video : प्रदेश का पहला ऐसा मंदिर, जहां होगी देशभक्ति...साध्वी ऋतुंभरा व संघ प्रमुख भागवत ने किया अनावरण

शिव की नगरी में प्रदेश का पहला ऐसा मंदिर बनकर तैयार हो गया है, जहां देवी-देवताओं की नहीं, बल्कि भारत माता के साथ देशभक्ति होगी।

By: Lalit Saxena

Published: 04 Jan 2018, 08:48 PM IST

उज्जैन. मंदिरों की राजधानी कहलाने वाली भगवान शिव की नगरी में प्रदेश का पहला ऐसा मंदिर बनकर तैयार हो गया है, जहां देवी-देवताओं की नहीं, बल्कि भारत माता के साथ देशभक्ति होगी। लाल पत्थरों से निर्मित भव्य मंदिर बनकर जनता के दर्शनार्थ तैयार हो गया है। गुरुवार को भव्य आयोजन के साथ इसमें भारत माता की प्रतिमा विराजमान की गई।

महाकाल मंदिर के नजदीक बना है ये मंदिर
ज्योतिर्लिंग भगवान श्रीमहाकालेश्वर मंदिर के नजदीक लाल पत्थरों से निर्मित भव्य मंदिर में भारत माता प्रतिमा का अनावरण समारोह शाम ६ बजे हुआ। साध्वी ऋतुंभरा व आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत ने १६ फीट ऊंची मार्बल प्रतिमा का अनावरण किया।

गूंजे जयकारे, हजारों बने साक्षी
हजारों लोग इस खास अवसर के साक्षी बने और परिसर भारत मां के जयकारों से गूंज उठा। महाकाल मंदिर आने वाले दर्शनार्थी अब राष्ट्रीय आस्था के प्रतीक इस मंदिर में दर्शन कर सकेंगे।

माधव सेवा न्यास ने कराया मंदिर निर्माण
संघ से जुड़े माधव सेवा न्यास ने जनसहयोग से इस मंदिर का निर्माण कराया है। तीन साल में बनकर तैयार इस मंदिर में उद्देश्य मातृभूमि के प्रति श्रद्धा व विश्वास का भाव बनाए रखना है। अनावरण उपरांत मंचीय कार्यक्रम हुआ, जिसमें साध्वी ऋतुंभरा के आशीर्वचन हुए। इस दौरान संघ सहकार्यवाह भैय्याजी जोशी, क्षेत्रीय संघ चालक अशोक सोहनी, न्यास अध्यक्ष गिरीश भालेराव सहित संघ के दिग्गज नेता मौजूद रहे।

मंदिर की ये हैं विशेषताएं
भारत माता प्रतिमा की ऊंचाई पेडस्टल सहित १६ फीट।
मंदिर का निर्माण गर्भगृह सहित ३००० वर्ग फीट।
मंदिर का खुला क्षेत्र ३००० वर्ग फीट।
जमीन तल से शिखर की ऊंचाई १०१ फीट।
मंदिर का निर्माण तीन तल पर किया गया है।
प्रथम तल पर ध्यान केंद्र,योग/व्यायाम,पुस्तकालय।
द्वितीय तल पर १२० लोगों के बैठने का ऑडिटोरियम और डाक्यूमेट्री थियेटर।
तृतीय तल पर भारत माता की मार्बल प्रतिमा, दीवार पर चारों और नवदुर्गा की प्रतिमा।
भारत माता का एक किलो सोने से निर्मित मुकुट।
मंदिरों में कुल ५ द्वार का निर्माण कर कांच लगाए गए हैं ताकि सभी ओर से भारत माता के दर्शन हो सके।

Lalit Saxena
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