केंद्रों पर खरीदी बन रही किसानों के गले की फांस

निराश होकर कृषि उपज मंडी में ही बेच रहे उपज

By: Mukesh Malavat

Published: 04 Apr 2019, 08:02 AM IST

नागदा. नए उपज की बिक्री किसानों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। वेयर हाऊस पर होने वाले विक्रय की झंझट से छुटकारा पाने के लिए किसान अब कृषि उपज मंडी का रुख कर रहे हैं। बीते पांच दिनों के अवकाश के बाद बुधवार को हजारों की संख्या में किसान नई गेहूं की उपज लेकर कृषि उपज मंडी पहुंचे। किसानों के मंडी में उपज लेकर पहुंचने के चलते बुधवार को महिदपुर रोड स्थित गणेश वेयर हाऊस पर केवल 22 किसान ही उपज की ब्रिकी के लिए पहुंचे। जहां पर 882 क्विंटल गेहूं की आवक हो सकी है।
क्या है परेशानी
दरअसल इस बार कृषि उपज मंडी में खरीदी के बजाए शहर के समीपस्थ स्थित वेयर हाऊसों को खरीदी केंद्र निर्धारित किया गया है। केंद्रों पर सीमित पंजीकृत किसानों की उपज को ही खरीदा और तोला जा रहा है। परेशानी यह है, कि कई केंद्रों पर मात्र दो दर्जन से कम किसानों के पंजीयन हुए है। ऐसे में केंद्रों पर पंजीयन की जानकारी नहीं होने के कारण किसान केंद्रों पर पहुंचकर बिना उपज की विक्रय किए हुए बैरंग लौट रहे हैं। ऐसे में किसान सुविधा को देखते हुए मंडी पहुंचकर सीधे व्यापारियों को कम दामों पर उपज बेच रहे हैं।
3100 क्विंटल की आवक हुई : लंबे अवकाश के बाद कृषि उपज मंडी में बुधवार को गेहूं की बंपर आवक हुई। बुधवार को मंडी में 3100 क्विंटल गेहूं की आवक हुई। गेहूं के भाव 1630 रुपए से लेकर 1981 रुपए प्रति क्विंटल रहा। हालांकि अधिकांश गेहूं 1600 से 1700 रुपए क्विंटल तक बिका। यहां पर लगभग 178 किसानों ने उपज बेची। इसी प्रकार लगभग 50 किसानों ने 180 क्विंटल देशी चना बेचा।
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समर्थन मूल्य उपार्जन केंद्र बरखेड़ा मंाडन को मैपिंग से जोड़ा, केंद्रों पर एएनआइ भोपाल से मैसेज आने शुरू
उन्हेल. समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी की शुरूआत से लेकर मंगलवार तक उन्हेल क्षेत्र के चार उर्पाजन केंद्र खाद्य नियंत्रक केंद्र विभाग व एएनआइ की अव्यवस्था के चलते किसान परेशानी में थे। चार केंद्रों पर गांवों के नाम जोडऩे में नियंत्रक विभाग लापरवाह साबित हो रहा था, जिसके चलते उन्हेल क्षेत्र के हजारों किसान अपनी उपज किस केंद्र पर तोले इस समस्या से जूझ रहे थे, पर केंद्र से लेकर जवाबदार अधिकारी इसका संतोषप्रद जवाब नहीं दे रहे थे। जब इस मामले को लेकर पत्रिका ने उन्हेल क्षेत्र के उपार्जन केंद्र उन्हेल, पासलौद, आलेाट पिपलिया डाबी व बरखेड़ा मांडन की समस्या को लेकर खाद्य नियंत्रक विभाग के जिला अधिकारी मोहन मारू से इन समस्याओं को लेकर अवगत कराया तो नियंत्रक विभाग की मैपिंग व्यवस्था कछवा चाल से शुरू हुई, जिसके चलते किसानों की समस्या गंभीर हो गई। यह मामला जब नागदा एसडीएम आरपी वर्मा के समक्ष उठाया तो उन्होंने इसको गंभीरता से लिया। उन्हेल उर्पाजन केंद्र का औचक निरीक्षण करने के बाद सभी तीन केंद्रों की समस्या से रुबरु हुए। उन्होंने खाद्य नियंत्रक विभाग को पत्र के माध्यम से अवगत कराते हुए समय-सीमा तय कर दी। बुधवार को तीन केंद्र के साथ उपार्जन केंद्र बरखेड़ा मांडन, सरवना, जलोदिया की मैपिंग व्यवस्था दुरुस्त कर दी, साथ ही एएनआइ भोपाल से किसानों को मैसेज मिलना भी शुरू हो गए हैं।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा : समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी को लेकर जब किसानों ने अपनी पीड़ा पत्रिका के समक्ष रखी तो पत्रिका ने किसानों की समस्या को मुद्दा बनाकर अभियान छेड़ दिया। पत्रिका ने लगातार 28 मार्च, 29 व 30 मार्च तक समाचार प्रकाशित किया। समाचार प्रकाशित होने के बाद नागदा नायब तहसीलदार सलोनी पटवा ने निरीक्षण कर निर्देश दिए थे। खबर प्रकाशन पर जिला खाद्य अधिकारी ने आश्वासन दिया था, पर अमल नहीं होने पर 3 अप्रैल को फिर समाचार प्रकाशित था। खबर प्रकाशित होने के बाद नागदा एसडीएम भडक़ गए तो खाद्य नियंत्रक विभाग में हडक़ंप मच गया और बुधवार को नियंत्रक विभाग से लेकर एएनआइ की सभी व्यवस्था दुरुस्त हो गई ।

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