scriptKnow what facilities and rights a mayor gets for five years | जानिए एक महापौर को पांच साल तक क्या-क्या सुविधा और अधिकार मिलते हैं | Patrika News

जानिए एक महापौर को पांच साल तक क्या-क्या सुविधा और अधिकार मिलते हैं

जनसुविधा की जिम्मेदारियों के साथ बंगला, गाड़ी, तीन दर्जन कर्मचारी, 5 करोड़ की वित्तीय ताकत और अपनी परिषद

उज्जैन

Published: July 20, 2022 12:23:30 pm

उज्जैन. नगर निगम चुनाव में जिस पद के लिए प्रत्याशियों के साथ राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंकी, वह शहर की महत्वपूर्ण और ताकतवर कुर्सी है। जन मत से इस कुर्सी तक जो भी पहुंचेगा उसे जनसुविधा और शहर विकास की बड़ी जिम्मेदारी के साथ लग्जरी सुख-सुविधाओं से भरे पांच साल भी मिलेंगे। जिम्मेदारी और रसूख से भरा यह समय किसके हाथ आएगा, यह आज स्पष्ट हो जाएगा।

Know what facilities and rights a mayor gets for five years
जनसुविधा की जिम्मेदारियों के साथ बंगला, गाड़ी, तीन दर्जन कर्मचारी, 5 करोड़ की वित्तीय ताकत और अपनी परिषद

नगर निगम के पूर्व बोर्ड का कार्यकाल सितंबर 2020 में पूरा हो गया था। इसके बाद से ही ग्रांड होटल परिसर के करीब आधा बीघा में स्थित महापौर बंगला (महापौर विश्राम गृह) खाली पड़ा हुआ है। मतदाता प्रथम नागरिक के लिए ६ जुलाई को ही मतों को रेड कॉरपेट महापौर बंगले तक बिछा चुके हैं। अब इस कॉरपेट के जरिए भाजपा प्रत्याशी मुकेश टटवाल अपने बागपुरा के घर से बंगले तक का सफर तक करते हैं, कांग्रेस प्रत्याशी महेश परमार मित्र नगर के किराए के मकान/कदवाली स्थित पारिवारिक मकान से यहां तक पहुंचते हैं या किसी और प्रत्याशी को यह मौका मिलता है, रविवार को जन मत के फैसले से तय हो जाएगा। अटकलों को विराम लगाकर महापौर की कुर्सी तक कोई भी पहुंचे, यह तय है कि शहर विकास व जन सुविधा बढ़ाने के लिए उसके पास अवसर और संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी न हीं बंगला, कार, नौकर-चाकर की सुविधा और वित्तीय अधिकारों की कमी रहेगी। जानिए मतदाताओं ने जिस पत्याशी को शहर का प्रथम नागरिक बनाया है, उन्हें क्या-क्या अधिकार और सुविधाएं मिलेंगी।

वित्तीय अधिकार

१. ५ करोड़ तक की मंजुरी- पीछले बोर्ड में निगमायुक्त के वित्तीय अधिकार बढ़ाकर दो करोड़ रुपए कर दिए गए थे। महापौर को पांच करोड़ रुपए तक के कार्य को स्वीकृति देने का अधिकार है। मसलन दो करोड़ रुपए से अधिक व पांच करोड़ रुपए तक के कामों की मंजुरी महापौर सीधे दे सकते हैं। इसके लिए सदन से मंजुरी लेने की आवश्यकता नहीं है।
२. १० करोड़ का मद- जनसुविधा व विकास कार्यों के लिए महापौर को एक वर्ष में करीब १० करोड़ रुपए की निधि मिलती है। स्वविवेक से महापौर इस मद में से शहर के किसी भी वार्ड मेें कितनी भी राशि खर्च कर सकते हैं।
३. मासीक भत्ता- महापौर को हर महीने करीब १२ हजार रुपए भत्ते के रूप में मिलते हैं। इसमें तीन बैठक भत्ते, टेलीफोन भत्ता आदि शामिल है।
४. महापौर बीमा योजना- पूर्व महापौर रामेश्वर अखंड के कार्यकाल में महापौर बीमा योजना शुरू की गई थी। हालांकि इसके प्ररण नहीं आए लेकिन बजट इसके लिए प्रावधान रखा जाता है।

प्रशासकीय अधिकार

१. एमआइसी- महापार अपनी परिषद का गठन कर सकता है। यह एक तरह से महापौर का मंत्रिमंडल होता है। एमआइसी में निगम से संबंधित १० विभाग होते हैं जिनके प्रभारी की नियुक्ति महापौर का अधिकार क्षेत्र है।
२. प्रशासकीय नियंत्रण- द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों की पदोन्नती, निलंबन, बहाली आदि करना या अनुशंसा करने का अधिकार मेयर इन काउंसिल के पास होते हैं। अवकाश स्वीकृति और मस्टर कर्मियों की सेवा अवधि में बढ़ोतरी भी एमआइसी के अधिकार में है।
३. बजट प्रस्ताव- नगर नगम का बजट निगमायुक्त द्वारा तैयार कर महापौर को प्रस्तावित किया जाता है। महापौर व एमआइसी अपने स्तर पर प्रस्तावित बजट को लेकर निर्णय करते हैं और इसके बाद ही अंतिम मंजुरी के लिए सदन में इसे भेजा जाता है।
४. निजी कर्मचारी- निविदा, साक्षात्कार या अन्य किसी प्रक्रिया के बिना महापौर अपने लिए एक व्यक्ति को निजी कर्मचारी नियुक्त कर सकता है। उसे १५ हजार रुपए मासीक वेतन देने का अधिकार है।
सुविधाओं से लेस महापौर
- शहर के मध्य बगीचे, लॉन, पार्किंग, निजी कार्यालय आदि से लेस बड़े परिसर में बसा सर्वसुविधायुक्त विश्राम भवन
- चार पहियां दो वाहन
- हर महीने २०० लीटर डीजल/पेट्रोल
- विभिन्न शिफ्ट में वाहन चालक, माली, चौकीदार, कार्यालय कर्मचारी सहित करीब ३५ कर्मचारियों का स्टॉफ।
- विश्राम भवन का संधारण, बिजली बिल व अन्य खर्च।

