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ऐसी अनदेखी रहीं तो सिंहस्थ 2016 जैसी परेशानी 2028 में भी उठाना पड़ेगी

सिंहस्थ 2016 में 40 से अधिक कमियां दिखी थी, इन्हें दुरस्त करने न योजना बनी न काम शुरू , पिछले सिंहस्थ में पांच वर्ष पूर्व काम शुरू होने के बाद भी अधूरे रह गए थे निर्माण, इस बार 14 करोड़ यात्रियों के आने के मान से जुटानी हैं सुविधाएं

उज्जैन

Updated: December 31, 2021 10:40:32 pm

जितेंद्रसिंह चौहान

उज्जैन। सिंहस्थ २०१६ की तैयारियां पांच वर्ष पूर्व शुरू हो गई थी बावजूद सिंहस्थ के दौरान श्रृद्धालुओं को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ा था। सिंहस्थ २०१६ के खत्म होने पर सिंहस्थ मेला प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए प्रतिवेदन में ४० से अधिक कमियों को बताया गया था। साथ ही कहा गया था कि वर्ष २०२८ के सफल सिंहस्थ के लिए इन खामियों को दूर करना होगा। चूंकि अब सिंहस्थ में छह वर्ष ही शेष रह गए हैं लेकिन सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर फिलहाल कोई कार्ययोजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। जबकि अगले सिंहस्थ में १४ करोड़ यात्रियों के आने की संभावना जताई जा रही है। स्थिति यह है कि महाकाल क्षेत्र विकास के अलावा अन्य किसी बात पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में एनवक्त पर सिंहस्थ की कार्ययोजना बनती है और निर्माण की मंजूरी मिलते-मिलते देर होगी तो सिंहस्थ २०२८ में श्रृदलुओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से कुछ कवायद शुरू होने की बात कही जा रही है लेकिन वह अब तक धरातल पर नहीं उतरी है। पत्रिका की एक रिपोर्ट..।
पांच वर्ष पहले काम शुरू फिर भी सिंहस्थ तक नहीं हो पाए थे पूरे
सिंहस्थ २०१६ की तैयारियों के लिए पांच वर्ष पूर्व कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिए गए थे। इसमें पहले स्थायी निर्माण कार्यों पर जोर दिया गया था ताकि सिंहस्थ बाद इसका फायदा शहरवासियों को मिल सके। इसके लिए विशेष तौर पर ब्रिज, क्षिप्रा नदी पर घाट, खान डायवर्सन प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ था। स्थिति यह रही थी सिंहस्थ के दो महीने पहले तक ब्रिज और घाटों का निर्माण ही पूरा नहीं हो पाया था। वहीं अस्थायी प्रकृति के निर्माण भी समय पर पूरे नहीं हो पाए थे। सिंहस्थ क्षेत्र के समतलीकरण तथा पेयजल व शौचालय के काम सिंहस्थ के दौरान ही चलते रहे थे। ऐसे में अब भी अगर सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर अभी से कार्ययोजना बनाने पर काम शुरू नहीं होता है तो दिक्कतें आएंगी।
सिंहस्थ की कमियां गिनाई...फिर भी नहीं ले रहे सबक
सिंहस्थ २०१६ में जो कमियां रह गई थी जिनके कारण श्रृद्धालुओं को दिक्कतें आई थी उसको लेकर सिंहस्थ मेला प्राधिकरण द्वारा एक प्रतिवेदन तैयार किया गया था। इस प्रतिवेदन में सिंहस्थ की कमियां, सुधार सहित अन्य बातों का उल्लेख किया गया था। तत्कालीन सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष दिवाकर नातू ने यहां तक कहा था कि अगर इस पालन प्रतिवेदन पर काम होता है तो अगला सिंहस्थ बेहतर तरीके से संपन्न होगा। इस प्रतिवेदन को शासन को भी सौंपा गया था। हालत यह है कि इस प्रतिवेदन पर भी जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है।
सिंहस्थ 2016 में दिखी थी यह कमियां
१. क्षिप्रा का प्रवाहमान न होना
सिंहस्थ में खान डायवर्सन प्रोजेक्ट के साथ ही नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना पूरी हुई थी। बावजूद इसके क्षिप्रा में पानी एकदम साफ नहीं था। इसके लिए सांवरखेड़ी डैम बनाने का सुझाव दिया गया था, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई काम नहीं हुआ।
२. जयसिंहपुरा ब्रिज का निर्माण
सिंहस्थ के दौरान जयसिंहपुरा रेलवे क्रासिंग को लेकर बहुत परेशानियां आई थी। नईखेड़ी रेलवे स्टेशन से लोगों का पैदल तक आना पड़ा था। रेलवेस्टेशन के नजदीक जयसिंहपुरा रेलवे क्रासिंग पर आरओबी का निर्माण नहीं हो पाया। ऐसे ही गदा पुलिया का चौड़ीकरण भी नहीं होने से दिक्कत आई थी।
३. घाटों के ओर विस्तारिकण की जरुरत
क्षिप्रा नदी पर भूखिमाता मंदिर तक नवीन घाट बनाए गए थे। सिंहस्थ के दौरान भीड़ प्रबंधन के चलते घाट कम पड़ गए थे। ऐसे में घाटों को जंतर-मंतर तक बनाने की बात थी। वहीं भूखी माता मंदिर के यहां क्षिप्रा के चौड़ीकरण की आवश्यकता जताई गई है।
४. वॉच टॉवर का निर्माण न होना
सिंहस्थ में रामघाट व नृसिंहघाट पर वॉच टॉवर की जरुरत महसूस की गई थी। सिंहस्थ में इसका प्रावधान भी किया गया था लेकिन कानूनी अड़चन के कारण बन नहीं पाया था। सिंहस्थ २०२८ को लेकर इसकी आवश्यकता है।
५. पेशवाई मार्ग का चौड़ाकरण
सिंहस्थ में पेशवाई शहर के भीतर से होकर क्षिप्रा नदी तक पहुंची थी। इस दौरान सड़कों की चौड़ाई कम होने से परेशानी सामने आई थी। पेशवाई के दौरान भीड़ प्रबंधन में दिक्कत आई थी। सुझाव था कि पेशवाई मार्ग को ६० फीट चौड़ा किया जाए।
६. फ्रुट ओवर ब्रिज का निर्माण
सिंहस्थ में भीड़ के चलते देवासगेट, जिला अस्पताल, कंठाल चौराहा, बुधवारिया, उज्जैन पब्लिक स्कूल, हरसिद्धि चौराहे, दानीगेट पर फ्रुुट ओवर ब्रिज की आवश्यकता जताई गई थी। इनके नहीं बनने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
७. रेलवे स्टेशन का विस्तार नहीं
सिंहस्थ में रेलवे स्टेशन का विस्तार नहीं हुआ था। विक्रनगर और नई खेड़ी स्टेशन पर ही यात्रियों को उतारा गया। जबकि उज्जैन स्टेशन को ही जयङ्क्षसहपुरा तक तथा विक्रमनगर रेलवे क्रांसिंग तक बढ़ाने की जरुरत थी। स्टेशन पर चार एस्कलेटर की आवश्यकता जताई गई।
८. सेटेलाइट टाउन और घाटों की दूरी
सिंहस्थ में यात्रियों को लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ा था। सेटेलाइट टाउन से घाटों की बहुत दूरी थी। पहले शाही स्नान में शहर के अंदर तक वाहनों को नहीं आने देने के कारण लोगों को लंबी दूरी तक चलना पड़ा था।

