कोविड में भी नहीं टूटेगी कालिदास समारोह की परंपरा, गाउडलाइन के मुताबिक होगी व्यवस्था

25 नवंबर से उज्जैन में होने वाला है कालिदास समारोह, ऐसी रहेगी इस बार की व्यवस्था...।

By: Manish Gite

Published: 13 Nov 2020, 02:21 PM IST

उज्जैन। दुनियाभर में विख्यात उज्जैयनी का कालिदास समारोह ( kalidas samaroh 2020 ) इस बार भी होगा, लेकिन कोरोना काल के चलते कुछ सीमित मात्रा में किया जाएगा। खास बात यह है कि कोविड के चलते इस समारोह की परंपरा भी कायम रहेगी।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ( mohan yadav ) की अध्यक्षता में अभा कालिदास समाह की स्थानीय समिति की बैठक संपन्न हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन एवं उज्जयिनी की सांस्कृतिक विरासत को कायम रखते हुए सात दिवसीय समारोह का आयोजन करके परंपरा का निर्वाह किया जाएगा।

 

समारोह कालिदास संस्कृत अकादमी, विक्रम विवि, संस्कृत विश्वविद्यालय आदि को जोड़कर यह आयोजन होगा। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सात दिवसीय अभा कालिदास समारोह का कार्यक्रम अलग-अलग स्थलों पर हो, ताकि कम से कम भीड़ एक स्थान पर रहे। कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि समारोह परंपरानुसार किया जाए, परंतु महामारी को ध्यान में रखते हुए शासन की गाइड लाइन का अनिवार्यत: पालन किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए।

 

किसने क्या दिए सुझाव

  • विधायक पारस जैन ने कहा गाइड लाइन का पालन किया जाए।
    डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने कहा समारोह में विक्रमादित्य शोध प्रतिष्ठान को जोड़ा जाकर कालिदास एवं विक्रमादित्य पर प्रकाश डाला जाए।
    डॉ. बालकृष्ण शर्मा ने सुझाव दिया कि प्रतिवर्ष समारोह में महाविद्यालयीन छात्रों को निबंध प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति रहती है, परंतु इस वर्ष ये प्रतियोगिता ऑनलाइन हो, ताकि प्रतिस्पर्धा बरकरार रहे।
  • ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने कहा समारोह में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि का राष्ट्रीय एवं स्थानीय चैनलों पर प्रसार कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक जनता लाभ ले सके।
  • रूप पमनानी ने कहा समारोह की स्थानीय समिति में सुखद चर्चा हुई है और सांस्कृतिक विरासत को कायम रखते हुए कार्यक्रम की अनुमति प्राप्त हुई। इसी प्रकार संजीव पंजाबी व प्रकाश रघुवंशी ने भी विचार व्यक्त किए।
  • समारोह 25 से शुरू होगा, 1 दिसंबर तक चलेगा
  • अभा कालिदास समारोह देवप्रबोधिनी एकादशी मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीया विक्रम संवत 2077 तदनुसार 25 नवंबर से 01 दिसंबर तक होगा।
  • 24 नवंबर को वागर्चन मां गढ़कालिका मंदिर में पूजा-अर्चना होगा।
  • मंगल कलश स्थापना शिप्रा नदी से जल लाकर महाकालेश्वर भगवान को प्रणाम करते हुए अकादमी में प्रतीकात्मक रूप से निकाली जाएगी। चल समारोह प्राचीन स्वरूप में रहेगा।
  • कार्यक्रम में संख्या कम की जाएगी। आमंत्रण-पत्र तथा समारोह का प्रचार-प्रसार ऑनलाइन किया जाएगा। इसी तरह राष्ट्रीय कालिदास चित्र एवं मूर्तिकला प्रदर्शन का उद्घाटन भी सांकेतिक किया जाएगा।

चित्र व मूर्तिकला प्रदर्शनी भी लगेगी

  • विक्रम विवि कालिदास समिति के सचिव प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा अकादमी में उद्घाटन समारोह 25 को राष्ट्रीय कालिदास चित्र एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी का शुभारंभ होगा। इसी दिन व्याख्यान एवं संस्कृत नाटक की प्रस्तुति होगी।
  • अगले दिन 26 को विक्रम कालिदास पुरस्कार, राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन होगा।
  • -27 से 30 नवंबर तक विश्वविद्यालय की विविध अध्ययनशालाओं में कालिदास साहित्य पर केन्द्रित पर्यावरण विज्ञान और प्रौद्योगिकी, मानव मूल्य, संस्कृति दर्शन, परवर्ति साहित्य पर प्रभाव, पांडुलिपि विज्ञान, अर्थ चिंतन, जीवन प्रबंधन व्याख्यान का आयोजन होगा।
  • अंतिम दिन एक दिसंबर को विक्रम शोध पत्रिका के विशेषांक का लोकार्पण होगा। शोधपत्रों के लेखकों का भी सम्मान होगा।
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