप यूजीसी पोर्टल ब्लाक और विवि की वेबसाइट को हैक कर देंगे तो सारा काम बिगड़ जाएगा।
शिकायत के बाद से मिल रही है धमकी
शोधार्थियों द्वारा रुपए मांगने के मामले की शिकायत किए जाने के बाद एक ओर आवेदन विवि प्रशासन को दिया है। इसमें बताया कि रुपए मांगने की शिकायत के बाद से संबंधित व्यक्ति के परिजन द्वारा शिकायत पर आपत्ति लेकर धमकी भरे फोन किए जा रहे हैं। साथ ही शिकायत वापस नहीं लेने के गंभीर परिणाम की चेतावनी दी है। शोधार्थियों का कहना है कि सभी शोधार्थी अन्य जिलों के हैं। उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए संबंधित व्यक्ति और विवि प्रशासन जिम्मेदार होगा।

यह है मामला

यूजीसी द्वारा विभिन्न विषयों में शोध करने वाले शोधार्थी को तय मापदंड और अहर्ताएं पूर्ण करने पर ३५ हजार रु प्रतिमाह की फेलोशिप प्रदान की जाती है। यूजीसी ने इसके लिए विश्वविद्यालय को नोडल संस्थान बना रखा है। नोडल संस्थान के चेकर-मेकर द्वारा प्रतिमाह शोधार्थी के आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद यूजीसी को यूजीसी पोर्टल प्रेषित किया जाता है। यूजीसी की समिति से स्वीकृति के बाद शोधार्थी को ओपीटी दिया जाता है। इसके माध्यम से निर्धारित बैंक से शोधार्थी के खाते में फेलोशिप राशि जमा हो जाती है। शोधार्थियों का कहना है कि इस कार्य के लिए विवि की विकास शाखा में अनाधिकृत तौर पर मेकर का कार्य करने वाले व्यक्ति सभी को राशि बांटने का हवाला देकर राशि फेलोशिप में से हिस्सा मांगा जाता है।
उजागर हो गई अनियमितता
शोधार्थियों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद कुलसचिव डीके बग्गा ने फेलोशिप नोडल अधिकारी विष्णु सक्सेना को तलब किया गया। नोडल अधिकारी सक्सेना ने रुपए की मांग करने के संबंध में शोधार्थियों की आेर से दिए गए नाम पर अनभिज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि वे नहीं जानते हैं। कुलपति-कुलसचिव ने जांच करने का आश्वासन दिया। शोधार्थी जाने वाले थे कि इस बीच नोडल अधिकारी का फोन बजा, इस पर एक शोधार्थी की नजर पड़ गई। फोन की स्क्रीन पर रुपए की मांग करने व्यक्ति का नाम था। तभी एक शोधार्थी ने नोडल अधिकारी सक्सेना के हाथ से फोन लेकर कुलसचिव को दिया और कहा कि देखें जिसे यह नहीं जानते, उनका फोन इनके पास आया है। यह देख सभी भौंचक्के रह गए।
कुलपति बाहर हैं उनके आने पर अगली कार्रवाई
कुलपति बीके शर्मा शहर से बाहर हैं। मामले में प्रभारी कुलपति एचपी सिंह का कहना है कि कुलपति नहीं है। आने पर उन्हें प्रकरण से अवगत करा दिया जाएगा। कुलसचिव डीके बग्गा ने कहा कि मामले में दो शिकायतें मिली हैं। कुलपति के आने पर वैधानिक कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।

Shailesh Vyas Desk
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