ऐसे करें पितरों को तृप्त, सर्वपितृ अमावस्या पर बन रहा शुभ संयोग

ऐसे करें पितरों को तृप्त, सर्वपितृ अमावस्या पर बन रहा शुभ संयोग
Importance of Sarv pitru Moksha Amavasya

Lalit Saxena | Publish: Sep, 29 2016 08:43:00 PM (IST) Ujjain, Madhya Pradesh, India

सर्व पितृ अमावस्या शुक्रवार को आने से शुभ संयोग बन रहा है। पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में इस संयोग को विशेष शुभकारी माना जाता है। समस्त पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने का यह दिन है।

उज्जैन. सर्व पितृ अमावस्या शुक्रवार को आने से शुभ संयोग बन रहा है। पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में इस संयोग को विशेष शुभकारी माना जाता है। समस्त पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने का यह दिन है। इस बार 15 दिन का श्राद्ध पक्ष होने से 15वां दिन दर्श अमावस्या का माना गया है। 

देवी साधना के साथ पितरों की कृपा
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया कि अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या शुक्रवार को होने से विशेष शुभकारी है। शुक्रवार देवी साधना के साथ-साथ पितरों की कृपा का भी विशेष दिन रहता है। इस बार ग्रह गणना में भी शुक्र की स्थिति गोचर के आधार पर प्रबल है। साथ ही पितृ पक्ष में ग्रहों के आधार पर देखें तो अमावस्या तिथि का यदि शुक्रवार को संयोग बनता है, तो वह अमावस्या शुभकारी मानी जाती है। 




Importance of Sarv pitru Moksha Amavasya

बढ़ेगा अमावस्या का महत्व
क्षेत्रीय आधार पर इस दिन श्राद्ध पक्ष 15 दिन के होने से यह 15वां दिन दर्श अमावस्या का माना जाएगा। क्योंकि पितृ पक्ष में इस बार तिथि के प्रभावित होने से इस अमावस्या का महत्व बढ़ेगा, साथ ही दिन के 15 मुहूर्तों में संदव काल से लेकर अभिजीत, कुतुभ, मध्याह्न, अपराह्न काल तक चार विशेष मुहूर्त हैं। साथ इनके अलावा प्रात: से शाम तक पितरों के निमित्त अलग-अलग साधनाएं की जा सकेंगी। 

Importance of Sarv pitru Moksha Amavasya

यहां करें पितरों के लिए तर्पण
शहर में प्रमुख रूप से रामघाट, सिद्धवट, गयाकोठा ऐसे स्थल माने जाते हैं, जहां आकर जातक अपने पितरों के निमित्त जल, तर्पण, पिंड दान आदि कार्य करते हैं। वैदिक पद्धति से यह कार्य संपन्न करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है। 

Importance of Sarv pitru Moksha Amavasya

तीन प्रकार के होते हैं ऋण
पुराणों में तीन प्रकार के ऋणों के बारे में उल्लेख मिलता है। ये देव ऋण, ऋषि ऋण व पितृ ऋण हैं। पर्वकाल पर जब हम अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध करते हैं, तो संकल्प में देवता व पितृ आदि को वह ऋण प्राप्त होता है, जिससे पितृ तृप्त होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि व कार्यप्रगति का आशीर्वाद देते हैं। 

सिद्धवट पर दूध चढ़ाने उमड़े आस्थावान
श्राद्ध पक्ष की चतुर्दशी के मौके पर गुरुवार को पितरों की शांति के लिए सिद्धेश्वर भगवान को जल-दूध चढ़ाने हजारों आस्थावान उमड़े। घंटों तक कतार में लगकर दुग्ध पात्र में उन्होंने दूध डाला और भगवान के दर्शन किए। यही स्थिति गयाकोठा तीर्थ स्थल की भी रही। यहां भी श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। दोनों ही तीर्थ क्षेत्रों में तर्पण, पिंडदान आदि कार्य संपन्न हुए। दूरदराज से आए आस्थावानों ने अपने-अपने पितरों की शांति के निमित्त जल-दूध व पिंडदान आदि कार्य संपन्न किए।

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