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यहां शिव के दर्शन करने महिलाओं को करना होता है पर्दा, पुरुषों के लिए भी हैं ये खास नियम

locationउज्जैनPublished: Jan 27, 2024 08:35:04 am

Submitted by:

Sanjana Kumar

भोलेनाथ जितने सहज और सरल हैं, उतने ही रहस्यमयी भी हैं। पूरे भारत में अपने रहस्यमय स्वरूपों में भगवान शिव के सबसे रहस्यमयी स्वरूपों में से एक है महाकाल। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में में शिव का यह स्वरूप भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है...

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भोलेनाथ जितने सहज और सरल हैं, उतने ही रहस्यमयी भी हैं। पूरे भारत में अपने रहस्यमय स्वरूपों में भगवान शिव के सबसे रहस्यमयी स्वरूपों में से एक है महाकाल। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में में शिव का यह स्वरूप भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हर दिन महाकाल का शृंगार किया जाता है और हर दिन 5 आरती की जाती हैं। महाकाल मंदिर में बाबा के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइन एक दिन नहीं या किसी विशेष दिन नहीं बल्कि हमेशा ही रहती है। वहीं भस्मआरती में भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं। भोर में 4 बजे की जाने वाली यह आरती बेहद खास मानी जाती है, इसीलिए हर कोई चाहता है कि वे यदि महाकाल के दर्शन करने आ रहा है, तो भस्म आरती में जरूर शामिल हो। लेकिन आपको बता दें कि इस आरती में शामिल होने के लिए पुरुषों और महिलाओं के लिए कुछ खास नियम हैं...जिन्हें फॉलो करना अनिवार्य है..

भस्म आरती में शामिल होने के लिए पुरुषों और महिलाओं के लिए एक ड्रेस कोड तय है। यदि इस ड्रेस कोड का पालन नहीं किया जाता, तो भस्म आरती में शामिल होने की परमिशन भी नहीं दी जाती।

पुरुषों के लिए ये है ड्रेस कोड

भस्म आरती के दर्शन करने के लिए पुरुषों को कुछ नियमों का पालन करना होता है उन्हें इस आरती को देखने के लिए केवल धोती पहननी होती है। धोती साफ और सूती होनी चाहिए।

महिलाओं को करना होता है पर्दा

ड्रेस कोड के साथ ही उन्हें एक खास नियम का पालन करना होता है। महिलाओं को आरती में शामिल होने के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। वहीं जब शिवलिंग पर भस्म चढ़ाई जाती है, तो उस समय उन्हें घूंघट करने को कहा जाता है। यानी महिलाएं भगवान शिव के इस स्वरूप के दर्शन घूंघट की आड़ से ही कर सकती हैं।

क्यों करना होता है घूंघट

दरअसल माना जाता है कि उस भस्म आरती के समय भगवान शिव अपने निराकार रूप में होते हैं और महिलाओं को भगवान शिव के इस स्वरूप के प्रत्यक्ष दर्शन करने की अनुमति नहीं होती।

ऐसे शुरू हुई भस्म आरती की परंपरा

पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि प्राचीन काल में दूषण नाम के एक राक्षस की वजह से पूरी उज्जैन नगरी में हाहाकार मचा था। नगरवासियों को इस राक्षस से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने उसका वध कर दिया। फिर गांव वाले भोले बाबा से यहीं बस जाने का आग्रह करने लगे। तब से भगवान शिव महाकाल के रूप में वहां बस गए। शिव ने दूषण को भस्म किया और फिर उसकी राख से अपना शृंगार किया। इसी वजह से इस मंदिर का नाम महाकालेश्वर रख दिया गया और शिवलिंग की भस्म से आरती की जाने लगी।

पहले ऐसे की जाती थी आरती

भोर में 4 बजे होने वाली आरती को भस्म आरती इसलिए कहा जाता है क्योंकि महाकाल बाबा की पहली आरती के समय बाबा महाकाल का श्मशान में जलने वाली सुबह की पहली चिता की भस्म से शृंगार किया जाता था। इस भस्म से बाब महाकाल का शृंगार हो इसके लिए भी लोग पहले से ही रजिस्ट्रेशन कराते हैं और मृत्यु के बाद उनकी भस्म से भगवान शिव का शृंगार किया जाता था

एक व्यक्ति 10 टिकट की कर सकता है बुकिंग

महाकाल दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग 60 दिन पहले की जा सकती है। इसके अलावा दर्शन से दो दिन पहले भी टिकट बुक कर सकते हैं। एक व्यक्ति अपने खाते के माध्यम से 10 लोगों के लिए बुकिंग कर सकता है। ऑनलाइन बुकिंग के लिए श्रद्धालुओं को 200 रुपए देने होंगे। दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग करने से पहले, आधिकारिक वेबसाइट shrimahakaleshwar.com पर जाएं। होम पेज पर जाकर आपको Mahakal Darshan/Bhasm Aarti Booking पर क्लिक करना होगा। इसके बाद दर्शन या आरती के लिए तारीख का चयन करें। यहां रजिस्ट्रेशन करें। बुकिंग के बाद, आपके मोबाइल पर मैसेज के माध्यम से रजिस्ट्रेशन संख्या और पासवर्ड आ जाएगा। ध्यान रखें कि यहां स्त्रियों और बच्चों के दर्शन के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। पति और पत्नी चार बच्चों के साथ यात्रा कर सकते हैं। श्रद्धालु प्रतिदिन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन करने के लिए सुबह 6 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक ?750 और ?1500 के टिकट पर जा सकते हैं। यात्री बड़ा गणेश मंदिर के पास प्रोटोकॉल कार्यालय के काउंटर से टिकट खरीद सकते हैं।

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