इंटरनेशनल जोक्स डे : जीवन फ्यूज होने से पहले उसे यूज कर लेना चाहिए

इंटरनेशनल जोक्स डे : जीवन फ्यूज होने से पहले उसे यूज कर लेना चाहिए
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Lalit Saxena | Updated: 01 Jul 2019, 12:14:43 PM (IST) Ujjain, Ujjain, Madhya Pradesh, India

शहर के उन लोगों से खास चर्चा, जो छोटी-छोटी बातों में हास्य के पुट निकाल लेते हैं

उज्जैन. लाइफ में बहुत सारे टेंशन हैं, रोजमर्रा की जिंदगी में चेहरों से हंसी गायब हो गई। मोबाइल युग में बच्चों का बचपन छिन गया। रिश्तों को अहंकार खा गया। गांव की चौपालों से हंसी का भरपूर डोज लापता हो गया। ऐसे में हंसी और खुशी की दरकार सभी को रहती है, ताकि जीवन में प्रफुल्लित समां बना रहे। इंटरनेशनल जोक्स डे ( International Jokes Day ) पर शहर के हंसोड़ों से चर्चा की, तो उन्होंने कहा...होठों को मुस्कुरासन कराइए जनाब...जोक्स तो अपने आप झड़ते जाएंगे।

 

patrika

जीवन भी एक जोक है...
बातों-बातों में हंसी-ठिठौली का पुट खोजने वाले स्वामी मुस्कुराके (शैलेंद्र व्यास) का कहना है जीवन भी एक जोक है, आदमी इससे हमेशा चिपकना चाहता है। यह जिंदगी अपनी नहीं है, फिर भी हम अपनी महत्वकांक्षाओं से निकलना ही नहीं चाहते। मेरा यह कहना है कि जीवन को फ्यूज होने से पहले उसे यूज कर लेना चाहिए। जोक्स वो लोग पसंद नहीं करते, जो अहंकारी होते हैं। अहंकार की सबसे बड़ी खुराक है रिश्ते, क्योंकि अहंकार इन्हें खा जाता है। आप व्यवहार के प्यारेलाल होइए, जिंदगी आपकी लक्ष्मीकांत अपने आप हो जाएगी। जोक्स तो हमारे चारों ओर बिखरे पड़े हैं। स्वामी मुस्कुराके ने चुटीले अंदाज में कुछ गुदगुदाने वाली बातें कहीं...शादी के बाद एक बात सबको समझ आ जाती है, कि खुद की बीबी ही खूबसूरत नहीं होती है...बाकी बातें समझने वाली हैं। मैं शादी के बाद इतना समझदार हो गया हूं, कि मुझे 32 भाषाओं में चुप रहना आ गया। इस धरती पर एकमात्र शिष्य ऐसा हुआ है, जिससे गुरु का कॅरियर खत्म गया...वो हैं अरविंद केजरीवाल।

" जिंदादिल रहिए जनाब, चेहरे पर उदासी कैसी,
वक्त तो बीत रहा है उम्र की ऐसी की तैसी... "

 

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जोक्स तो हमारे आसपास ही हैं
प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ पिलकेंद्र अरोरा ने इंटरनेशनल जोक्स डे पर कहा हंसी और जोक्स तो हमारे आसपास ही हैं, बस नजरें टेढ़ी करने की देर है। चारों तरफ हास्य-व्यंग्य भरा पड़ा है, दृष्टिकोण का अंतर है। उन्होंने कहा कि पुराने चुटकुलों का विस्तार होना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी भी इससे वाकिफ हो सके। कवि या इस विधा से जुड़े लोगों को इसमें आगे आना चाहिए। इससे हास्य पैदा करने की क्षमता बढ़ती है। चुटीले अंदाज में कहा...
" हमारे नेता इतने महान हैं, कि वे कर्मकांड में बिल्कुल भी विश्वास नहीं करते,

पर वे कर्म ही ऐसे करते हैं, जो कांड बन जाते हैं।"

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