क्यों... रिश्वत छोड़ आरक्षक ने लगाई दौड़ 

क्यों... रिश्वत छोड़ आरक्षक ने लगाई दौड़ 
Lokayukta proceedings

लोकायुक्त की कार्रवाई - नियमित गुजरने वाले गिट्टी-रेती डंपर से 5 से 10 हजार रुपए महीना फिक्स

उज्जैन. पैसा कमाने की भूख में एक आरक्षक पुलिस की वर्दी का नाजायज फायदा उठा रहा था। उसके चेक पोस्ट से गाड़ी निकालने का मतलब पैसा देकर ही जाना है। शहर का एक बिल्डिंग मैटेरियल सप्लायर गाड़ी रोकने पर हर बार आरक्षक की मांग पूरी करते-करते तंग आ गया। इस बार भी आरक्षक ने 5 हजार की डिमांड रखी थी, लेकिन चार हजार में मान गया। पैसा लेकर युवक को ऋषिनगर पेट्रोल पंप के पास बुलाया। खुद भी कार में रिश्वत लेने पहुंचा। जैसे ही रुपए हाथ में लिए सामने लोकायुक्त की टीम खड़ी देख दौड़ लगा दी। घेराबंदी कर उसे पकड़ा गया। इस दौरान बाइक से उससे बात कर रहा साथी आरक्षक भाग निकला।


यह वाक्या शुक्रवार सुबह का है। आगर जिले की तनोडिय़ा चौकी पर  ढाई साल से पदस्थ आरक्षक बलदेव सिंह राजपूत ने फरियादी दीपक मीणा को ऋषिनगर पेट्रोल पंप के पास मिलने बुलाया। खुद सफेद इंडिगो कार (एमपी 04 सीबी-1623) से पहुंचा। दीपक से 4 हजार रुपए पेंट की जेब में रखते ही सामने लोकायुक्तटीम देख होश उड़ गए। उसने विक्रम कीर्ति मंदिर की ओर दौड़ लगा दी। फरियादी व लोकायुक्त निरीक्षक रोहित यादव व अन्य भी पीछे भागे। कुछ दूर भागने के बाद ही उसे दबोच लिया। सिंधिया प्राच्य शोध संस्थान में बैठ लोकायुक्त ने कार्रवाई पूरी की। लोकायुक्त के पकड़े जाने पर बेटा दीपक घर से पेंट लाया। बताते हैं कि पंप पर आरक्षक बलदेव के साथ उज्जैन एसपी ऑफिस में पदस्थ साथी जगदीश वासुनिया भी  था, जो भाग निकला। टीम में निरीक्षक दिनेश रावत, आरक्षक सुनील परसाई, विशाल रेश्मिया, मो. इशरार, अशोक खत्री, राजेश पाटीदार शामिल रहे।

Deepak
प्रत्येक गाड़ी पर 5 से 10 हजार रुपए महीने की बंदी
आरक्षक पर आरोप है कि  रूट से नियमित गुजरने वाले गिट्टी-रेती डंपर से 5 से 10 हजार रुपए महीना फिक्स कर रखा था। जो रुपए नहीं देते उनकी गाड़ी थाने पर खड़ी करवा देता। लोकायुक्त कार्रवाई के बाद कुछ पीडि़तों ने यह खुलासा किया। मंगलम कंस्ट्रक्शन के अनिल पाटीदार ने कहा कि उनकी गाडिय़ों को भी उक्त आरक्षक ने रॉयल्टी होने के बावजूद कई बार रोका व रुपए वसूले।  मूलत: शाजापुर के खरसौदा का निवासी बलदेव को नौकरी में 13 साल हो गए। तनोडिय़ा में पदस्थी के बावजूद उज्जैन महानंदानगर के सी सेक्टर में 13/2 में मकान है। 


फरियादी बोला, जरूरी हो गया था ट्रेप करवाना 
फरियादी दीपक ने बताया 6 माह पहले रात दो बजे गिट्टी से भरा डंपर रोक लिया। अगले दिन आगर थाने बुलवाया। आरक्षक ने यहां एसआई अटारिया को 20 हजार रुपए दिलवाए तब डंपर छोड़ा। फिर ढाई माह पहले फोन पर कहा डंपर नहीं पकड़वाना चाहते तो 5 हजार रुपए दो। मुझे नानाखेड़ा चौराहे पर बुलवाया। यहां साथ चाय भी पी व रुपए लेकर चला गया। सात दिन पहले फिर डंपर रोक लिया व 5 हजार रुपए मांगने लगा। बाद में चार हजार में मान गया। 


चश्मा उतारना था कोड  
 फरियादी को कोडवर्ड दिया था रुपए देते ही चश्मा उतार देना, हम समझ जाएंगे। इशारा मिलते ही पहुंचे तो आरक्षक मोबाइल फेंक भागने लग जिसे दौड़कर पकड़ा। उसके खिलाफ धारा 7(13)1 डी में प्रकरण दर्ज किया गया है। साथ में कौन पुलिसकर्मी लिप्त है इसकी भी जांच होगी।
रोहित यादव, निरीक्षक लोकायुक्त

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