महाकाल मंदिर प्रशासन की गौशाला में एक दर्जन से ज्यादा गायों की मौत, जिम्मेदार कौन ?

जिस दूध से होता है बाबा महाकाल का दुग्धाभिषेक उसे देने वाली एक दर्जन से ज्यादा गायों की मौत, महाकाल मंदिर प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर..

By: Shailendra Sharma

Published: 15 Aug 2020, 05:30 PM IST

उज्जैन. जिस दूध से बाबा महाकाल का अभिषेक होता है और जिसके चरणामृत से दर्शनार्थी खुद को शिव भक्ति में लीन पाते हैं उस दूध को देने वाली एक दर्जन से ज्यादा गायों की मौत हो गई है। बाबा महाकाल के अभिषेक के लिए चिंतामन स्थित महाकाल मंदिर प्रशासन की गौशाला से दूध लाया जाता है और इसी गौशाला में रहने वाली 12 से ज्यादा गायों की मौत ने मंदिर प्रशासन की लापरवाही की कलई खोल दी है। दरअसल मंदिर प्रशासन की गौशाला में गौ माताओं के खाने के लाले पड़े हुए हैं जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं और इसका नतीजा ये हुआ कि शुक्रवार की रात गौशाला में गायों की मौत हो गई।

मंदिर प्रशासन की लापरवाही उजागर
गौशाला में गायों की मौत की इस घटना ने मंदिर प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। मंदिर प्रशासन की गौशाला में एक ही दिन में दर्जनभर से ज्यादा गायों की मौत ने प्रशासन की उन तमाम लापरवाहियों को खोलकर रख दिया है जो बीते कई दिनों से बरती जा रही हैं। सूत्र बताते हैं कि गौशाला के प्रभारी अधिकारी प्रतीक द्विवेदी व गोशाला प्रभारी निरंजन जूनवाल गौशाला शहर से महज पांच किमी दूर स्थित होने के चलते लंबे समय से गौशाला नहीं गए थे और फोन पर ही जानकारी लेकर अधिकारियों को जानकारी और फीड बैक दे रहे थे। यही नहीं इस लापरवाही की जानकारी मंदिर प्रशासक सुजान सिंह रावत को भी थी, लेकिन लगता है राजनैतिक दल के प्रभाव के कारण उन्होंने भी लापरवाहों पर कार्रवाई नहीं की जिसका नतीजा मूक प्राणियों को भुगतना पड़ा। बावजूद किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। शाम पांच बजे से रात नौ बजे के बीच 12 से ज्यादा गायों ने दम तोड़ दिया जबकि गौशाला में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं जो लंबे समय से बंद पड़े हैं। यही नहीं हमारे सूत्र यह भी बताते हैं कि मंदिर की सुरक्षा अधिकारी रूबी यादव ने आज तक गौशाला का औचक निरीक्षण भी नहीं किया जबकि मंदिर के सभी प्रकल्पों की सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही इन्ही की है। रात में गौशाला में कार्य करने वाले कर्मचारी या तो नशे के हालात में होते हैं या फिर गौशाला पर ध्यान ही नहीं देते बल्कि अपने कक्ष में जाकर आराम फरमाते हैं जिनका समय समय पर निरीक्षण करना मंदिर परिसर की सुरक्षा अधिकारी और गौशाला प्रभारी की जवाबदेही है। लेकिन किसी ने भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया। गौशाला के हालात कुछ ऐसे हैं कि वहां पर गायों को खाने के तक लाले हैं लेकिन फिर भी गायों से दूध निकाला जाता है जिससे गाय धीरे धीरे कमजोर हो गईं और अब उनकी मौत हो गई है।

लीपापोती की हो रही कोशिश
वहीं अब इस मामले में लीपापोती की कोशिश होती भी दिख रही है। शहर के प्रमुख राजनेता भी मामले पर पर्दा डालने में लग गए हैं। बताया जा रहा है कि एक विशिष्ट पद पर आसीन महिला नेत्री के जेठ इस गौशाला के प्रभारी हैं इसलिए मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। हिन्दू वादी संगठन और गौमाता के सेवक कहलाने वाले लोग भी चुप्पी साधे हुए हैं। मंदिर प्रबंधन पोस्टमार्टम का हवाला देकर जांच करवाने की बात कह रहा है वहीं गायों की मौत का जिम्मेदार फूड प्वॉइजनिंग को बताया जा रहा है। आज स्वतंत्रता दिवस का अवकाश है, दूसरे दिन रविवार है और फिर सोमवार को बाबा महाकाल की शाही सवारी निकाली जाएगी। ऐसे में मामले को किसी भी तरह से दबाकर रखे जाने के प्रयास हो रहे हैं जिससे कि लोगों को इस बात की जानकारी न लग सके कि गौ माताओं की प्राणहर्ता आखिर कौन है?

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