ग्लोबल फोरगिवनेस डे : माफी मांग कर बढ़ाई रिश्तों की उम्र, पुरानी बात भुल पाई संतुष्टि

कोई बात या मनमुटाव के कारण किसी अपने से आपके रिश्ते टूटने की कगार पर पहुंच जाए.़.. शायद उसका साथ आप हमेशा के लिए खोने की स्थिति में आ जाएं और एेसी परिस्थिति में एक छोटा-सा शब्द सॉरी या फोरगीव इस होने वाले बड़े नुकसान से बचा लें तो यह सौदा महंगा नहीं है।

By: Lalit Saxena

Published: 07 Jul 2019, 07:20 AM IST

उज्जैन. कोई बात या मनमुटाव के कारण किसी अपने से आपके रिश्ते टूटने की कगार पर पहुंच जाए.़.. शायद उसका साथ आप हमेशा के लिए खोने की स्थिति में आ जाएं और एेसी परिस्थिति में एक छोटा-सा शब्द सॉरी या फोरगीव इस होने वाले बड़े नुकसान से बचा लें तो यह सौदा महंगा नहीं है। यकीन मानिए शब्द छोटा जरूर है लेकिन इसमें रिश्ते मजबूत करने, संबंध आगे बढ़ाने और मन को संतुष्टि देने की अद्वितीय शक्ति है। इसलिए कहा गया है माफी मांगना अच्छी समझ और माफ करना बढ़प्पन की निशानी है।

रविवार को ग्लोबल फोरगिवनेस डे
रविवार को ग्लोबल फोरगिवनेस डे है। वैसे तो जीवन में क्षमा के महत्व को दर्शाने के लिए वर्ष में एक दिन ७ जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है लेकिन वास्तविकता में इसका महत्व किसी व्यक्ति के पूरे जीवन में है। आम ओ खास हर किसी के जीवन में कई मौके एेसे आते हैं जब क्षमा पाने या देने से वे बहुत कुछ खोने से बच जाते हैं। किसी ने इसके जरिए रिश्तों को संजीवनी दी है तो किसी ने अनमोल सुखद अनुभव पाया है। शहर में भी एेसे कई लोग हैं जिन्होंने इस छोटे से शब्द का महत्व समझा है और वो किस्से उनके जहन में सुखद पलों की तरह अंकित हो गए हैं। ग्लोबल फोरगिवनेस डे पर विशेष रिपोर्ट-

गुस्सा तो काफी आया लेकिन बात भूलने से खुशी अधिक मिली
नगर निगम अध्यक्ष सोनू गेहलोत क्षमा का आनंद ले चुके हैं और इसका सुखद अनुभव वे भूल नहीं पाते। एेसे ही एक किस्से को बयां करते हुए गेहलोत बताते हैं, कुछ वर्ष पूर्व नगर निगम का सम्मेलन चल रहा था और वे बतौर सभापति आसंदी पर थे। इस बीच एक क्षेत्र के कुछ रहवासी स्थानीय समस्या को लेकर सदन के अंदर प्रवेश कर गए और नारेबाजी की। यह सदन की गरीमा ही नहीं संवैधानिक रूप से भी काफी गलत था। गेहलोत इस घटना को लेकर खासे नाराज हुए और सदन स्थगित करने की घोषणा कर दी। यही नहीं आक्रोश में उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दे दिए। सदन के अधिकांश सदस्यों ने भी इस कृत्य को असंवैधानिक मानते हुए पुलिस प्रकरण दर्ज करवाने पर सहमति दी। तत्कालीन निगमायुक्त विजय कुमार जे. की ओर से पुलिस प्रकरण दर्ज करवाने की तैयारी तक कर ली गई। तब विपक्ष के कुछ वरिष्ठ व सकारात्मक सोच रखने वाले साथियों ने अपनी ओर से घटना पर खेद व्यक्त करते हुए मामले को वहीं खत्म करने का आग्रह किया। इसके पीछे यह तर्क भी दिया गया कि जिन लोगों ने प्रदर्शन किया वे पहले से ही समस्या को लेकर परेशान और सदन के नियमों से अनजान हैं। गेहलोत ने सभी की बात शांत मन से सुनी। उन्होंने न सिर्फ घटना को नजरअंदाज करते हुए पुलिस प्रकरण दर्ज करवाने से मना कर दिया बल्कि बाद में लोगों की समस्या भी दूर करवाई। गेहलोत कहते हैं, उस मामले को वहीं खत्म करने के बाद मुझे सुखद अनुभूति हुई, तब जो संतुष्टि मिली उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।

जानिए महान व्यक्तियों ने किस क्षमा को क्या माना

- कमजोर व्यक्ति कभी क्षमा नहीं कर सकता, क्षमा करना शक्तिशाली व्यक्ति का गुण हैं।- महात्मा गांधी
- त्रुति करना मानवीय है, क्षमा करना ईश्वरीय- एलेक्जेंडर पोप

- क्षमा करने का मतलब है जो बीत गया उसे जाने दें- गेराल्ड जेम्पोस्की
- अपने दुश्मनों को हमेशा माफ कर दीजिए, उन्हें इससे ज्यादा और कुछ परेशान नहीं कर सकता। - आस्कर वाइल्ड

- भूलना, माफ करना है। - एेंफ. स्कोट
- माफ करने का मतलब किसी कैदी को आजाद करना है और ये जानना कि आप ही वो कैदी थे। - लुईस बी. स्मेडेस

- बिना क्षमा के कोई प्रेम नहीं है और बिना प्रेम के कोई क्षमा नहीं है।- ब्रायंट एच. मैकगिल
- जब आप माफ करते हैं तब आप भूत को नहीं बदलते हैं, लेकिन आप निश्चित रूप से भविष्य को बदल देते हैं।-बर्नार्ड मेल्त्जर

- क्षमा एक विचित्र चीज है। यह हृदय को सुकून देती है और ठंडा कर देती है।- विलियम आर्थर वार्ड
- क्षमा एक एेसा उपहार है जो हम स्वयं को देते हैं।- सुजैन सोमर्स

Lalit Saxena
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