scriptEqual treatment of devotees in the incineration of Mahakal bhasmarti. | महाकाल की भस्मारती में श्रृद्धालुओं के साथ गैर बराबरी का व्यवहार, गरीब भक्त बेबस | Patrika News

महाकाल की भस्मारती में श्रृद्धालुओं के साथ गैर बराबरी का व्यवहार, गरीब भक्त बेबस

भस्मारती में 1850 श्रृद्धालुओं को दे सकते हैं अनुमति, मंदिर प्रशासन महज 300 भक्तों को दे रहा नि:शुल्क प्रवेश, मंदिर समिति नि:शुल्क प्रवेश की जगह भक्तों से प्रोटोकाल दर्शन के नाम पर 200 रुपए की वसूली रही

उज्जैन

Published: March 21, 2022 10:10:49 pm

उज्जैन। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति बाबा महाकाल की प्रसिद्ध भस्मारती दर्शन व्यवस्था को बेहतर प्रबंधन नहीं कर पा रही है। भस्मारती दर्शन में १८५० से ज्यादा श्रद्धालुओं को बैठने की क्षमता है बावजूद इसके मंदिर समिति महज ३०० लोगों को ही नि: शुल्क प्रवेश दे रही है। जबकि भस्मारती में एक हजार भक्तों को नि:शुल्क प्रवेश दिया जा सकता है। मंदिर समिति नि:शुल्क प्रवेश की जगह भक्तों से प्रोटोकाल दर्शन के नाम पर २०० रुपए की वसूली कर रही है। मंदिर की इस व्यवस्था से आम श्रृद्धालु खुद का ठगा हुआ महसूस कर रहा है तो बाबा की भस्मारती में शामिल हुए बगैर ही लौटने को विवश है।

Equal treatment of devotees in the incineration of Mahakal bhasmarti.
भस्मारती में 1850 श्रृद्धालुओं को दे सकते हैं अनुमति, मंदिर प्रशासन महज 300 भक्तों को दे रहा नि:शुल्क प्रवेश, मंदिर समिति नि:शुल्क प्रवेश की जगह भक्तों से प्रोटोकाल दर्शन के नाम पर 200 रुपए की वसूली रही

महाकाल मंदिर में भस्मारती दर्शन व्यवस्था को मंदिर प्रबंध समिति द्वारा पूरी तरह से व्यावसायिकरण कर दिया गया है। मनमाने निर्णय कर भस्मारती में प्रवेश के लिए २०० रुपए शुल्क वसूला जा रहा है। यह सब व्यवस्था वीआइपी और प्रोटोकाल के नाम पर की गई है। इस व्यवस्था से आम श्रृद्धालु को दरकिनार कर दिया गया है। भस्मारती के लिए महज ३०० लोगों को नि:शुल्क अनुमति दी जा रही है। वास्तव में भस्मारती में १८५० श्रृद्धालुओं को बैठाने की क्षमता है। इस मान आधे से ज्यादा यानी एक हजार श्रृद्धालुओं को भस्मारती में नि:शुल्क प्रवेश की व्यवस्था दी जाना चाहिए। मंदिर समिति ऐसा नहीं कर भस्मारती में १२०० से अधिक लोगों से २०० रुपए शुल्क लेकर प्रवेश दे रही है। इसके कारण आम व गरीब श्रृद्धालुओं का इसका फायदा नहीं मिल रहा है। दरअसल मंदिर में बड़ी संख्या में ऐसे श्रृद्धालु पहुंचते हैं, जिन्हें भस्मारती में नि:शुल्क प्रवेश की जानकारी होती है जब वे मंदिर पहुंंचते हैंं तो उन्हें अनुमति नहीं मिलती या फिर रुपए देकर प्रवेश मिलता है। इसमें में भी प्रोटोकाल के नाम पर किसी जनप्रतिनिधि, सरकारी अफसर से सपंर्क साधना पड़ता है। इस प्रक्रिया में बाहर से आए श्रृद्धालु मायुस होकर लौटने को विवश होते है। यदि मंदिर समिति एक हजार से ज्यादा श्रृद्धालुओं को नि:शुल्क प्रवेश देने की व्यवस्था काउंटर से करता है तो कई भक्तों को इसका फायदा मिलेगा।
पांच सदस्यीय परिवार को एक हजार का फटका

महाकाल दर्शन करने सपरिवार दर्शन करने आने वाले श्रृद्धालुओं को भस्मारती शुल्क के नाम पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है। कोई पांच सदस्यीय परिवार भस्मारती करता है तो उसे एक हजार बतौर श्ुाल्क के रूप में चुकाने होते हैं। जबकि इस महंगाई के समय में श्रृद्धालुओं को होटल, यात्रा, भोजन सहित अन्य में बड़ी राशि खर्च करना होती है। वास्तव में मंदिर प्रशासन को अपने शुल्क का नॉमीनली कर श्रृद्धालुओं को सहुलियत देना चाहिए न कि दर्शन के नाम पर वसूली करना।
भक्तों के बीच खींची अमीर-गरीब की लकीर

मंदिर में दर्शन के नाम पर वसूले जा रहे शुल्क से मंदिर समिति भक्तों के बीच गैर बराबरी का व्यवहार कर रही है। भगवान के दर्शन में अमीर-गरीब की लाइन खींच दी गई है। पैसा वाला और पहुंच वाला व्यक्ति है तो उसे बाबा के सुगम दर्शन हो रहे हैं। उसे कहीं रोक-टोक नहीं है। वहीं गरीब व्यक्ति है तो दर्शन से ही दूर है। उसे न तो अनुमति मिल रही है ना ही उसे आसान दर्शन की सुविधा। जबकि मंदिर समिति का दायित्व है कि सभी भक्तों को आसान और सहज दर्शन उपलब्ध हो, पर ऐसा नहीं हो पा रहा है।
यह है भस्मारती अनुमति गणित
कुल अनुमति-1500
नि:शुल्क अनुमति-300
ऑनलाइन सशुल्क अनुमति-400
प्रोटोकाल सशुल्क अनुमति- 800

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