इस जेल में हो रही अनदेखी, लापरवाही न पड़ जाए भारी...

टूटने लगी जिला जेल परिसर में लगी तार फेंसिंग

शाजापुर. लालघाटी पर स्थित जिला जेल परिसर की दीवारों के बाहर सुरक्षा की दृष्टि से तार फेंसिंग की गई थी, ताकि हर कोई जेल की दीवार तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन बरसों पहले लगाई गई उक्त तार फेंसिंग अब कई जगह से टूटने लगी है। इसके चलते कोई भी आसानी से इस टूटी हुई तार फेंसिंग में से जेल की दीवार तक पहुंच सकता है। यहां पर सुरक्षा में की गई जरा सी भी चूक भारी पड़ सकती है। इसकी जानकारी मिलने पर जेल प्रबंधन ने वरिष्ठ स्तर पर तार फेंसिंग को व्यवस्थित कराने की मांग के लिए पत्र लिखा है।
उल्लेखनीय है कि जिला जेल परिसर में जिले सहित आसपास के सजायाफ्ता और विचाराधीन बंदियों को रखा हुआ है। ऐसे में सर्वाधिक सुरक्षित परिसर में इन्हें रखने के लिए वैसे तो सुरक्षा के इंतजाम किए हुए है, लेकिन अब इन सुरक्षा के इंतजामों में सुराख होने लगा है। जिला जेल की दीवार को कोई नुकसान न पहुंचाए और इसकी दीवारों तक कोई नहीं पहुंच पाए इसके लिए जेल की दीवार के चारों ओर तार फेंसिंग करीब 20-25 साल पहले कराई थी। तार फेंसिंग होने के बाद से इसकी ओर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में उक्त तार फेंसिंग के तार जगह-जगह से टूट गए हैं। कई जगह से तार फेंसिंग जर्जर हो गई है। कुछ स्थानों पर टूटे हुए तार की जगह कांटे लगाए गए हैं। बताया जाता है कि इस तार फेंसिंग की मरम्मत के लिए पूर्व में भी जेल प्रबंधन ने मांग की थी, लेकिन वरिष्ठ स्तर से इसकी ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। ऐसे में आज इस जेल की सुरक्षा में हो रही चूक कभी-भी भारी पड़ सकती है।
4 लाख 35 हजार रुपए का भेजा था प्रस्ताव
जेल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार जिला जेल के चारों ओर बाउंड्री को व्यवस्थित करने सहित यहां पर पुरानी हो चुकी तार फेंसिंग को बदलने के लिए पूर्व में करीब 4 लाख 35 हजार रुपए का प्रस्ताव तैयार करके भेजा गया था। हालांकि इस प्रस्ताव की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। कुछ समय पहले भी जेल प्रबंधन ने तार फेंसिंग को व्यवस्थित कराने के लिए दोबारा पत्र व्यवहार किया था। इस पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
स्ट्रीट लाइट बंद रहने से छा जाता है अंधेरा
नगर पालिका सीमा के अंदर आने वाली उक्त जिला जेल के आसपास के मार्ग पर स्ट्रीट लाइट लंबे समय से बंद पड़ी हुई है। इस स्ट्रीट लाइट को चालू करवाने के लिए जेल प्रबंधन ने नगर पालिका से संपर्क किया। पत्राचार भी किया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। कुछ समय पहले बायपास भी शुरू हो गया है। ऐसे में जिला जेल के सामने वाले मार्ग का उपयोग अनेक वाहन चालक बायपास पर जाने के लिए करते हैं। ऐसे में इस मार्ग पर चहल-पहल खासी बढ़ गई है। इधर सडक़ के किनारे लगे बिजली के खंभों से रोशनी नहीं होने के कारण यहां पर कभी-भी गंभीर हादसा या घटना हो सकती है।
पूर्व में फरार हो गया था बंदी
वर्ष 1987 में जिला जेल असतित्व में आने के बाद इस जेल में वर्ष 2011 में एक सजायाफ्ता बंदी जेल की दीवार कूदकर फरार हो गया था। हालांकि पुलिस ने मशक्कत करते हुए कुछ दिनों में उक्त बंदी को दोबारा पकड़ लिया था, लेकिन इस घटना के बाद जिला जेल में सुरक्षा को लेकर खासी सवाल उठने लगे थे। जेल में सीसीटीवी कैमरे लगाने सहित यहां पर दीवारों के उपर तार फेंसिंग करने सहित अन्य सुरक्षा इंतजाम करने की बातें हुई और निर्देश भी जारी हुए थे, लेकिन कुछ दिनों बाद ये मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वैसे तो 2011 के बाद यहां पर कोई घटना नहीं हुई, लेकिन यहां की सुरक्षा के लिए ठोस कदम भी नहीं उठाए गए। अब जबकि इसकी दीवारों की सुरक्षा के लिए लगाई हुई तार फैंसिंग टूट रही है तो यहां पर हो रही सुरक्षा में चूक कभी-भी भारी पड़ सकती है।
जेल की बाहरी दीवार की सुरक्षा के लिए लगाई हुई तार फेंसिंग बरसों पुरानी हो गई है। इसकी मरम्मत के लिए वरिष्ठ स्तर पर मांग की गई है। पूर्व में इसकी मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार करके भेजा गया था। कुछ समय पहले भी इसके लिए मांग की गई है। वरिष्ठ स्तर से निर्देश और राशि आवंटित होते ही तार फेंसिंग को व्यवस्थित कराया जाएगा।
जीएस गौतम, जेल उपअधीक्षक, जिला जेल-शाजापुर
जेल मार्ग पर जो स्ट्रीट लाइट लगाई हुई है उसे जल्द ही ठीक कराया जाएगा। कल मैं स्वयं उसे दिखवाकर चालू करवाता हूं।
भूपेंद्रकुमार दीक्षित, मुख्य नगर पालिका अधिकारी-शाजापुर

Mukesh Malavat
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