scripton Mahashivratri, how will the new Mahakal corridor be arranged? | महाशिवरात्रि पर श्रद्धा का सैलाब आया तो कैसी होगी नए महाकाल कॉरिडोर की व्यवस्था | Patrika News

महाशिवरात्रि पर श्रद्धा का सैलाब आया तो कैसी होगी नए महाकाल कॉरिडोर की व्यवस्था

लोहे की रेलिंग से कॉरिडोर की खूबसूरती बिगडऩे के कारण इसे निरस्त किया लेकिन इसकी जगह दूसरा विकल्प नहीं तलाशा, अभी खुली रहेंगी सड़कें

उज्जैन

Published: December 24, 2021 10:11:04 pm

उज्जैन. नक्काशीदार पत्तथरों के बीच तैयार हो रहे महाकाल मंदिर के भव्य कॉरिडोर में एक बड़ी कमी के कारण भविष्य की दर्शन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इस नए कॉरिडोर में श्रद्धालुओं की भीड़ को कतारबद्ध चलाने या जगह-जगह रोकने के लिए बैरिकेडिंग के कोई इंतजाम नहीं है। एेसे में नए कॉरिडोर से प्रवेश व्यवस्था शुरू होने के बाद पर्व विशेष पर प्रशासन के लिए भीड़ नियंत्रण बड़ी चुनौती हो सकता है।

on Mahashivratri, how will the new Mahakal corridor be arranged?
लोहे की रेलिंग से कॉरिडोर की खूबसूरती बिगडऩे के कारण इसे निरस्त किया लेकिन इसकी जगह दूसरा विकल्प नहीं तलाशा, अभी खुली रहेंगी सड़कें

स्मार्ट सिटी के मृदा प्रोजेक्ट अंतर्गत महाकाल मंदिर के पीछले भाग में नए कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है। प्रोजेक्ट का पहला चरण पूरा होने के बाद इस नए कॉरिडोर से होते हुए ही श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश करेंगे। भीड़ नियंत्रण के दृष्टिगत पहले यहां लोहे की रेलिंग लगाई जा रही थी। कुछ व्यवहारिक समस्याओं के चलते उक्त रेलिंग लगाने की योजना निरस्त कर नया विकल्प तलाशने का निर्णय लिया गया था। लोहे की रेलिंग से बैरिकेडिंग की व्यवस्था का निर्णय तो वापस ले लिया गया लेकिन अभी तक नया विकल्प नहीं तलाशा जा सका है। एेसे में फिलहाल कॉरिडोर का पैदल मार्ग खुला ही रहेगा। मसलन सीमेंट कांक्रीट से बने रोड पर श्रद्धालु बिना कहीं रुके चल तो सकेंगे लेकिन भीड़ अधिक होने पर व्यवस्था बनाना मुश्किल हो सकता है।

दो पॉथ व व्हीकल रोड, बीच में लगेंगे पौधे

महाकाल मंदिर कॉरिडोर में पैदल चलने के लिए सीमेंट कांक्रीट के १०-१० फीट से अधिक चौड़े दो पाथ बनाए जा रहे हैं। दोनो पाथ के बीच कुछ फीट का अंतराल है। इनके अलावा एक अन्य पॉथ इ-रिक्शा के लिए बनाया जा रहा है। आवश्यकतानुसार प्रवेश व्यवस्थ बनाने में इन पॉथ का उपयोग हो सकेगा। इन पॉथ के बीच पौधे लगाने की योजना है। यह पौधे एेसे रहेगे जिससे कॉरिडोर की खूबसूरती और बढ़ेगी वहीं विजन भी क्लीयर रहेगा। पौधों से बेरिकेड के की कमी को दूर करने का भी प्रयास है लेकिन एेसा होना मुश्किल लग रहा है।

900 मीटर लंबा है कॉरिडोर

महाकाल मंदिर का नया कॉरिडोर त्रिवेणी संग्रहालय के नजदीक से महाकाल मंदिर के पीछे तक बनाया जा रहा है। सभी पॉथ मिलाकर इसकी कुल लंबाई करीब ९०० मीटर रहेगी। बिना रेलिंग या अन्य बेरिकेडिंग के प्रवेश के लिए खुला लंबा मार्ग मिलेगा। आम दिनों में इससे कोई समस्या नहीं आएगी लेकिन पर्व विशेष पर यहां भीड़ को कैसे कतारबद्ध किया जाएगा या कैसे क्रमानुसार आगे बढ़ाया जाएगा, इसकी कोई व्यवस्था नहीं है। संभव है कि तब मजबूरी में लोहे की जाली वाले पुलिस के पुराने बेरिकेड ही अस्थायी रूप से लगाकर व्यवस्था बनाना पड़े।

6 करोड़ से लग रही थी रेलिंग

कॉरिडोर में भीड़ नियंत्रण की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ही यहां पहले रेलिंग लगाने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए टेंडर जारी कर एजेंसी भी तय कर ली गई थी। योजना अंतर्गत करीब ६ करोड़ रुपए से ९०० मीटर लंबाई में लगभग ३ हजार रेलिंग लगाई जाना थी। पूरी रेलिंग लगाने से पूर्व प्रायोगिक तौर पर छोटे भाग में कुछ रेलिंग लगाई गई थीं। इससे भव्य कॉरिडोर की खूबसूरती प्रभावित हो रही थी वहीं रेलिंग को समय-समय पर लगाना-खोलना और स्टोर करना आसान नहीं था। साथ ही लोहे से श्रद्धालुओं के चोटिल होने की भी आशंका था। नतीजतन अव्यवहारिक योजना होने से इसे निरस्त कर दिया गया था।

इनका कहना
कॉरिडोर में लोहे की रेलिंग लगाने की योजना थी लेकिन कुछ समस्याओं के कारण इसे निरस्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर अभी नई योजना तैयार नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल कॉरिडोर को एेसा ही रखा जा रहा है।
- धमेंद्र वर्मा, अधीक्षण यंत्री स्मार्ट सिटी कंपनी

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