If this is ignored then problems like Simhastha 2028.
सिंहस्थ 2016 में 40 से अधिक कमियां दिखी थी, इन्हें दुरस्त करने न योजना बनी न काम शुरू , पिछले सिंहस्थ में पांच वर्ष पूर्व काम शुरू होने के बाद भी अधूरे रह गए थे निर्माण, इस बार 14 करोड़ यात्रियों के आने के मान से जुटानी हैं सुविधाएं

यह कमियां भी
- देवास, मक्सी व आगर रोड के चौड़ा नहीं होने से दिक्कते आई थी।
- शहर से बायपास होने वाली भोपाल से इंदौर और गुना-कोटा से इंदौर जाने वाली ट्रेनों का उज्जैन होकर न चलना।
- कुंभ मेले वाले शहर प्रयाग, हरिद्वार, नासिक तक के लिए सीधी ट्रेन सेवा न होना।
- उज्जैन से रामगंज रेलव लाइन का निर्माण न होना।

पिछले सिंहस्थ में बनी थी परेशानी, अब पूरे हो रहे निर्माण
सिंहस्थ २०१६ में पुराने फ्रीगंज ब्रिज के साथ नया ब्रिज, मुल्लापुरा पर नया ब्रिज तथा उज्जैन फतेहाबाद रेलवे लाइन नहीं होने से दिक्कत आई थी। अब यह तीनों कामों पर सिंहस्थ के बाद काम शुरू हो गया है। फ्रीगंज ब्रिज की स्वीकृति हो गई है और अगले वर्ष इस पर काम शुरू हो जाएगा। मुल्लापुरा पर ब्रिज का काम लगभग पुरा हो गया है। उज्जैन-फतेहाबाद रेलवे लाइन का काम भी पूरा होकर ट्रेनें चलना शुरू हो गई है।

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