video : पत्रिका टॉक शो : बिगड़ चुकी शिक्षा की दशा और दिशा, हलवाई को भी मात दे रहे टीचर...

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Lalit Saxena | Publish: Aug, 04 2018 08:43:32 PM (IST) Ujjain, Madhya Pradesh, India

शिक्षा व्यवस्था पर शिक्षकों व विद्यार्थियों ने रखे विचार, सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने की जरूरत

उज्जैन. सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों की तुलना में कमजोर छात्र (दक्षता) प्रवेश लेता है। शिक्षक अपने प्रयास से उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को काफी हद तक सुधारते हैं। इसका कारण ही सरकारी स्कूलों का रिजल्ट निजी स्कूलों से ज्यादा अच्छा है, लेकिन जब स्कूलों की समस्याओं की बात आती है, तो मूलभूत सुविधाओं के अभाव के साथ ही शिक्षकों की कमी, शिक्षकों की दर्जनों कैटेगिरी व हर दिन बदलती नीति से अव्यवस्था फैली हुई है। आज नई-नई नीतियों की जगह सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक माहौल बनाने की जरूरत है। इसके लिए शिक्षकों से सिर्फ पढ़ाई वाला काम ही करवाया जाए। स्कूलों में वे हलवाई बनकर रह गए हैं। इसके अतिरिक्त अन्य काम में लगाकर उन्हें विद्यार्थियों से दूर करने का प्रयास नहीं किया जाए। यह बात सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए आयोजित टॉक शो में शिक्षक व विद्यार्थियों ने कही।

यह दिए सुझाव

शिक्षकों को अन्य प्रशासनिक काम में नहीं लगाया जाए।

शिक्षकों की दर्जनों कैटेगिरी को खत्म किया जाए। स्कूलों में सभी शिक्षक एक समान रहे।

सभी विषयों के शिक्षक स्कूल की पदस्थापना की जाए।

नई-नई योजना की जगह स्कूलों में प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाया जाए।

अनावश्यक रूप से परीक्षा में पास करने की नीति में बदलाव किया जाए।

इनका कहना है

शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता का दर्जा दे दिया, लेकिन सरकार शिक्षकों पर अविश्वास के साथ सम्मान भी नहीं करती है। यह व्यवस्था सुधारने की जरूरत है।
- राजेश शर्मा शिक्षक

सरकारी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की इतनी कैटेगरी हो गई है कि शिक्षक अब बचे ही नहीं है। शासन भी शिक्षकों को सुविधा नहीं देना चाहता है।
- बृजेश दोहरे शिक्षक

सरकारी स्कूलों में कमजोर विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं, लेकिन इन स्कूलों का रिजल्ट निजी स्कूलों की तुलना में बेहतर है। यह शिक्षकों की मेहनत का प्रमाण है।
- अनोखीलाल शर्मा शिक्षक

देश की भावी पीढ़ी के निर्माण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षक निभाते हैं। प्रशासन को शिक्षकों का दर्द समझने की जरूरत है।
- रितु शर्मा खेल शिक्षक

शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य इन तीन व्यवस्थाओं से व्यक्ति सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है, लेकिन यह ही अव्यवस्था का शिकार है। सुधार का हर प्रयास असफलता है।
- शैलेंद्र व्यास शिक्षक

स्कूलों में हर विषय का विशेषज्ञ शिक्षक होना चाहिए। संस्कृत की पढ़ाई सामाजिक विज्ञान का शिक्षक नहीं करवा सकता है।
- अशोक दुबे शिक्षक

सरकार मध्यप्रदेश की सड़क और शिक्षा व्यवस्था की तुलना अमेरिका से करती है। हकीकत यह है कि कब किस स्कूल की छत टपक जाए।
- रंचित व्यास विद्यार्थी

सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधा का अभाव है। अव्यवस्थाओं के चलते अभिभावक निजी स्कूलों में एडमिशन करवा देते हैं।
- राहुल नागर विद्यार्थी

फेल होने वाले विद्यार्थियों के लिए रुक जाना नहीं योजना आई। इसी तरह विद्यार्थियों के लिए अन्य योजना भी आनी चाहिए। जिससे उन्हें लाभ हो।
- अमर व्यास विद्यार्थी

सरकारी स्कूलों में पर्याप्त संसाधन का अभाव है। सभी स्कूलों की हालत खराब है। खासकर छात्राओं के लिए कुछ भी मौजूद नहीं है।
- अवनि महेश्वरी विद्यार्थी

प्राथमिक और माध्यमिक में बोर्ड परीक्षा खत्म कर विद्यार्थियों का बेसिक एजुकेशन कमजोर किया है। इसमें सुधार किया जाना चाहिए।
- चेल्लसी चौपड़ा, विद्यार्थी

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