Independece Day Celebration: महाकाल बाबा के मस्तिष्क पर भी तिरंगा, ऐसा था उनका श्रृंगार

सबसे पहले महाकाल के दरबार में मनाया जाता है कोई भी पर्व, आज आजादी के रंगों में रंगे भगवान महाकाल...।

By: Manish Gite

Published: 15 Aug 2020, 10:46 AM IST

उज्जैन। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी आजादी का पर्व देखने को मिला। शनिवार सुबह भस्म आरती के बाद जब बाबा का श्रंगार किया गया, तो वे भी आजादी के रंगों में रंगे हुए नजर आए। यह नजारा देख श्रद्धालु भी प्रसन्न हो गए।

परंपरा के मुताबिक हर पर्व के मनाने की शुरुआत भगवान महाकाल के दरबार से ही होती है। यही वजह है कि राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त का यह दिन ( Independece Day Celebration at Mahakal Temple ) भी बाबा महाकाल के आंगन से ही आरंभ हुआ। उज्जैन के महाकाल मंदिर में शनिवार सुबह भस्म आरती का आयोजन हुआ, जिसके बाद बाबा का श्रृंगार किया जाता है। आज का श्रंगार इसलिए खास रहा कि आजादी के इस महापर्व पर बाबा को देश की शान तिरंगा का तिलक लगाया गया था। भस्म आरती के दौरान पंडे-पुजारियों ने पंचामृत अभिषेक और अन्य पूजन विधि के बाद राजाधिराज भगवान महाकाल का तिरंगा स्वरूप में अद्भुत श्रृंगार किया।

कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष भगवान महाकाल के दरबार में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जा रहे हैं। इसके अलावा भस्म आरती में किसी भी श्रद्धालु को शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है।

सामान्य रूप से दर्शन करने आने वाले भक्तों को 1 दिन पूर्व ऑनलाइन के माध्यम से बुकिंग कराना अनिवार्य है, उसी के माध्यम से भगवान महाकाल के मंदिर में उन्हें प्रवेश दिया जाता है स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में मंदिर कार्यालय में भी ध्वज वंदन का आयोजन हुआ जिसमें प्रशासक एसएस रावत व अन्य अधिकारी वह कर्मचारी शामिल हुए

mahakal

 

शिखर भी सजाया गया :-:

आजादी के पर्व महाकाल दरबार में भी मनाया गया। मंदिर के शिखर पर तिरंगे का स्वरूप दिया गया था। इसके बाद भस्म आरती में बाबा का श्रंगार भी तिरंगे के रंगों से किया गया। यहां हर साल राष्ट्र का यह महापर्व महाकाल में भी जोश के साथ मनाया जाता है।

 

ऐसे हुई भस्म आरती :-:

  • भस्मारती के पहले महाकाल को जल से नहलाकर महा पंचामृत अभिषेक किया गया।
  • दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बाबा का अभिषेक किया गया।
  • बाबा को अभिषेक के बाद भांग और चन्दन से श्रृंगार किया गया
  • भगवान को वस्त्र धारण समर्पित किए गए। इसके बाद बाबा को भस्म चढ़ाई गई।
  • झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े व शंखनाद के साथ आरती की गई।
  • केसरिया व सफेद चंदन के साथ भांग को हरे रंग के रूप में चढ़ाया गया।
  • इस प्रकार बाबा के मस्तिष्क पर तिरंगे का श्रृंगार किया गया।
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