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प्रदेश के वित्त मंत्री देवड़ा व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव महाकाल मंदिर की इस व्यवस्था से संतुष्ठ नहीं

दोना मंत्री बोले- मंदिर में भस्मारती शुल्क व्यवस्था की समीक्षा जरूरी, भक्तों की महाकाल से दूरी ठीक नहीं, आसान और सुलभ दर्शन हो यह जरुरी

उज्जैन

Updated: March 28, 2022 10:44:37 pm

उज्जैन. महाकालेश्वर मंदिर में भस्मारती प्रवेश सहित अन्य शुल्क व्यवस्था को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव भी संतुष्ठ नहीं है। इनका मानना है कि महाकाल के दर पर भेदभाव न हो और श्रृद्धालु को आसानी से और सुलभ दर्शन हो, ऐसी व्यवस्था होना चाहिए। दोनों मंत्रियों का कहना है कि मंदिर में शुल्क व्यवस्था को लेकर कलेक्टर से चर्चा कर श्रृद्धालुओं के हित में निर्णय लिए जाएंगे। महाकाल मंदिर प्रशासन की ओर से भस्मारती दर्शन के लिए 200 रुपए शुल्क लिया जा रहा है। इस शुल्क वसूली को लेकर सब ओर से विरोध हो रहा है। दरअसल मंदिर प्रशासन ने 1850 क्षमता वाली भस्मारती में महज 300 लोगों को निशुल्क प्रवेश दे रही है। जबकि भक्त सहित अन्य लोगों की मांग है कि इस नि:शुल्क प्रवेश की संख्या एक हजार से 1200 तक की जाए। ताकि हर श्रृद्धालु को विश्व प्रसिद्ध भस्मारती प्रवेश और बाबा के दर्शन का अवसर प्राप्त हो सके।

मंदिर समिति के प्रमुख कलेक्टर से होगी बात
इस जनमुद्दे पर प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव व्यवस्था बेहतर करने की बात कह रहे हैं। इनका मानना है कि मंदिर में शुल्क व्यवस्था श्रृदलुओं की सुविधा के मान से होना चाहिए। महाकाल मंदिर में देश-विदेश से श्रृद्धालु आते हैं, ऐसे में यहां मंदिर प्रशासन को बेहतर व्यवस्था की जाना चाहिए। मंदिर में अधिकतम लोगों को प्रवेश मिले इस मान से व्यवस्थाएं होनी चाहिए। दोनों मंत्रियों का कहना है कि भस्मारती शुल्क व्यवस्था की समीक्षा के लिए वह कलेक्टर से चर्चा करेंगे और श्रृद्धालुओं के हित में इसका निराकरण किया जाएगा।

भस्मारती अनुमति नहीं मिलने से निराश लौट रहे श्रृद्धालु
महाकाल मंदिर में भस्मारती के सुशल्क होने और ऑनलाइन व्यवस्था के कारण कई भक्तों को भस्मारती अनुमति नहीं मिल पा रही है। इससे श्रृद्धालु मायुस होकर लौट रहे हैं। श्रृद्धालु को कहना है कि भस्मारती प्रवेश की सशुल्क व्यवस्था की जानकारी नहीं है, वहीं ऑनलान अनुमति भी हाथोहाथ नहीं मिल पाती है। कुछ श्रृद्धालुओं की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह भस्मारती शुल्क का वहन कर सकें।

इनका कहना
दर्शन का शुल्क नहीं लेना चाहिए
महाकाल मंदिर में भस्मारती अनुमति के लिए शुल्क लिया जा रहा है, इसकी जानकारी आपसे पता चली है। वैसे दर्शन के लिए शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। मैं इस विषय में कलेक्टर से चर्चा कर बताता हूं। श्रृद्धालु की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा।
जगदीश देवड़ा, प्रभारी मंत्री, उज्जैन
निशुल्क प्रवेश सुनिश्चित करेंगे
महाकाल मंदिर में श्रृद्धालु को सुलभ व आसान दर्शन होना चाहिए। समय-समय पर इस विषय में अधिकारियों से चर्चा भी करते हैं। भस्मारती में नि:शुल्क प्रवेश होना चाहिए। इस विषय पर भी अधिकारी से बैठक कर निराकरण करवाएंगे।
डॉ. मोहन यादव, उच्च शिक्षा मंत्री, उज्जैन

इधर, महाकाल मंदिर में आज से शुरू होगी नि:शुल्क जलाभिषेक सुविधा
मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने बताया कि मंदिर में मंगलवार सुबह से सभी श्रद्धालु व जन सामान्य श्री महाकाल को निर्बाध नि:शुल्क जल अर्पण कर सकेंगे। भगवान भोलेनाथ के पूजन में जल अर्पण का खास महत्व है। धाकड़ ने आगे कहा कि कार्तिकेय मंडप से प्रवेश करते ही भक्तों को पवित्र पात्र व जल, अभिषेक के लिए प्रदान किए जाने की व्यवस्था मंदिर प्रबंध समिति ने की है। इसके लिए कार्तिकेय मंडप में एक जल पात्र रखा गया है, श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित जल सीधे पाइप द्वारा महाकाल को अर्पित होगा। इसी तरह विशेष दर्शन सुविधा द्वार से आने वाले श्रद्धालु जल द्वार के समीप रखे पात्र से जलाभिषेक के लिए जल अर्पण कर सकेंगे। महाकाल के पूजन-अर्चन व आरती के समय को छोड़कर श्रद्धालु निरंतर जल अर्पण कर सकेंगे। बता दें कि दोपहर 4.30 बजे तक ही जल अर्पण अनुमति है, इसके बाद संध्या पूजन व आरती की तैयारी प्रारंभ हो जाती हैं।

Finance and Education Minister is not satisfied with mahakal temple.
दोना मंत्री बोले- मंदिर में भस्मारती शुल्क व्यवस्था की समीक्षा जरूरी, भक्तों की महाकाल से दूरी ठीक नहीं, आसान और सुलभ दर्शन हो यह जरुरी

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