एमआइसी के अधीन निगम के यह विभाग

१. आवास एवं पर्यावरण समिति
२. जल कार्य समति
३. विधि एवं सामान्य प्रशासन समिति
४. महिला एवं बाल विकास समिति
५. राजस्व समिति
६. आइटी सेल समिति
७. स्वास्थ्य समिति
८. प्रकाश विभाग
९. लेखा समिति
१०.उद्यान विकास
११.योजना एवं कॉलोनी समिति
परिवहन समिति

एक्सपर्ट व्यू

त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था में नगरीय प्रशासन के नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद को स्थानीय स्तर की योजना के लिए महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त है। निगम चार इकाइयों में बटा होता है, एक परिषद, दूसरी मेयर इन काउंसिल, तीसरी महापौर और चौथी नगर निगम आयुक्त। आयुक्त राज्य सरकार का प्रतिनिधि होता है और जो विधि सम्मत कार्य बोर्ड या एमआइसी करे, उसके पालन के लिए वह कानून के प्रतिबद्ध होता है। महापौर का सबसे बड़ा अधिकार स्वविवेक से अपने मंत्रीमंडल के गठन का है। १० सदस्यीय महापौर मंत्रिमंडल जिसे मेयर इन काउंसिल कहते हैं, के लिए महापौर ही चुने हुए पार्षदों को एमआइसी सदस्य मनोनित करता है। इसलिए कह सकते हैं कि एमआइसी में महापौर को एकाधिकार होता है। निगम बोर्ड केवल नितिगत मामले में अधिकृत है लेकिन रेग्युलर वित्तीय व्यवस्था, निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग, पांच करोड़ तक के टेंडर आदि एमआइसी के वित्तीय अधिकार में होते हैं। एक तरह से वित्तीय अधिकार प्रशासकीय अधिकार महापौर व एमआइसी अंर्तगत रहता है। द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों की नियुक्ति व भर्ती, यह ज्युडेक्शन भी मेयर इन काउंसिल को रहता है। इस तरह निगमायुक्त व मेयर को विभिन्न शक्तियां प्राप्त होती है।
- कैलाश विजयवर्गीय, वरिष्ठ अभिाषक व ३८ वर्ष से नगर निगम के विधि सलाहकार

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

Monsoon Alert : राजस्थान के आधे जिलों में कमजोर पड़ेगा मानसून, दो संभागों में ही भारी बारिश का अलर्टमुस्कुराए बांध: प्रदेश के बांधों में पानी की आवक जारी, बीसलपुर बांध के जलस्तर में छह सेंटीमीटर की हुई बढ़ोतरीराजस्थान में राशन की दुकानों पर अब गार्ड सिस्टम, मिलेगी ये सुविधाधन दायक मानी जाती हैं ये 5 अंगूठियां, लेकिन इस तरह से पहनने पर हो सकता है नुकसानस्वप्न शास्त्र: सपने में खुद को बार-बार ऊंचाई से गिरते देखना नहीं है बेवजह, जानें क्या है इसका मतलबराखी पर बेटियों को तोहफे में देना चाहता था भाई, बेटे की लालसा में दूसरे का बच्चा चुरा एक पिता बना किडनैपरबंटी-बबली ने मकान मालिक को लगाई 8 लाख रुपए की चपत, बलात्कार के केस में फंसाने की दी थी धमकीराजस्थान में ईडी की एन्ट्री, शेयर ब्रोकर को किया गिरफ्तार, पैसे लगाए बिना करोड़ों की दौलत

बड़ी खबरें

कलकत्ता हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, कहा - 'पश्चिम बंगाल में बिना पैसे दिए नहीं मिलती सरकारी नौकरी'Jammu-Kashmir News: शोपियां में फिर आतंकी हमला, CRPF के बंकर पर ग्रेनेड अटैकओडिशा के 10 जिलों में बाढ़ जैसे हालात, ODRAF और NDRF की टीमों को किया गया तैनातकैबिनेट विस्तार के बाद पहली बार नीतीश कैबिनेट की बैठक, इन एजेंडों पर लगी मुहरशिमला में सेवाओं की पहली 'गारंटी' देने पहुंचेगी AAP, भगवंत मान और मनीष सिसोदिया कल हिमाचल प्रदेश के दौरे परममता बनर्जी के ट्विटर प्रोफाइल में गायब जवाहर लाल नेहरू की तस्वीर, बरसी कांग्रेसमुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई, गुजरात के भरूच में पकड़ी ‘नशे’ की फैक्ट्री, 1026 करोड़ के ड्रग्स के साथ 7 गिरफ्तारकेंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह के मानहानि के बयान पर मंत्री जोशी का पलटवार, कहा-दम है तो करें मानहानि
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.